कितना खूबसूरत है प्यार !
कौन-सा जादू है इस नन्हे शब्द 'प्यार' में कि सुनते ही रोम-रोम में शहद का मीठा अहसास जाग उठता है। जिसे लव हुआ नहीं, उसकी इच्छा है कि हो जाए, जिसे हो चुका है वह अपने सारे 'एफर्ट्स' उसे बनाए रखने में लगा रहा है। प्रेम, प्यार, इश्क, मोहब्बत, नेह, प्रीति, अनुराग, चाहत, आशिकी, लव। ओह! कितने-कितने नाम। और मतलब कितना स्वीट, सोबर और ब्यूटीफूल। आज प्रेम जैसा कोमल शब्द उस मखमली लगाव का अहसास क्यों नहीं कराता जो वह पहले कराता रहा है?
जो इन नाजुक भावनाओं की कच्ची राह से गुजर चुका है वही जानता है कि प्यार क्या है? कभी हरी दूब का कोमल स्पर्श, तो कभी चमकते चाँद की उजली चाँदनी।
सच्चा प्यार फीजिकल एट्रेक्शन नहीं है, बल्कि सुंदर सजीले रंगों की मनभावन बरखा है प्यार। अपने वेलेंटाइन की एक झलक देख लेने की 'पिंक' बेचैनी है प्यार। 'उसके' पास होने अहसास को याद करने की 'ऑरेंज' इच्छा है प्यार। उसकी आवाज सुनने को तरसते कानों की 'रेड' गुदगुदी है प्यार।
उसकी स्माइल के पर दिल में गुलाल की लहर का उठना है प्यार। उसके पहले उपहार से शरबती आँखों की बढ़ जाने वाली चमकीली रौनक है प्यार। कितने रंग छुपे हैं प्यार के अहसास में?
सूखे हुए फूल की झरी हुई पँखुरी है प्यार। किसी किताब के कवर में छुपी चॉकलेट की पन्नी भी प्यार है और बेरंग घिसा हुआ लोहे का छल्ला भी। प्यार कुछ भी हो सकता है। कभी भी हो सकता है। बस, जरूरत है गहरे-गहरे और बहुत गहरे अहसास की।
प्यार का अर्थ सिर्फ और सिर्फ देना है। और देने का भाव भी ऐसा कि सब कुछ देकर भी लगे कि अभी तो कुछ नहीं दिया।
प्यार किसी को पूरी तरह से पा लेने का स्वार्थ नहीं है, बल्कि डेटिंग पर अकेले में एक-दूजे को देखते रहने की भोली तमन्ना है प्यार। बाइक पर अपने साथी से लिपट जाना ही नहीं है प्यार, एक-दूसरे का रिस्पेक्ट और डिग्निटी है प्यार। उधार लेकर प्रेशियस गिफ्ट खरीदना ही नहीं है प्यार, बल्कि अपनी सैलेरी से खरीदा भावों से भीगा एक रेड रोज भी है प्यार। प्यार को और क्या नाम दिए जाएँ, वह तो बस प्यार है, उसे पनपने के लिए हेल्दी स्पेस दीजिए। वेलेंटाइन 'डे' के नाम पर लव को 'डैमेज' मत कीजिए।
प्यार की राह में थामे चलो हाथ
तेरे प्यार के सागर में डूबकर
हुआ है अहसास मुझे जन्नत का
जिंदगी की राहों में साथ तेरे चलकर
लगता है सपना भी मुझे हकीकत सा
इन्हीं पक्तिंयों की तरह प्यार भी एक ऐसा नशा है, जिसमें खोकर प्रेमी सपनों की उड़नतश्तरी में अपने भविष्य के सफर पर निकल पड़ते हैं। प्यार का हर लम्हा इतना प्यारा होता है कि उसमें जिंदगी की संपूर्णता का अहसास होता है। हर प्रेमी चाहता है कि उस लम्हें को थामकर बस उसी लम्हें की यादों में अपनी जिंदगी गुजार दें।
बदलते दौर के साथ आज प्रेमियों के लिए प्यार के मायने भी बदल गए है। उनके लिए आज प्यार करने की अहमियत तो है परंतु इस रिश्ते को उम्रभर निभाकर साथ चलने की समझ नहीं है। प्यार कोई मामूली चीज नहीं है, जिसे बाजार से खरीदा जा सके, यह कोई आदान-प्रदान की वस्तु नहीं है, जिसे दोस्तों के बीच बाँटा जा सके, प्यार तो आपसी समझ और अहसास का नाम है। यह तो दिलों की गहराईयों से उठती वो तरंग है, जो प्रेमियों को भीतर तक हिला कर रख देती है और उसे जिंदगी जीने का एक नया ढंग सीखाती है।
रिश्ते की अहमियत को जानना जरूरी :
प्यार करने से ज्यादा अहम होता है उसकी कद्र करना। यदि आप प्यार की गहराईयों को नहीं समझ पाएँगे तो शायद आप कभी प्यार ही नहीं कर पाएँगे। प्यार का एक अर्थ होता है सम्मान। यह कोई मजाक का रिश्ता नहीं है, जिसका मखौल बनाकर हर शाम दोस्तों की महफिल में अपने प्रेमी के नाम पर चुटकियाँ ली जाए। यह तो गोपनीयता का रिश्ता है, जिसके आवरण को सरेआम अनावृत करना अपने ही प्यार को बदनाम करना है। इस रिश्ते को जितना गोपनीय रखा जाए, उतना ही आप इस रिश्ते का आनन्द ले पाएँगे।
स्वार्थ से परे है ये रिश्ता :
कहते हैं जिस रिश्ते में 'प्रेम' का सामना 'स्वार्थ' से होता है वह रिश्ता अपनेपन का नहीं बल्कि 'औपचारिकता' व 'अजनबीपन' का रिश्ता है। प्रेम के रिश्तों में तो स्वार्थ और अहम के स्थान पर अदब, आग्रह और अपनापन होता है, जो इस रिश्ते को बोझिल बनाने से रोकता है। इस रिश्ते में अपने प्रेमी की खुशी में अपनी खुशियों की जगह बनाई जाती है ताकि आपसे प्यार करने वाले को यह आभास हो कि आपके लिए वो ही सर्वोपरि है।
रिश्ते में हो गंभीरता :
प्रेमी का चुनाव नहीं होता है, वो तो जाने-अनजाने किसी बहाने से हमारे जीवन में दस्तक देकर हमारी जिंदगी बन जाता है। प्रेम का रिश्ता शरारतों व हँसी-ठिठौली का रिश्ता है लेकिन इसका यह अभिप्राय नहीं है कि इस मौज-मस्ती में हम गंभीरता का ही त्याग कर दे। प्रेमी कोई इस्तेमाल की वस्तु नहीं है, जिसका जी भर के इस्तेमाल करके उसे उसके हाल पर छोड़ दिया जाए। यह तो आपका उम्रभर साथ निभाने वाला वफादार साथी है, जो आपसे रिश्ते में वफा व गंभीरता की उम्मीद लगाए बैठा है। हर रिश्ते की तरह प्रेम के रिश्ते में भी गंभीरता का होना लाजिमी है, क्योंकि इसी से यह रिश्ता टिकाऊ व दीर्घायु बनता है।
बदले की भावना न पनपने दे :
एक-दूसरे की बराबरी करने व उसे नीचा दिखाने के लिए उसके कृत्य को उसी के सामने दोहराना समझदारी का नहीं बल्कि मूर्खता का परिचायक है। प्रेम की गाड़ी को जीवन के पथ पर सरपट चलाने के लिए जरूरी है दोनों में से किसी एक का समझदार व गंभीर होना। एक-दूसरे के प्रति द्वेष भावना रखकर यदि आप प्यार का ढोंग करेंगे तो माफ कीजिएगा आप अपना और अपने प्रेमी दोनों का वक्त और जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।
आलोचक है अच्छे :
जिस तरह सर्फ एक्सेल के होते हुए 'दाग' अच्छे लगते है। उसी प्रकार आलोचकों का साथ होने पर प्रेमियों के लिए प्यार करने का मजा ही अलग है। आलोचक ही वो लोग है जो अफवाहों के बीच किसी रिश्ते को जन्म देते हैं और चर्चाओं के बाजार को गर्म रखते हैं। ये फुरसती लोग अपने ढंग से प्यार को नई दिशा और गति देते हैं और प्रेमी अपनी समझदारी से अपने रिश्ते को नया आयाम और ऊचाईयाँ देते हैं। इसलिए बेहतर होगा ऐसे आलोचकों की सुनने के बजाय अपने रिश्ते को गंभीर बनाने के प्रयास किए जाए तथा साल के हर दिन अपने प्रेमी से प्रेम का इजहार किया जाए।
गुलाब कहें 'आई लव यू...'
मानव इतिहास में प्रेम, पवित्रता, समर्पण, प्रेरणा, सौंदर्य, लालित्य, संवेदना, साधना और आसक्ति के प्रतीक के रूप में गुलाब का उल्लेख मिलता है। यदि आप अपने प्यार का इजहार कुछ अलग ही अंदाज में करना चाहते हैं, तो आप गुलाब के फूलों का उपहार भेज दीजिए। गुलाब आपके दिल की जुबाँ को बयान कर देते हैं। 1600 ई. में गुलाब के बारे में एक पर्शियल पोएट्री सामने आई, चार्ल्स द्वितीय ने इस पर्शियल पोएट्री को योरप तक पहुँचाया।
सन् 1716 में लेडी मैरी वार्टले मॉग्टेग्यू ने फ्लॉवर लैंग्वेज को टर्की से इंग्लैंड पहुँचाया। इसके बाद यह फ्रांस पहुँची, धीरे-धीरे फ्लॉवर मैसेज की एक बुक तैयार हो गई, जिसमें 800 से अधिक फ्लॉवर मैसेज हो चुके हैं। प्रेमियों के बीच गुलाब के लेन-देन का सिलसिला काफी लोकप्रिय है।
आज दुनिया भर के अधिकतर प्रेमी अपने प्रेम का इजहार गुलाब देकर ही करते हैं। रोज कुछ इस तरह से अपना संदेश देता है।
- सुर्ख गुलाब कहता है, 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ।'
- सफेद गुलाब कहता है, 'हमारा प्यार पवित्र है।'
- लाल और सफेद गुलाब एक साथ होने पर यह संकेत है एकता और आग व पानी का।'
- पूरी तरह से खिला, भरा-भरा लाल गुलाब कहता है, 'आप बहुत खूबसूरत हैं।'
- एक पूरे खिले हुए गुलाब के साथ रखी दो कलियाँ आश्वासन देती है सुरक्षा का।'
- सफेद गुलाब की बंद कली समझाती है अभी आप बेहद छोटे हैं प्यार करने के लिए।
- पीला गुलाब कुछ संशय में रहता है और कहता है, 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ, पर तुम्हारे दिल में क्या है, यह मैं नहीं जानता।'
- अगर टहनी पर काँटों के अलावा एक पत्ती भी न हो तो मतलब है, यहाँ कुछ नहीं है न डर, न आशा, तुम्हारी खूबसूरती, तुम्हारी मधुरता में मेरी सारी चेतना खो सी गई है।
- नारंगी गुलाब का कहना है, 'मेरा प्यार अनंत है तुम्हारे लिए और 'तुम मेरी हो सिर्फ मेरी हो।'
- चार पत्तियों को जोड़ता हुआ गुलाबों के गुच्छे का मतलब है, बेस्ट ऑफ लक।
- काँटे निकली लंबी टहनी पर इठलाती बंद कली दम भरती है, 'प्यार किया है प्यार करेंगे हमको किसी का डर नहीं।'
- एक अकेली लंबी डंडी के साथ सुर्ख गुलाब का अर्थ होता है, 'मैं अभी भी तुम्हें प्यार करता हूँ।'
- चमेलिया गुलाब, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ क्या तुम भी प्यार करती हो, यानी एक तरफा प्यार।
- पूरे खिले लाल गुलाबों का गुच्छा कृतज्ञता, आधार, श्रद्धा नमन।
- कालिमा लिए हुए गुलाब की कली-हाँ मैंने भी प्यार किया है।
- संकरित गुलाब-मैं तुम्हें हमेशा याद रखूँगा।
- रिबन से बँधे दो गुलाब-सगाई हो चुकी है।
- बर्नेट गुलाब-'मैं तुम्हें चाहता रहूँगा कयामत तक।'
- दो कलियों के साथ खिलता हुआ एक गुलाब-गोपनीयता का प्रतीक।
- गुलाब का बना ताज- तुम्हें पुरस्कार मिला हमें अपार खुशी मिली, मेरी ओर से बधाई स्वीकार।
- मुरझाया हुआ सफेद गुलाब, 'आप मुझे प्रभावित नहीं कर सकें' या मैं तुम्हें प्यार नहीं करती।
- गहरा बरगंडी गुलाब, 'तुम अपनी सुंदरता से बेखबर हो।'
- लाल गुलाब-चाहत, खुशी, सौंदर्य, आवेग।
- पीला गुलाब-ईर्ष्या, प्रेम में कमी।
- सफेद गुलाब-रोशनी का फूल, मासूमियत, पवित्रता, अणध्यात्मिकता, सौम्यता।
- गुलाबी गुलाब- सादगी, प्रेम।
- लाल गुलाब की कली- निश्छल प्यार।
- सफेद गुलाब की कली- लड़कपन।
- मुरझाया गुलाब का गुच्छा- नकारा प्रेम, तुम्हारा प्यार मुझे स्वीकार नहीं।
- गुलाब के साथ काँटे- हर तरह से तुम्हें स्वीकार करूँगा।
प्रेमियों के नाम वेलेंटाइन का खत
प्यार करने वालों को मेरा सलाम,
आज मेरा दिन है, वेलेंटाइन डे। मेरी एक और बरसी, प्यार की याद में समर्पित एक और 14 फरवरी। मैंने जब रोम के युवकों की चोरी छुपे शादियाँ करवाई तो कभी सोचा न था कि मेरी ये चोरी एक दिन ऐसा रंग लाएगी। मैंने जब जेलर की बेटी को प्रेम संदेश दिया तो मैंने ये भी नहीं सोचा था कि इस संदेश को सदियों तक पीढ़ियाँ दोहराएँगी।
मैंने नहीं सोचा था कि जिस रात में पकड़ा गया उस रात जिस जोड़े की मैंने शादी कराई उनके साथ प्यार भी हमेशा-हमेशा के लिए आजाद हो जाएगा। मैंने यह भी नहीं सोचा था कि जो बातें मैंने जेलर की बेटी से घंटो बैठकर साझा की वो ऐसी दास्तान बन जाएगी जो भले ही कलम से न लिखी जाए लेकिन सबके जहन में कसक बनकर जिंदा रहेगी।
लेकिन मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि 969 AD का प्यार 2010 तक आते-आते मोबाइल और इंटरनेट का प्यार बन जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था कि प्यार महँगे गुलाबों की खुशबू में खो जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था कि प्यार बाइक पर घूमने का लुफ्त हो जाएगा। मैंने नहीं सोचा था कि प्यार पिक एंड ड्रॉप फेसिलिटी बन जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था की प्यार क्लॉडियस की जेल से छूटकर राजनीति की गिरफ्त में आ जाएगा।
माना की जमाने के साथ हर चीज बदलती है लेकिन प्यार 'हर चीज' जैसी तो कोई चीज नहीं है। प्यार तो एहसास है और एहसास हर जमाने में एहसास ही हुआ करता है। प्यार के इजहार को बदलने के चक्कर में लगता है प्यार को ही बदला जा रहा है। जेल में मेरे कद्रदानों के भेजे फूल मुझे आज भी ताजा लगते हैं और उनके प्यार भरे संदेश मुझे आज भी जिंदगी से भर देते हैं। फिर दुनिया में प्यार कैसे बदल सकता है।
मैंने कुछ नहीं सोचा और प्यार भी सोचने की चीज नहीं हैं। कभी-कभी सही काम करने की भी सजा भुगतनी पड़ती है और बहुत सारे अच्छे काम भी हैं जो बिना सोचे किए जाते हैं। मैंने भी ऐसा ही काम किया था जिसकी मुझे सजा मिली। मैंने दिलों को मिलाया क्योंकि वो मुझे सही लगा।
मैं आपसे भी यही चाहता हूँ कि प्यार करें तो बिना सोचे समझे। आपका प्यार जैसा है वैसा ही स्वीकार करें। सोचने समझने के लिए जिंदगी में और भी चीजें हैं। खैर, मेरे न सोचने से इतना सब हो गया तो अगर ये सोचूँ कि प्यार वापस अपनी असली शक्ल लेगा तो शायद जरूर हो ही जाए।
प्यार के साथ,
आपका वेलेंटाइन
मे दैनिक राष्ट्रीय हिंदी मेल का सम्पादक हूँ.खुल्लम खुल्ला मेरी अभिव्यक्ति है .अपना विचार खुलेआम दुनिया के सामने व्यक्त करने का यह सशक्त माध्यम है.अरुण बंछोर-मोबाइल -9074275249 ,7974299792 सबको प्यार देने की आदत है हमें, अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे, कितना भी गहरा जख्म दे कोई, उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010
मुलाकात
इंसानियत पर आधारित है ‘माई नेम इज खान’:शाहरुख खान
strong>फिल्म में मैं रिजवान खान का किरदार निभा रहा हूँ जिसे एस्पर्जर नाम की बीमारी है। कांदिवली से लेकर अमेरिका तक के उसके सफर की कहानी इस फिल्म में दिखाई गई है। उसे सीधी बात ही समझ में आती है। एक अलग तरह के रूप में दर्शक इस बार मुझे देखेंगे और उम्मीद करता हूँ कि उसे पसंद करेंगे।
फिल्म का नाम आपको कितना सार्थक लगता है ?
फिल्म की कहानी रिजवान खान के इर्द-गिर्द घूमती है। वह पूरी फिल्म का आधार है और खान उसका सरनेम है। फिल्म में बातचीत के दौरान इस वाक्य का प्रयोग किया गया है। यह एक साधारण-सा वाक्य है जो कहानी को जोड़ता है इसलिए इससे बेहतर फिल्म का नाम मेरी समझ से तो दूसरा नहीं हो सकता था।
लेकिन फिल्म का नाम काफी विवादों में रहा है ?
नाम से लोगों को ऐसा लग रहा है कि फिल्म इस्लाम पर आधारित है लेकिन ऐसा है नहीं। फिल्म का आधार इंसानियत है। प्रोमोज में भी एक सीन है जिसमें मेरी पत्नी मंदिरा हिंदू है और मैं मुसलमान। मुझे यह समझ नहीं आता कि जिस धर्म के बारे में हम जानते ही नहीं हैं, हम उसे सही या गलत कैसे कह सकते हैं। अपने धर्म का सम्मान करने के लिए दूसरे धर्म को भला-बुरा कहना या उसका मजाक उड़ाना गलत है ।
फिल्मों को लेकर आजकल विवाद हो रहे हैं। आपको क्या लगता है?
फिल्म कला की अभिव्यक्ति का साधन है और कला की अभिव्यक्ति पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है। मुझे बुरा लगता है जब थोड़े से प्रचार के लिए लोग फिल्मों पर विवाद खड़ा करने लगते हैं जो कि गलत है। जब सेंसर बोर्ड फिल्म को पास कर देती है तो फिर उस पर सवाल उठाने का कोई कारण ही नहीं बनता है ।
करण जौहर के बारे में आपकी क्या राय है?
करण ने जब से अपने करियर की शुरुआत की है मैं तब से उनके साथ काम कर रहा हूँ और वक्त के साथ उनके अंदर के बदलावों को भी करीब से देखा है। जब कॉलेज से निकला था तो उसने "कुछ-कुछ होता है" बनाई थी। तब से लेकर आज तक उसकी सोच में आए बदलावों को उसकी फिल्मों में देखा जा सकता है।
लंबे समय के बाद और आप साथ में काम कर रहे हैं। काजोल के बारे में आपका क्या कहना है?
काजोल एक बहुत ही बेहतरीन अभिनेत्री हैं। वह सह कलाकार होने के साथ ही मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं। असल जिंदगी में भले वह चाहे जैसी हों लेकिन कैमरा ऑन होते ही वह पूरी तरह से बदल जाती है। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने उस पर जादू कर दिया हो। काजोल इस समय बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन अदाकारा हैं।
सुना है कि आप अपने बच्चों से हिंदी में ही बात करना पसंद करते हैं?
मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि मेरे बच्चे हिंदी जरूर बोलें। मैं उन्हें हिंदी में कहानियाँ सुनाता हूँ। मेरी कोशिश होती है कि मैं उनसे ज्यादा से ज्यादा हिंदी में बात करूँ।
अपनी सफलता का श्रेय आप किसे देते हैं?
मेरी ही नहीं, इस इंडस्ट्री में जो भी सफल हैं सभी का कारण उनकी हिंदी का अच्छा होना है। अमिताभ बच्चन, आमिर खानWatch the New Look of Aamir !! या मेरी सफलता की मुख्य वजह हमारी हिंदी का ज्ञान है। मैं समझता हूँ कि इस इंडस्ट्री में वही सफल होता है जिसकी हिंदी पर अच्छी पकड़ है।
अपने भाषा ज्ञान को बनाए रखने के लिए क्या करते हैं?
