शनिवार, 30 अक्तूबर 2010

बदल गयी तकदीर

पहले थी कॉलगर्ल अब डॉक्टर
बचपन की बातें तो मुझे याद नहीं लेकिन जब एक दिन मैं छोटे से गंदे कमरे में सो रही थी तो अचानक मेरी नानी ने मुझे एक व्‍यक्ति से मिलाया। कहा, यह तुम्‍हारा पहला ग्राहक है। उस समय मैं ग्राहक का मललब नहीं समझती थी। अंधेरे कमरे में मैं उसे ठीक से देख भी नहीं पाई।

पहला अनुभव मेरे लिए सदमे से कम नहीं था। उस दिन मुझे पता चला कि मैं एक वेश्‍यालय में रहती हूं। इसके बाद यह सिलसिला जारी रहा। ग्राहक पर ग्राहक आते रहे और मैं घुटती रही।
यह कहानी है मध्‍यप्रदेश की रीना की जो बेडिया समुदाय की है। इस समुदाय की महिलाएं यह कार्य सदियों से करती आई है। रीना भी इस परंपरा की हिस्‍सा बनी। रीना का कहना है कि जब तक मां जिंदा रही मुझे इस पेशे से दूर रखी। लेकिन उसकी मौत के बाद मेरे पिता ने मुझे इस पेशे में डाल दिया। मैं पढ़ना चाहती थी। मैं बचपन से एक प्रतिभाशाली बच्‍ची थी।
किस्‍मत बदलते देर नहीं लगती। एक दिन रीना वहां से भागने में कामयाब रही और एनजीओ की मदद से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

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