शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

ऐसे बुलबुलों से बचके रहना...

दीपाली एक पढ़ी-लिखी गृहिणी हैं, लेकिन उसकी हर समय बुराई करने की बहुत खराब आदत है। वह न माहौल देखती है, न ही समय, बस, शुरू हो जाती है। कभी उसका निशाना उसकी सासूजी होती हैं तो कभी देवरानी या ननद। एक बार शुरू होने पर तो उसको रोकना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
सामने वाला टॉपिक चेंज भी करे तो थोड़ी देर बाद घूम-फिरके वह वहीं पहुँच जाती है। निंदापुराण उसका पसंदीदा विषय है। इसने इतना दिया, उसने उतना लिया जैसी फिजूल बातों में वह अपना समय तो बर्बाद करती ही है, दूसरों का भी मूड चौपट कर देती है।
आप नजर दौड़ाएँगी तो आसपास ही कई दीपाली मिल जाएँगी आपको। कई लोग सबको केवल टेंशन ही बाँटते रहते हैं। कई लोगों को तो इतना भी होश नहीं रहता कि हम कहाँ बैठे हैं? वे तो बस शुरू हो जाते हैं। ऐसे लोगों से लोग फिर कन्नाी काटने लगते हैं।
चाहे होटल का वेटर हो या वॉचमैन, घर के सेवक हों या आपके अधीन काम करने वाला, आपको सबसे अदब से बात करनी चाहिए, गुरूर से नहीं। आखिर हर इंसान का आत्मसम्मान होता है, अगर आपको सबके दिल में जगह बनानी है तो अपने अंदाजे बयाँ को रोचक बनाइए।
आपकी 'बॉडी लैंग्वेज' तो सलीकेदार हो ही, आपका लहजा भी लाजवाब होना चाहिए। कई लोग शिकायतों का पिटारा लिए घूमते हैं, अगर किसी से शिकायत है भी तो तीसरे आदमी से शिकायत करने से समाधान तो शायद ही निकले, बल्कि समस्या के बढ़ने के पूरे आसार नजर आते हैं। जिससे भी परेशानी हो उसी से बात करके उसे सुलझाया जाए तो बेहतर है। कई लोग सीधी बात करते ही नहीं हैं, वे घुमा-फिराके बात करने में माहिर होते हैं। आइए, कुछ इसी तरह के लोगों के बारे में जानते हैं।
दुःखियारे लोगः ये लोग उदासी की चादर ओढ़े, बिलकुल ठंडे किस्म के होते हैं। उनसे कोई गर्मजोशी से भी मिले तो भी उनके चेहरे पर न मुस्कराहट होती है, न उत्साह। वे किसी को हँसते हुए भी देखते हैं तो घूर-घूर के, मानो वे कोई गुनाह कर रहे हों।
व्यंग्यबाण चलाने वालेः इन लोगों से भी सावधान रहने की जरूरत है। वे एक तीर से दो निशाने साध लेते हैं। ताना मारने में तो ये लोग निपुण होते हैं। वर्षों की इकट्ठी सड़ी-गली बातें भी इनके दिमाग में तरोताजा होती हैं। मजाक की आड़ में ये कुछ भी कह जाते हैं, चाहे सामने वाले को कितना भी दुःख हो।
बहसबाजः बात-बात में बहस करने पे उतारू लोग भी तर्क-कुतर्क देकर सबसे उलझते रहते हैं।
बातूनीः ऐसे लोग सामने वाले को बोलने का मौका नहीं देते। ये लोग भी अपनी बातों का आकर्षण खो देते हैं। उनकी बातों को फिर कोई तवज्जो नहीं देता। इतनी वाचालता भाषा का स्तर भी गिरा देती है।
अपशब्दों का प्रयोग करने वालेः बात-बात पर गालियाँ देना इनका शगल होता है। इस तरह बात करके वे यह जताना चाहते हैं कि हममें बहुत नजदीकी रिश्ता है या घनिष्ठता है, लेकिन ये उनकी गलतफहमी होती है। गलत भाषा इस्तेमाल करने से रिश्ते की घनिष्ठता या आत्मीयता हर्गिज सिद्ध नहीं होती। ध्यान रखिए आपके दिल में सामने वाले के लिए कितना प्यार और सम्मान है, वह तो आपकी बातों से अंदाज लगाया जाएगा। आप किस तहजीब के साथ पेश आते हैं, इसी से आपके संस्कारों का पता चलता है।
स्वार्थी किस्म के लोगः ये भी हमेशा अपना मतलब पूरा करने की फिराक में होते हैं। लच्छेदार बातों का जादू चलाकर वे अपना फायदा उठा लेते हैं।
गॉसिप में डूबे-डूबेः इस किस्म के लोग भी बड़े फुर्सती होते हैं। दूसरों की जिन्दगी में बिना किसी कारण के झाँकना इनका शगल होता है। मुँह पर लच्छेदार व मीठी-मीठी बातें करने में इनका कोई सानी नहीं है। आपके पीछे ये आपका भी मजाक बना सकते हैं।
झूठी शान दिखाने वालेः अपनी हैसियत को बढ़ा-चढ़ाकर बताने के लिए ऐसे लोग झूठ का सहारा लेते हैं। कहीं से कोई चीज ५०० रु. की लाएँगे तो १००० रु. की बताने में उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती। शुरुआत में तो लोगों पर प्रभाव जमाने में ये माहिर होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे लोग उन्हें जान जाते हैं।
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