मैं किताबें बहुत पढ़ता हूँ और बच्चों को थोड़ा-बहुत बदलकर कहानियाँ सुनाता हूँ। कई बार कुछ किताबें अच्छी लगती हैं तो कुछ निर्देशकों या फिल्म निर्माताओं को मैं उस किताब पर फिल्म बनाने के लिए भी कहता हूँ पर अभी तक किसी ने मुझे हाँ नहीं कहा है। "स्लमडॉग मिलियनेयर" भी जब मैंने पढ़ी थी तब उस पर फिल्म बनाने के लिए वो किताब मैंने एक निर्देशक को दी थी लेकिन कुछ समय बाद पता चला कि डैनी बोयल इस पर फिल्म बना रहे हैं।
क्या कारण है कि इतनी सफलता हासिल करने के बाद भी आप हॉलीवुड की फिल्मों में नहीं दिखते हैं?
मेरी हिंदी अच्छी है। मेरा मानना है कि काम हमेशा उसी भाषा में करना चाहिए जो आपको आती हो, क्योंकि उसी भाषा में आप अपनी भावनाओं को सही ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। हाल ही में मैंने कमल हासन के लिए दक्षिण की एक फिल्म की थी। उन्होंने मुझे हिंदी में उसका अनुवाद भी दिया था। बड़ी समस्या होती थी। पहले वहाँ की भाषा में पढ़ो, फिर हिंदी में उसका मतलब समझो और उसके बाद एक्टिंग के लिए उनकी भाषा में प्रेक्टिस करो। उसके बाद भी सही एक्सप्रेशन नहीं आ रहे थे। जहाँ तक हॉलीवुड की बात है तो मेरी अँग्रेजी अच्छी है लेकिन उच्चारण भारतीय है। मैं उनकी तरह नहीं बोल सकता हूँ इसलिए मैं वहाँ पर काम नहीं कर सकता।
strong>फिल्म में मैं रिजवान खान का किरदार निभा रहा हूँ जिसे एस्पर्जर नाम की बीमारी है। कांदिवली से लेकर अमेरिका तक के उसके सफर की कहानी इस फिल्म में दिखाई गई है। उसे सीधी बात ही समझ में आती है। एक अलग तरह के रूप में दर्शक इस बार मुझे देखेंगे और उम्मीद करता हूँ कि उसे पसंद करेंगे।
फिल्म का नाम आपको कितना सार्थक लगता है ?
फिल्म की कहानी रिजवान खान के इर्द-गिर्द घूमती है। वह पूरी फिल्म का आधार है और खान उसका सरनेम है। फिल्म में बातचीत के दौरान इस वाक्य का प्रयोग किया गया है। यह एक साधारण-सा वाक्य है जो कहानी को जोड़ता है इसलिए इससे बेहतर फिल्म का नाम मेरी समझ से तो दूसरा नहीं हो सकता था।
लेकिन फिल्म का नाम काफी विवादों में रहा है ?
नाम से लोगों को ऐसा लग रहा है कि फिल्म इस्लाम पर आधारित है लेकिन ऐसा है नहीं। फिल्म का आधार इंसानियत है। प्रोमोज में भी एक सीन है जिसमें मेरी पत्नी मंदिरा हिंदू है और मैं मुसलमान। मुझे यह समझ नहीं आता कि जिस धर्म के बारे में हम जानते ही नहीं हैं, हम उसे सही या गलत कैसे कह सकते हैं। अपने धर्म का सम्मान करने के लिए दूसरे धर्म को भला-बुरा कहना या उसका मजाक उड़ाना गलत है ।
फिल्मों को लेकर आजकल विवाद हो रहे हैं। आपको क्या लगता है?
फिल्म कला की अभिव्यक्ति का साधन है और कला की अभिव्यक्ति पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है। मुझे बुरा लगता है जब थोड़े से प्रचार के लिए लोग फिल्मों पर विवाद खड़ा करने लगते हैं जो कि गलत है। जब सेंसर बोर्ड फिल्म को पास कर देती है तो फिर उस पर सवाल उठाने का कोई कारण ही नहीं बनता है ।
करण जौहर के बारे में आपकी क्या राय है?
करण ने जब से अपने करियर की शुरुआत की है मैं तब से उनके साथ काम कर रहा हूँ और वक्त के साथ उनके अंदर के बदलावों को भी करीब से देखा है। जब कॉलेज से निकला था तो उसने "कुछ-कुछ होता है" बनाई थी। तब से लेकर आज तक उसकी सोच में आए बदलावों को उसकी फिल्मों में देखा जा सकता है।
लंबे समय के बाद और आप साथ में काम कर रहे हैं। काजोल के बारे में आपका क्या कहना है?
काजोल एक बहुत ही बेहतरीन अभिनेत्री हैं। वह सह कलाकार होने के साथ ही मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं। असल जिंदगी में भले वह चाहे जैसी हों लेकिन कैमरा ऑन होते ही वह पूरी तरह से बदल जाती है। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने उस पर जादू कर दिया हो। काजोल इस समय बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन अदाकारा हैं।
सुना है कि आप अपने बच्चों से हिंदी में ही बात करना पसंद करते हैं?
मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि मेरे बच्चे हिंदी जरूर बोलें। मैं उन्हें हिंदी में कहानियाँ सुनाता हूँ। मेरी कोशिश होती है कि मैं उनसे ज्यादा से ज्यादा हिंदी में बात करूँ।
अपनी सफलता का श्रेय आप किसे देते हैं?
मेरी ही नहीं, इस इंडस्ट्री में जो भी सफल हैं सभी का कारण उनकी हिंदी का अच्छा होना है। अमिताभ बच्चन, आमिर खानWatch the New Look of Aamir !! या मेरी सफलता की मुख्य वजह हमारी हिंदी का ज्ञान है। मैं समझता हूँ कि इस इंडस्ट्री में वही सफल होता है जिसकी हिंदी पर अच्छी पकड़ है।
अपने भाषा ज्ञान को बनाए रखने के लिए क्या करते हैं?
मैं किताबें बहुत पढ़ता हूँ और बच्चों को थोड़ा-बहुत बदलकर कहानियाँ सुनाता हूँ। कई बार कुछ किताबें अच्छी लगती हैं तो कुछ निर्देशकों या फिल्म निर्माताओं को मैं उस किताब पर फिल्म बनाने के लिए भी कहता हूँ पर अभी तक किसी ने मुझे हाँ नहीं कहा है। "स्लमडॉग मिलियनेयर" भी जब मैंने पढ़ी थी तब उस पर फिल्म बनाने के लिए वो किताब मैंने एक निर्देशक को दी थी लेकिन कुछ समय बाद पता चला कि डैनी बोयल इस पर फिल्म बना रहे हैं।
क्या कारण है कि इतनी सफलता हासिल करने के बाद भी आप हॉलीवुड की फिल्मों में नहीं दिखते हैं?
