सोमवार, 3 जनवरी 2011

बेवफाई हुई हाईटेक

प्यार और विश्वास हाइटेक हुआ हो या नहीं, बेवफाई जरूर इन दिनों हाइटेक हो गई है। वर्चुअल दुनिया विवाहेतर रिश्तों की राह सुगम बना रही है। जो सुविधाएँ दूरियों को कम करने के लिए जानी जाती हैं, वे ही अब रिश्तों में दूरियाँ बढ़ाने में भी योगदान कर रही हैं।
आशिमा (नाम परिवर्तित) की जिंदगी दफ्तर, घर और पति के बीच करीब-करीब इसी प्राथमिकता क्रम से चल रही थी, या कहें भागी जा रही थी। शादी को पाँच साल होने आए थे और आशिमा तथा उसका पति अश्विन अपना-अपना करियर बनाने में व्यस्त थे। सुबह से लेकर देर रात तक की व्यस्त दिनचर्या में उनके लिए एक-दूसरे के लिए समय निकालना बहुत मुश्किल था।
आशिमा एक दि‍न यह देखकर दंग रह गई कि अश्विन के मोबाइल में 'एस' नाम से सेव किए गए किसी नंबर से आए मैसेजेस का अंबार लगा था... और इन मैसेजेस के कंटेंट ने अश्विन के प्रति आशिमा के विश्वास को तार-तार कर दिया।
'एस' जो भी थी, वह अश्विन को लगातार आत्मीय, उत्तेजक यहाँ तक कि कामुक प्रकृति के संदेश भेज रही थी... और अश्विन की ओर से भी उसे वैसे ही बल्कि उससे भी दो कदम आगे के मैसेज जा रहे थे! उस दिन आशिमा ने खुद को हाइटेक बेवफाई के शिकार लोगों की बढ़ती फेहरिस्त में पाया।
NDनए मौके, नई सुविधाएँ
बेवफाई का सिलसिला यूँ तो उतना ही पुराना है जितना कि प्यार का लेकिन इन दिनों बेवफाई के लिए नए 'मौके', नई 'सुविधाएँ' उपलब्ध हैं। जिस टेक्नोलॉजी ने शहरों, देशों और महाद्वीपों की दूरियाँ समाप्त कर लोगों को पास लाने का काम किया है, वही टेक्नोलॉजी रिश्तों में दूरियाँ लाने में भी सहयोग करती देखी जा रही है।
मोबाइल के अलावा ईमेल, इंटरनेट के चैट रूम, स्काइप आदि ने बेवफाई के मौकों को नए आयाम दिए हैं। आज की युवा पीढ़ी टेक्नो-सैवी तो है ही, गला-काट प्रतिस्पर्धा और करियर बनाने की होड़ में वह अक्सर व्यक्तिगत भावनात्मक संबंध बनाने और निभाने में खुद को नाकाम होता पाती है।
जीवन के इस अहम पहलू के खालीपन को भरने के लिए नए जमाने के गैजेट्स उसे बड़ा सहारा देते हैं। अश्विन का जिस लड़की से अफेयर चल रहा था, उससे वह मिला तो था केवल दो-एक बार काम के सिलसिले में की गई यात्राओं के दौरान लेकिन फोन पर दोनों का अफेयर लगातार चला आ रहा था।
परंपरागत रूप से तब बेवफाई की गई मानी जाती है जब दंपत्ति में से कोई एक किसी और के साथ दैहिक संबंध बना ले या इस दिशा में बढ़े। आज इसकी परिभाषा बदल गई है। मूल मुद्दा है अपने पार्टनर के विश्वास को तोड़ना।
चाहे रिश्ता कितना ही लांग डिस्टेंस क्यों न हो, भले ही दूरियों के कारण या अवसरों की अनुपलब्धता के चलते दैहिक संबंध न बन पाए हों और न ही उनके बनने की संभावना हो लेकिन यदि आपने अपने पार्टनर का विश्वास तोड़ा है तो आपने बेवफाई की है।
सामान्य मित्रता की हद को लांघते हुए स्थापित किया गया कोई भी रिश्ता, भले ही वह वास्तविक न होकर 'वर्चुअल' हो, बेवफाई की जद में आता है। मैरिज काउंसलर बताते हैं कि यही वर्चुअल बेवफाई इन दिनों खास तौर पर महानगरों में बढ़ती हुई देखी जा रही है।

छुपने के रास्ते, बचने का तरीका
टेक्नोलॉजी न केवल शारीरिक उपस्थिति के बिना विवाहेतर संबंधों को बनाने की सुविधा दे रही है, बल्कि अपनी करतूतों को छुपाने के भी रास्ते उपलब्ध करा रही है। मोबाइल के कॉल लॉग और मैसेजेस को डिलीट कर अपने साथी से अपनी कारगुजारियाँ छुपाई जा सकती हैं।
नेट पर अपने परिचितों से बचकर, अपनी पहचान बदलकर चैटिंग की जा सकती है। सोश्यल नेटवर्किंग साइट्स गुमनाम रहकर अफेयर चलाने के लिए खुला मैदान मुहैया कराती हैं।
सौजन्य से - तरंग, नई दुनि‍या

1 टिप्पणी: