गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

प्यार में है ईमानदारी जरूरी

हेलो दोस्तो! कई बार आप उस रास्ते की ओर बढ़ते जाते हैं जिसकी कोई मंजिल नहीं होती। हैरानी इस बात की होती है कि आपको उस रास्ते की रुकावटों का ज्ञान पूरी तरह होता है। फिर भी ताजी हवा की चाह में आप उसी तरफ बढ़ते जाते हैं। यह जानते हुए भी कि यहाँ जीवनदान देने वाली फिजा व आँखों को सुकून देने वाले नजारे आपके लिए हमेशा नहीं रहेंगे।
आप इसे खो देने के डर से इतने भयभीत हो जाते हैं कि जब तक मुमकिन हो इसका सुख नहीं छोड़ पाते। आप यह सोचना ही नहीं चाहते कि बहुत दूर निकल जाने पर वहाँ से लौटना कितना कठिन होगा। पर शायद किसी चमत्कार का इंतजार रहता है। शायद कोई जादुई करिश्मा हो जाए और उस अंतहीन सफर की एक मंजिल मिल जाए। पर जीवन के किसी भी क्षेत्र में कभी कोई चमत्कार जैसी चीज नहीं होती है।
हाँ, कुछ ऐसे खुशकिस्मत अवश्य होते हैं जिन्हें उनके मनमाफिक रास्ता मिलता जाता है पर अमूमन हर दिखने वाले चमत्कार के पीछे संघर्ष की लंबी पृष्ठभूमि होती है।
रिंकु जी, आप किसी चमत्कार की उम्मीद न ही करें तो अच्छा है। आप 25 वर्ष के हैं और आपकी दोस्त 18 वर्ष की है। आप लोग एक दूसरे को बेहद प्यार करते हैं। मुश्किल यह है कि आपकी दोस्त अपने घर वालों की मर्जी के बिना आपसे शादी नहीं कर सकती।
आप अपने परिवार की सहमति लेकर उससे शादी करने को तैयार हैं। आपकी दोस्त को अपने परिवार वालों के मान जाने की बिल्कुल ही उम्मीद नहीं है तभी वह यह दिलासा देती रहती है कि शादी के बाद भी वह आपसे मिलती रहेंगी और ध्यान रखेंगी। रिंकु जी, ऐसा बहुत कम होता है कि कोई साथी इतनी ईमानदारी से अपनी स्थिति सामने रखकर किसी से प्यार करे। अमूमन जाने-अनजाने ही लोग खुद भी और साथी को भी भ्रम में ही रखते हैं।
आपकी दोस्त जो इतनी कम उम्र की हैं फिर भी वह अपने रिश्ते के प्रति बेहद साफ नजरिया रखती हैं। अगर उसका यही फैसला है तो भी उसका आदर करें और इसे रिश्ते से पीछे हट जाएँ।

आपको इस रिश्ते से इसलिए भी पीछे हट जाना चाहिए क्योंकि आपकी दोस्त आपको उतना प्यार नहीं करती जितना आप उसे करते हैं। या यूँ कह लें कि आपकी दोस्त जितना अपने परिवार की चिंता करती हैं उतनी आपकी नहीं करती।
पर सबसे अच्छी बात यह है कि उन्होंने इस मामले में आपको धोखे में नहीं रखा है। वरना वह दोस्ती का चक्कर भी चलाती रहती और जब उसकी शादी हो जाती तो वह माफी माँगकर चलती बनती। पर उसने अपनी स्थिति आपके सामने बिल्कुल साफ रखी है। उसके बावजूद भी यदि आप जबरदस्ती उसके पीछे-पीछे भाग रहे हैं तो इसको कोरी नादानी ही कहा जाएगा।
शादी होने के बाद भी वह आपसे मिलती रहेगी ऐसी सांत्वना एक कच्ची उम्र की लड़की ही दे सकती है। हो सकता है आपके रोने-धोने से उसे दया आ जाती हो और वह इस प्रकार का दिलासा देकर आपका साहस बँधाना चाहती हो। एक तरह से तो यह उसकी समझदारी है। जो कुछ कर पाना उसके हाथ में नजर आता है वह उसका भरोसा दिला रही है। पर यह तो आप भी अच्छी तरह समझ रहे होंगे कि ऐसा कुछ संभव नहीं होगा।
अब आपके परिपक्वता दिखाने का समय है। आपको इस रिश्ते से फौरन पीछे हट जाना चाहिए। किसी को केवल भावनाओं में उलझाकर उसके मन के खिलाफ ले जाना उचित नहीं है। वह अपने माँ-बाप को प्यार करती है, उनका दिल नहीं दुखाना चाहती है इसमें बुराई क्या है। आप निश्चित जानें वह कभी आपके साथ नहीं रहेग और भेद खुलने पर वह इस रिश्ते से इन्कार भी कर देगी। यदि वह आपसे उतना प्यार नहीं करती है तो कायदे से उसे यही करना भी चाहिए
कहावत है, बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी। आप किस दिन का इंतजार कर रहे हैं। जब वह शादी करके चली जाए तब आप अपने लिए लड़की खोजने निकलेंगे। रिंकु जी, तब बहुत देर हो चुकी होगी। आप बहुत ज्यादा मायूस हो जाएँगे।।
सूनापन व अकेलापन आपका हौसला तोड़ देगा। तब आपमें वह ताकत नहीं बचेगी कि आप शांत मन से एक रिश्ते के बारे में निर्णय ले सकें। आप इतने अधिक अवसाद में चले जाएँगे कि किसी चीज में आप रुचि लेना नहीं चाहेंगे। नीरसता, उदासी आपके व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुकी होगी। बेहतर यही है कि आप अभी से ही अन्य रिश्ते के विषय में सोचना शुरू कर दें। घर वालों की पसंद की लड़की से भी आप शादी कर सकते हैं।
अपनी दोस्त से मिलना-जुलना कम कर दें। इसी में आपकी भलाई है। यह रिश्ता बनाए रखना यानी कसाई की ओर खुद जाना और स्वयं को पेश करना है। आप समय रहते चेत जाएँ इसी में आपकी भलाई है। वरना मजनूँ की तरह यहाँ-वहाँ भटककर आप अपनी जिंदगी तबाह कर देंगे। इस मामले में आप अपनी ज्यादा बदनामी न करें तो अच्छा है। यह किस्सा ज्यादा खुल गया तो आपकी शादी होनी भी मुश्किल हो जाएगी। लोगों का यह मानस बन जाता है ‍कि पता नहीं वह भविष्य में अपने रिश्ते के साथ न्याय करेगा कि नहीं?उनका यह शक बेजा भी नहीं होता है। अक्सर लोग अपने नए रिश्ते में पुराने प्रेम की परछाईं तलाशने लगते हैं और उसमें निराशा ही हाथ लगती है। हर व्यक्ति अपनी तरह का होता है वह किसी और का प्रतिरूप नहीं हो सकता। उस वक्त किसी और की छवि को मन में बैठाकर किसी अन्य को उसमें खोज पाना असंभव सा हो जाएगा।
व्यावहारिकता का यही तकाजा है कि आप अपने भविष्य के लिए गंभीरता से विचार करें। इस रिश्ते को यहीं पर अलविदा कह डालें और आगे निकल चलें। अभी आपकी उम्र ही क्या है। किसी के चले जाने से बहारें नहीं रुकती। चमन खाली नहीं होता। आप इतने भाग्यवान हैं जो प्रेम की इतनी खूबसूरत व हसीन यादें आपको नसीब हुईं जो हमेशा आपको संपूर्णता का अहसास कराएगी।

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