मेरी हिंदी अच्छी है। मेरा मानना है कि काम हमेशा उसी भाषा में करना चाहिए जो आपको आती हो, क्योंकि उसी भाषा में आप अपनी भावनाओं को सही ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। हाल ही में मैंने कमल हासन के लिए दक्षिण की एक फिल्म की थी। उन्होंने मुझे हिंदी में उसका अनुवाद भी दिया था। बड़ी समस्या होती थी। पहले वहाँ की भाषा में पढ़ो, फिर हिंदी में उसका मतलब समझो और उसके बाद एक्टिंग के लिए उनकी भाषा में प्रेक्टिस करो। उसके बाद भी सही एक्सप्रेशन नहीं आ रहे थे। जहाँ तक हॉलीवुड की बात है तो मेरी अँग्रेजी अच्छी है लेकिन उच्चारण भारतीय है। मैं उनकी तरह नहीं बोल सकता हूँ इसलिए मैं वहाँ पर काम नहीं कर सकता।
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010
विचार-मंथन
अवसरवाद के दलदल में फँसा नेतृत्व
विनोद अग्निहोत्री
राजनीति कितनी बेशर्म और मूल्यहीन हो सकती है, इसका उदाहरण इन दिनों में जो हो रहा है, उससे समझा जा सकता है। शिवसेना की धमकी के डर से पहले आईपीएल में पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों की बोली नहीं लगाई गई और जब बाद में शाहरुख ने एक सामान्य-सा बयान क्या दे दिया, शिवसेना ने आसमान सिर पर उठा लिया।
उधर, मुंबई में उत्तर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर आरएसएस के बयान से माहौल पहले ही गर्म था, शाहरुख के बयान से आग में घी पड़ गया। एक तरफ शाहरुख की आड़ लेकर शिवसेना फिर अपनी मुस्लिम विरोधी ग्रंथि को हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण में बदलना चाहती है, जो संघ परिवार को भी मुफीद लगता है तो दूसरी तरफ शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोध संघ के हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण की योजना में पलीता लगा रहा है।
इसलिए चितपावन महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों के नेतृत्व वाले संघ को उत्तर भारतीयों की सुरक्षा में लाठी लेकर उतरने का ऐलान करना पड़ रहा है, वहीं भाजपा के महाराष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी गोलमोल भाषा बोलकर संघ और शिवसेना दोनों को साधने में जुटे हैं। क्या संघ अपने अखंड भारत की परिकल्पना में बाधक शिवसेना से संबंध विच्छेद करने का निर्देश अपने आनुषंगिक संगठन भाजपा को देने का साहस कर सकता है?
NDबिहार में राहुल गाँधी ने मुंबई हमलों के दौरान उत्तर भारतीय कमांडो की भूमिका की तारीफ करके संघ से मुद्दा छीन लिया। अब शिवसेना के निशाने पर राहुल आ गए और अपनी सड़कछाप भाषा में शिवसेना राहुल पर हमलावर है।
इसे शिवसेना और मनसे जैसे दलों का वैचारिक दीवालियापन ही माना जाएगा कि उन्हें जिस ताकत और ऊर्जा से केंद्र सरकार की महँगाईपरस्त नीतियों और राज्य सरकार के कामकाज के ढीलेपन के खिलाफ संघर्ष में लगाना चाहिए थी, वह ऊर्जा मुंबई में शाहरुख के पोस्टर फाड़ने पर खर्च हो रही है और कांग्रेस की केंद्र व राज्य सरकारों को शिवसेना का यह हुड़दंग इसलिए भा रहा है कि जितना शिवसेना राहुल पर हमला करेगी, बिहार में कांग्रेस को उतना ही फायदा होगा।
भाजपा भी राजनीतिक अवसरवाद की शिकार है। उसे महाराष्ट्र में शिवसेना का सहारा और ताकत भी चाहिए, क्योंकि उसकी मुस्लिम विरोधी राजनीति भाजपा के हिन्दुत्ववादी एजेंडे को आगे बढ़ाती है, लेकिन शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोधी रुख शेष भारत में भाजपा को भारी पड़ रहा है, इसलिए उसके विनय कटियार जैसे नेता तो शिवसेना से गठबंधन तक तोड़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन नेतृत्व शिवसेना को नाराज करने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है।
जो संघ उत्तर भारतीयों की सुरक्षा के लिए लाठी लेकर उतरने की बात कर रहा है, वह शाहरुख के खिलाफ शिवसेना के हुड़दंग पर खामोश है जबकि शाहरुख भी उत्तर भारतीय ही हैं।
यह अलग बात है कि आज शाहरुख के बयान पर सड़कों पर उपद्रव कर रही शिवसेना ने भाजपा नेतृत्व वाली उस वाजपेयी सरकार के साथ सत्ता की मलाई चाटी थी, जिसने कारगिल और संसद पर हमले के बाद भी पाकिस्तान के साथ बंद पड़ी क्रिकेट श्रृंखला शुरू की और कारगिल के सूत्रधार जनरल परवेज मुशर्रफ के लिए आगराClick here to see more news from this city में लाल कालीन बिछाई थी।
तब न ठाकरे का राष्ट्रप्रेम जागा और न ही उन्हें सरकार से अलग होने की जरूरत महसूस हुई। यही नहीं, अब जब दाऊद के समधी और पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर जावेद मियाँदाद के साथ ठाकरे परिवार के हँसते-खिलखिलाते फोटो और वीडियो फुटेज सामने आ गए हैं तब शिवसेना नेता सफाई दे रहे हैं।
थोड़ी बात बॉलीवुड के अवसरवाद की। बाजारवाद के दौर में फिल्मी सितारे और क्रिकेट खिलाड़ी ही अब नायक और महानायक बना दिए गए हैं। गाँधी, सुभाष, नेहरू, जयप्रकाश, भगतसिंह, विवेकानंद जैसे महापुरुष अब सदी के नायक नहीं रह गए, बल्कि अमिताभ बच्चनBig B !! The Super Stars Photogallery को सदी का महानायक लिखने या कहने में मीडिया को संकोच नहीं होता है।वही महानायक अमिताभ बच्चन ऐसे वक्त में जब शिवसेना के हुड़दंग से देश शर्मसार है तब अपने ब्लॉग में बाल ठाकरे के भीतर वह आग देख रहे हैं, जिसके वे कायल हैं। बच्चन को पता नहीं ठाकरे के भीतर कौन-सी आग दिखाई दे रही है? क्या बच्चन भूल गए कि इसी आग के एक गोले राज ठाकरे ने पिछले दिनों उनके और उनकी पत्नी जया बच्चन के लिए कितनी मुसीबत पैदा की थी।
अमिताभ बॉलीवुड के शिखर पुरुष हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन शाहरुख, आमिर, सलमान या करण जौहर की फिल्मों पर मुंबई से लेकर गुजरात तक किए जाने वाले उपद्रवों से तो वे आँखें मूँद लेते हैं, लेकिन अपनी फिल्म 'रण' के लिए वे मातोश्री में विशेष शो करने को आतुर हैं।
पहले नेहरू-गाँधी परिवार, फिर मुलायमसिंह यादव की छत्रछाया में फलफूल चुका बच्चन परिवार अब नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे की सरपरस्ती का मौका खोज रहा है। खुद को शाहरुख की आवाज कहने वाले गायक अभिजीत शाहरुख के खिलाफ शिवसेना की हर हरकत को इस तरह जायज ठहरा रहे हैं जैसे देशभक्ति का मतलब सड़कों पर गुंडागर्दी ही है।
