सोमवार, 11 मई 2015

दर्द भरे शायरी


उठी जो शर्द हवा रोज बरस गया पानी
आह भरके सावन की गुजर गयी जवानी ..!

 गम ए आरजू तेरी आह में, शब् ए आरजू तेरी चाह में
जो उजड़ गया वो बसा नही और जो बिछड़ गया वो मिला नही ..!!


लगती है जिसके दिल पर, वो आँखों से नही रोते
जो अपनों के ही न हो पाए, वो किसी के नही होते ..!!


 मौत सिर्फ नाम से बदनाम है, वरना तकलीफ तो जिन्दगी ही ज्यादा देती है.. 
और स्त्री (वीवी ) सिर्फ नाम से बदनाम है, वरना तकलीफ में वही साथ देती है ...!!


 खवाब एक, मुश्किलें हज़ार हैं
तन्हाई और गम मेरे जीवन भर के यार हैं
अब तो दिल मौत के लिए भी तैयार है
क्यूँकि इस जीवन मे सिर्फ़ एक बेवफा से प्यार है..!!


जुल्म इतना भी न कर की लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा
क्यूंकि हमने जमाने को तुजे अपनी जान बता रखा है !!


 हमें मालूम था अंजाम इश्क का लेकिन
जवानी जोश पर थी जिन्दगी बर्बाद कर बैठी ..!!


 दिल का जख्म कैसे दिखाऊ किसी को यारों,
मरहम की जगह सब नमक लगाते है ..!!


 यदि रुठा हो प्यार तो मनाने मेँ क्या जाता है,
यही प्यार है यारोँ इसके हर ढंग मेँ मजा आता है.!!


 हंसो इतना कि तेरी हंसी पे सारा जमाना रो दे
रोना इतना कि आँसुओं की बाढ़ में वो सब कुछ खो दे.!


 गमें इश्क में आपके चूर होकर
तड़पता है दिल मेरा मजबूर होकर ..!!


 संगीत सुनकर ज्ञान नहीं मिलता
 मंदिर जा कर भगवान नहीं मिलता
 पत्थर तो इसलिए पूजते हैं लोग
 क्यूँ कि विश्वास के लायक इंसान नहीं मिलता !!


 रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने
 कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने
 हाँ ! मालूम हैं क्या चीज़ हैं मुहब्बत यारो
अपना ही घर जल कर देखें हैं उजाले हमने..!



 आँखों के सागर में ये जलन हैं कैसी
आज दिल को तड़पने की लगन हैं कैसी
बर्फ की तरह पिघल जायेगी जिंदगी
ये तेरी दूर रहने की कसम हैं कैसी....!


 रोया है बहुत तब जरा करार मिला है
 इस जहाँ में किसे भला सच्चा प्यार मिला है
 गुजर रही है जिंदगी इम्तिहान के दौर से
 एक ख़तम तो दूसरा तैयार मिला है..!


 रोने से किसी को पाया नहीं जाता
खोने से किसी को भुलाया नहीं जाता
यादें तो रहती है हमेशा ही ताज़ी
चाहे जिन्दगी में जितनी भी हो बर्बादी ..!


जख्म जब मेरे सीने के भर जायेंगें
आसूं भी मोती बन कर बिखर जायेंगें
ये मत पूछना किस-किस ने धोखा दिया
वर्ना कुछ अपनों के चेहरे उतर जायेंगें..!


 दर्द हैं दिल मैं पर इसका ऐहसास नहीं होता
रोता हैं दिल जब वो पास नहीं होता
बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत मैं
और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता...!!




 तुमने आंसू ही दिये हैं हमेशा इन आँखों को
आज कुछ पल के लिए इन होंठो को मुस्काने दो..!


आज भी तलाशती है नजरे प्रेम से लबालब उस कश्ती को ,
हमारे ही कमी से जो डूब गयी थी शक के नदी में ..!!


 सोचते हैं अक्सर तन्हाई में रहके
क्या मिला हमें परछाई में रहके
मोहब्बत करके भी कुछ हासिल न हुआ
बस तड़पते है हर पल रुसवाई में रहके..!!


रोने से किसी को पाया नहीं जाता 
खोने से किसी को भुलाया नहीं जाता
यादें तो रहती है हमेशा ही ताज़ी
चाहे जिन्दगी में जितनी भी हो बर्बादी ..!

दोस्तों मै अभी जाती हूँ पुनः मुलाकात होगी
आप पंक्ति पे गौर करे दर्द ए प्यार का एहसास होगी ..!
उसने कहा था आँखे भर देखा करो मुझे लेकिन
जब आँखे भर आती है तो वो नज़र नही आते ...!




अब कुछ अच्छा नही लगता ये क्या हो गया मुझे
शायद किसी अजनबी की बददुआ लग गयी मुझे ...!


 कहते है लोग हमारे समाज में असीम प्यार है
देखना आज है मुझको इस पर कितनो को एतबार है ...!


 मन में जिनके औरतो के लिए कोई सम्मान नही
उनका आस पास भटकना कोई खतरे से कम नही ...!


 दिल के दर्द जल्दी जुबा पे आते नही 
शराब के जुबा पे लगते ही अन्दर रह पते नही ...!


 मोहब्बत की हवा जिस्म की दवा बन गयी
आपसे दुरी मेरे चाहत की सजा बन गयी
अब कैसे भुलाऊ आपको एक पल के लिए
आपकी याद हमारी जीने की वजह बन गयी ...!

 शीशे के तौह्फे न देना किसी को लोग तोड़ दिया करते है
बहुत ख़ूबसूरत हो जो
उनसे कभी मोहब्बत न करना
अक्सर खूबसूरती में मगरूर लोग ही दिल को तोड़ दिया करते है ...!


क्या करे तुमसे दूर जाने का मेरा कोई इरादा नही था
लेकिन हालात ने बिछड़ने के लिए मजबूर कर दिया था ..!




लगी खन्जर दिल पर तो दर्द उतनी न हुई
जितनी दर्द उनके हाथ में खन्जर देख हुई..!


 किसी के दर्द को तुम अपना बना के देखो
बद्दुआओ की जगह दिल से दुआए निकलेगी ..!


कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख्याल भी
दिल को खुसी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
सब कुछ मेरे पास था पर तू न मेरे पास थी
तेरे यादो के सहारे कटी वो कैसे रात थी.....!

 क्या हुआ गरीबी के कपड़े से ढके है जो मेरे तन
अमीरों से ज्यादा और गंगा से निर्मल है मेरे मन ...!

 क्यू कहूँ ये आजकल अपने दिन खराब हैं
बस उलझ गये हैं काटों में समझ लो गुलाब हैं...!

शिकायत तो नही लेकिन इतना जरुर पूछना चाहती हूँ जमाने से
आखिर वो क्या करे जो जमाने के ही जुल्म से मजबूर हो जाये ...!

ए ज़िन्दगी ढूँढ कोई बिछड़ गया है मुझसे
गर वो न मिला तो "सुन" तुझे भी ख़ुदा हफ़ीज़..!

__सुना है चाहने वाले तो मुक़द्दर से मिला करते है
__________फिर उसे इस बात की तकलीफ़ क्यों,
उसके जिन्दगी से मेरे चले जाने के बाद...!


 जब नाम तेरा प्यार से लिखती हैं उँगलियाँ
मेरी तरफ ज़माने कि उठती है उँगलियाँ. !

 थे अकेले हम तो खुले थे हजारो रास्ते ,
बंद कर लिए मैंने ख़ुद सनम तेरे वास्ते ..!

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