बात अब समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान की। समाजवादी पार्टी से अमरसिंह निकाले जा चुके हैं। कल तक अमरसिंह चुन-चुन कर पुराने समाजवादियों को निकलवा रहे थे तब उन्हें मुलायम का परिवारवाद और यादववाद नजर नहीं आ रहा था, लेकिन अब अमरसिंह को लोकतंत्र याद आ रहा है।
मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते रहे अमर को अब मायावती का स्टेट गेस्ट हाउस कांड का दर्द समझ में आ रहा है। सोनिया गाँधी और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी हद तक बयानबाजी करने वाले अमरसिंह को सोनिया गाँधी में त्याग और संघर्ष दिखाई पड़ रहा है।
जिन रघु ठाकुर का टिकट मुलायमसिंह के ऐलान के बाद अमरसिंह ने कटवाया, अब दिल्ली के माता सुंदरी रोड स्थित रघु ठाकुर के छोटे से घर में जाकर उनसे राजनीतिक मुद्दे समझने में भी अमरसिंह को संकोच नहीं है।
जयाप्रदा ने तो खैर संकट के वक्त अमरसिंह का अहसान चुकाया है, लेकिन अमर के भाई अमिताभ की पत्नी जया बच्चन अपने प्रिय देवर के समर्थन में अपनी सिर्फ पाँच महीने की राज्यसभा सीट भी कुर्बान करने को तैयार नहीं हैं। उधर, मुलायमसिंह यादव और दूसरे सपा नेता अब अमरसिंह में वे सारी बुराइयाँ देख रहे हैं, जो कभी रघु ठाकुर से लेकर मोहम्मद आजम खान तक ने गिनाई थीं।
कम्युनिस्टों का अवसरवाद कई बार सामने आ चुका है, लेकिन पिछली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने जिस तरह मनमोहन सरकार से समर्थन लेने के बाद उन मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का बीड़ा उठाया, जिनके खिलाफ खुद वाम मोर्चे के दिग्गज नेता मंचों से भाषण कर चुके हैं, तब लगा कि मार्क्स और लेनिन की वैचारिक विरासत का दावा करने वाले भारतीय कम्युनिस्ट वैचारिक रूप से कितने खोखले हो चुके हैं।
ममता बनर्जी, करुणनिधि, जयललिता, चंद्रबाबू नायडू, देवेगौड़ा, ओमप्रकाश चौटाला, नवीन पटनायक जैसे छत्रपों ने मुद्दों से ज्यादा मौके के हिसाब से ही सियासी फैसले लिए हैं। धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाले इन छत्रपों ने भाजपा से हाथ मिलाने में भी कोई संकोच नहीं किया और गुजरात के दंगों के बाद भी इनका राजनीतिक जमीर नहीं जागा।
ममता, जयललिता, करुणानिधि और देवेगौड़ा तो मौके के मुताबिक कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस से हाथ मिलाते ही रहते आए हैं। गाँधी, लोहिया, जयप्रकाश की विरासत का दावा करने वाले शरद यादव, रामविलास पासवान, लालूप्रसाद यादव, नीतीश कुमार जैसे नेता भी इस सबसे अछूते हैं। कुल मिलाकर भारतीय राजनीति और सामाजिक नेतृत्व अवसरवाद के दलदल में बुरी तरह फँस गया है।
विनोद अग्निहोत्री
राजनीति कितनी बेशर्म और मूल्यहीन हो सकती है, इसका उदाहरण इन दिनों में जो हो रहा है, उससे समझा जा सकता है। शिवसेना की धमकी के डर से पहले आईपीएल में पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों की बोली नहीं लगाई गई और जब बाद में शाहरुख ने एक सामान्य-सा बयान क्या दे दिया, शिवसेना ने आसमान सिर पर उठा लिया।
उधर, मुंबई में उत्तर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर आरएसएस के बयान से माहौल पहले ही गर्म था, शाहरुख के बयान से आग में घी पड़ गया। एक तरफ शाहरुख की आड़ लेकर शिवसेना फिर अपनी मुस्लिम विरोधी ग्रंथि को हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण में बदलना चाहती है, जो संघ परिवार को भी मुफीद लगता है तो दूसरी तरफ शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोध संघ के हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण की योजना में पलीता लगा रहा है।
इसलिए चितपावन महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों के नेतृत्व वाले संघ को उत्तर भारतीयों की सुरक्षा में लाठी लेकर उतरने का ऐलान करना पड़ रहा है, वहीं भाजपा के महाराष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी गोलमोल भाषा बोलकर संघ और शिवसेना दोनों को साधने में जुटे हैं। क्या संघ अपने अखंड भारत की परिकल्पना में बाधक शिवसेना से संबंध विच्छेद करने का निर्देश अपने आनुषंगिक संगठन भाजपा को देने का साहस कर सकता है?
NDबिहार में राहुल गाँधी ने मुंबई हमलों के दौरान उत्तर भारतीय कमांडो की भूमिका की तारीफ करके संघ से मुद्दा छीन लिया। अब शिवसेना के निशाने पर राहुल आ गए और अपनी सड़कछाप भाषा में शिवसेना राहुल पर हमलावर है।
इसे शिवसेना और मनसे जैसे दलों का वैचारिक दीवालियापन ही माना जाएगा कि उन्हें जिस ताकत और ऊर्जा से केंद्र सरकार की महँगाईपरस्त नीतियों और राज्य सरकार के कामकाज के ढीलेपन के खिलाफ संघर्ष में लगाना चाहिए थी, वह ऊर्जा मुंबई में शाहरुख के पोस्टर फाड़ने पर खर्च हो रही है और कांग्रेस की केंद्र व राज्य सरकारों को शिवसेना का यह हुड़दंग इसलिए भा रहा है कि जितना शिवसेना राहुल पर हमला करेगी, बिहार में कांग्रेस को उतना ही फायदा होगा।
भाजपा भी राजनीतिक अवसरवाद की शिकार है। उसे महाराष्ट्र में शिवसेना का सहारा और ताकत भी चाहिए, क्योंकि उसकी मुस्लिम विरोधी राजनीति भाजपा के हिन्दुत्ववादी एजेंडे को आगे बढ़ाती है, लेकिन शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोधी रुख शेष भारत में भाजपा को भारी पड़ रहा है, इसलिए उसके विनय कटियार जैसे नेता तो शिवसेना से गठबंधन तक तोड़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन नेतृत्व शिवसेना को नाराज करने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है।
जो संघ उत्तर भारतीयों की सुरक्षा के लिए लाठी लेकर उतरने की बात कर रहा है, वह शाहरुख के खिलाफ शिवसेना के हुड़दंग पर खामोश है जबकि शाहरुख भी उत्तर भारतीय ही हैं।
यह अलग बात है कि आज शाहरुख के बयान पर सड़कों पर उपद्रव कर रही शिवसेना ने भाजपा नेतृत्व वाली उस वाजपेयी सरकार के साथ सत्ता की मलाई चाटी थी, जिसने कारगिल और संसद पर हमले के बाद भी पाकिस्तान के साथ बंद पड़ी क्रिकेट श्रृंखला शुरू की और कारगिल के सूत्रधार जनरल परवेज मुशर्रफ के लिए आगराClick here to see more news from this city में लाल कालीन बिछाई थी।
तब न ठाकरे का राष्ट्रप्रेम जागा और न ही उन्हें सरकार से अलग होने की जरूरत महसूस हुई। यही नहीं, अब जब दाऊद के समधी और पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर जावेद मियाँदाद के साथ ठाकरे परिवार के हँसते-खिलखिलाते फोटो और वीडियो फुटेज सामने आ गए हैं तब शिवसेना नेता सफाई दे रहे हैं।
थोड़ी बात बॉलीवुड के अवसरवाद की। बाजारवाद के दौर में फिल्मी सितारे और क्रिकेट खिलाड़ी ही अब नायक और महानायक बना दिए गए हैं। गाँधी, सुभाष, नेहरू, जयप्रकाश, भगतसिंह, विवेकानंद जैसे महापुरुष अब सदी के नायक नहीं रह गए, बल्कि अमिताभ बच्चनBig B !! The Super Stars Photogallery को सदी का महानायक लिखने या कहने में मीडिया को संकोच नहीं होता है।वही महानायक अमिताभ बच्चन ऐसे वक्त में जब शिवसेना के हुड़दंग से देश शर्मसार है तब अपने ब्लॉग में बाल ठाकरे के भीतर वह आग देख रहे हैं, जिसके वे कायल हैं। बच्चन को पता नहीं ठाकरे के भीतर कौन-सी आग दिखाई दे रही है? क्या बच्चन भूल गए कि इसी आग के एक गोले राज ठाकरे ने पिछले दिनों उनके और उनकी पत्नी जया बच्चन के लिए कितनी मुसीबत पैदा की थी।
अमिताभ बॉलीवुड के शिखर पुरुष हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन शाहरुख, आमिर, सलमान या करण जौहर की फिल्मों पर मुंबई से लेकर गुजरात तक किए जाने वाले उपद्रवों से तो वे आँखें मूँद लेते हैं, लेकिन अपनी फिल्म 'रण' के लिए वे मातोश्री में विशेष शो करने को आतुर हैं।
पहले नेहरू-गाँधी परिवार, फिर मुलायमसिंह यादव की छत्रछाया में फलफूल चुका बच्चन परिवार अब नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे की सरपरस्ती का मौका खोज रहा है। खुद को शाहरुख की आवाज कहने वाले गायक अभिजीत शाहरुख के खिलाफ शिवसेना की हर हरकत को इस तरह जायज ठहरा रहे हैं जैसे देशभक्ति का मतलब सड़कों पर गुंडागर्दी ही है।
बात अब समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान की। समाजवादी पार्टी से अमरसिंह निकाले जा चुके हैं। कल तक अमरसिंह चुन-चुन कर पुराने समाजवादियों को निकलवा रहे थे तब उन्हें मुलायम का परिवारवाद और यादववाद नजर नहीं आ रहा था, लेकिन अब अमरसिंह को लोकतंत्र याद आ रहा है।
मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते रहे अमर को अब मायावती का स्टेट गेस्ट हाउस कांड का दर्द समझ में आ रहा है। सोनिया गाँधी और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी हद तक बयानबाजी करने वाले अमरसिंह को सोनिया गाँधी में त्याग और संघर्ष दिखाई पड़ रहा है।
जिन रघु ठाकुर का टिकट मुलायमसिंह के ऐलान के बाद अमरसिंह ने कटवाया, अब दिल्ली के माता सुंदरी रोड स्थित रघु ठाकुर के छोटे से घर में जाकर उनसे राजनीतिक मुद्दे समझने में भी अमरसिंह को संकोच नहीं है।
जयाप्रदा ने तो खैर संकट के वक्त अमरसिंह का अहसान चुकाया है, लेकिन अमर के भाई अमिताभ की पत्नी जया बच्चन अपने प्रिय देवर के समर्थन में अपनी सिर्फ पाँच महीने की राज्यसभा सीट भी कुर्बान करने को तैयार नहीं हैं। उधर, मुलायमसिंह यादव और दूसरे सपा नेता अब अमरसिंह में वे सारी बुराइयाँ देख रहे हैं, जो कभी रघु ठाकुर से लेकर मोहम्मद आजम खान तक ने गिनाई थीं।
कम्युनिस्टों का अवसरवाद कई बार सामने आ चुका है, लेकिन पिछली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने जिस तरह मनमोहन सरकार से समर्थन लेने के बाद उन मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का बीड़ा उठाया, जिनके खिलाफ खुद वाम मोर्चे के दिग्गज नेता मंचों से भाषण कर चुके हैं, तब लगा कि मार्क्स और लेनिन की वैचारिक विरासत का दावा करने वाले भारतीय कम्युनिस्ट वैचारिक रूप से कितने खोखले हो चुके हैं।
ममता बनर्जी, करुणनिधि, जयललिता, चंद्रबाबू नायडू, देवेगौड़ा, ओमप्रकाश चौटाला, नवीन पटनायक जैसे छत्रपों ने मुद्दों से ज्यादा मौके के हिसाब से ही सियासी फैसले लिए हैं। धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाले इन छत्रपों ने भाजपा से हाथ मिलाने में भी कोई संकोच नहीं किया और गुजरात के दंगों के बाद भी इनका राजनीतिक जमीर नहीं जागा।
ममता, जयललिता, करुणानिधि और देवेगौड़ा तो मौके के मुताबिक कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस से हाथ मिलाते ही रहते आए हैं। गाँधी, लोहिया, जयप्रकाश की विरासत का दावा करने वाले शरद यादव, रामविलास पासवान, लालूप्रसाद यादव, नीतीश कुमार जैसे नेता भी इस सबसे अछूते हैं। कुल मिलाकर भारतीय राजनीति और सामाजिक नेतृत्व अवसरवाद के दलदल में बुरी तरह फँस गया है।
सोमवार, 1 फ़रवरी 2010
विशेष
डॉक्टर्स रिलेटेड हर जानकारी साइट
क्या आप बीमार हैं और ट्रीटमेंट करा के हार चुके हैं? नये डॉक्टर की तलाश में हैं, या फिर पहली बार आप डॉक्टर के पास जाना चाहते हैं, तो घबराए नहीं। आज के हाइटेक युग में आप यह सुविधा घर बैठे हासिल कर सकते हैं। बस आपको एक क्लिक करने की देर है। यानि वेबसाइट पर सब कुछ उपलब्ध है।
वेबसाइट पर डॉक्टर्स ही नहीं, उनसे जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल जाएंगी। कहें तो साइट से उनकी डिग्री, फीस और शेड्यूल के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको www.inspectclinic.weebly.com को खंगालना होगा। फिर तो डॉक्टर्स व उनसे जुड़ी सारी जानकारियां मिल जाएंगी। मसलन आप हार्ट प्राब्लम के इलाज के लिए कार्डियोलॉजी को ढूंढ़ रहे हैं तो कार्डियोलॉजी के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। यहां तक कि बेवसाइट पर डॉक्टर खुद अपना प्रोफाइल भी अपडेट कर सकते हैं और ब्लॉग पर अपना अनुभव भी डाल सकते हैं।
नाखुश हैं तो करें कंप्लेन
सबसे खास बात यह कि अगर आप डॉक्टर के इलाज से नाखुश हैं तो यहां कंप्लेन भी कर सकते हैं।हां, इसके लिए आपको अपना फोन नंबर और ईमेल आईडी डालना होगा। यह भी बताना होगा कि कहां पर डॉक्टर ने गलती की है। इस संबंध में वेबसाइट से जुड़े अमृत कहते हैं कि साइट में इंडिया के महत्वपूर्ण डॉक्टर्स व हॉस्पीटल के भी लिंक दिए गए हैं, जिन्हें नेट यूज करने में प्राब्लम होती है, उसके लिए हेल्प लाइन नंबर भी दिया गया है, जिससे और भी रिलेटेड जानकारी ले सकते हैं।
क्या आप बीमार हैं और ट्रीटमेंट करा के हार चुके हैं? नये डॉक्टर की तलाश में हैं, या फिर पहली बार आप डॉक्टर के पास जाना चाहते हैं, तो घबराए नहीं। आज के हाइटेक युग में आप यह सुविधा घर बैठे हासिल कर सकते हैं। बस आपको एक क्लिक करने की देर है। यानि वेबसाइट पर सब कुछ उपलब्ध है।
वेबसाइट पर डॉक्टर्स ही नहीं, उनसे जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल जाएंगी। कहें तो साइट से उनकी डिग्री, फीस और शेड्यूल के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको www.inspectclinic.weebly.com को खंगालना होगा। फिर तो डॉक्टर्स व उनसे जुड़ी सारी जानकारियां मिल जाएंगी। मसलन आप हार्ट प्राब्लम के इलाज के लिए कार्डियोलॉजी को ढूंढ़ रहे हैं तो कार्डियोलॉजी के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। यहां तक कि बेवसाइट पर डॉक्टर खुद अपना प्रोफाइल भी अपडेट कर सकते हैं और ब्लॉग पर अपना अनुभव भी डाल सकते हैं।
नाखुश हैं तो करें कंप्लेन
सबसे खास बात यह कि अगर आप डॉक्टर के इलाज से नाखुश हैं तो यहां कंप्लेन भी कर सकते हैं।हां, इसके लिए आपको अपना फोन नंबर और ईमेल आईडी डालना होगा। यह भी बताना होगा कि कहां पर डॉक्टर ने गलती की है। इस संबंध में वेबसाइट से जुड़े अमृत कहते हैं कि साइट में इंडिया के महत्वपूर्ण डॉक्टर्स व हॉस्पीटल के भी लिंक दिए गए हैं, जिन्हें नेट यूज करने में प्राब्लम होती है, उसके लिए हेल्प लाइन नंबर भी दिया गया है, जिससे और भी रिलेटेड जानकारी ले सकते हैं।
फरवरी
फरवरी माह के त्योहार
दिऩांक प्रमुख त्योहार अन्य त्योहार हिंदी माह पक्ष तिथि
1 फरवरी फाल्गुन कृष्ण एकम (1)
2 फरवरी संकष्टी गणेश चतुर्थी (चंद्रो.रा.9.31) फाल्गुन कृष्ण द्वितीया (2)
3 फरवरी फाल्गुन कृष्ण तृतीया (3)
4 फरवरी कवि रहीम ज. फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी (4)
5 फरवरी फाल्गुन कृष्ण पंचमी (5)
6 फरवरी सीताष्टमी, जानकी ज. फाल्गुन कृष्ण षष्ठी (6)
7 फरवरी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी (7)
8 फरवरी दयानंद सरस्वती ज. फाल्गुन कृष्ण अष्टमी (8)
9 फरवरी विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण नवमी (9)
10 फरवरी फाल्गुन कृष्ण दशमी-एकादशी (10-11)
11 फरवरी प्रदोष व्रत पं. दीनदयाल पु. फाल्गुन कृष्ण द्वादशी (12)
12 फरवरी महाशिवरात्री व्रत, शाही स्नान फाल्गुन कृष्ण द्वादशी (12)
13 फरवरी महाशिवरात्री व्रत, शाही स्नान सरोजनी नायडू ज. फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी (13)
14 फरवरी स्नानदान अमावस्या वेलेन्टाइन डे फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (14)
15 फरवरी चंद्रदर्शन फाल्गुन शुक्ल अमावस्या (15)
16 फरवरी फुलोरा दोज परमहंस ज. फाल्गुन शुक्ल एकम (1)
17 फरवरी फाल्गुन शुक्ल द्वितीया (2)
18 फरवरी विनायकी चतुर्थी (चंद्र अ.रा.10.51) पंचक समाप्त (रात्रि 02.21) फाल्गुन शुक्ल तृतीया (3)
19 फरवरी शिवाजी ज. फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी (4)
20 फरवरी फाल्गुन शुक्ल पंचमी (5)
21 फरवरी होलाष्टक प्रारंभ फाल्गुन शुक्ल षष्ठी (6)
22 फरवरी दादूलाल ज. फाल्गुन शुक्ल सप्तमी (7)
23 फरवरी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी (8)
24 फरवरी शबरी ज. फाल्गुन शुक्ल नवमी (9)
25 फरवरी आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल दशमी (10)
26 फरवरी प्रदोष व्रत, पुष्य नक्षत्र वीर सावरकर दि. फाल्गुन शुक्ल एकादशी (11)
27 फरवरी ईद मिलादुन्नबी चंद्रशेखर आजाद दि. फाल्गुन शुक्ल द्वादशी (12)
28 फरवरी होलिका दहन, पूर्णिमा, चैतन्य महाप्रभु ज. विज्ञान दि., राजेंद्र प्रसाद दि. फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी (13)
दिऩांक प्रमुख त्योहार अन्य त्योहार हिंदी माह पक्ष तिथि
1 फरवरी फाल्गुन कृष्ण एकम (1)
2 फरवरी संकष्टी गणेश चतुर्थी (चंद्रो.रा.9.31) फाल्गुन कृष्ण द्वितीया (2)
3 फरवरी फाल्गुन कृष्ण तृतीया (3)
4 फरवरी कवि रहीम ज. फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी (4)
5 फरवरी फाल्गुन कृष्ण पंचमी (5)
6 फरवरी सीताष्टमी, जानकी ज. फाल्गुन कृष्ण षष्ठी (6)
7 फरवरी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी (7)
8 फरवरी दयानंद सरस्वती ज. फाल्गुन कृष्ण अष्टमी (8)
9 फरवरी विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण नवमी (9)
10 फरवरी फाल्गुन कृष्ण दशमी-एकादशी (10-11)
11 फरवरी प्रदोष व्रत पं. दीनदयाल पु. फाल्गुन कृष्ण द्वादशी (12)
12 फरवरी महाशिवरात्री व्रत, शाही स्नान फाल्गुन कृष्ण द्वादशी (12)
13 फरवरी महाशिवरात्री व्रत, शाही स्नान सरोजनी नायडू ज. फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी (13)
14 फरवरी स्नानदान अमावस्या वेलेन्टाइन डे फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (14)
15 फरवरी चंद्रदर्शन फाल्गुन शुक्ल अमावस्या (15)
16 फरवरी फुलोरा दोज परमहंस ज. फाल्गुन शुक्ल एकम (1)
17 फरवरी फाल्गुन शुक्ल द्वितीया (2)
18 फरवरी विनायकी चतुर्थी (चंद्र अ.रा.10.51) पंचक समाप्त (रात्रि 02.21) फाल्गुन शुक्ल तृतीया (3)
19 फरवरी शिवाजी ज. फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी (4)
20 फरवरी फाल्गुन शुक्ल पंचमी (5)
21 फरवरी होलाष्टक प्रारंभ फाल्गुन शुक्ल षष्ठी (6)
22 फरवरी दादूलाल ज. फाल्गुन शुक्ल सप्तमी (7)
23 फरवरी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी (8)
24 फरवरी शबरी ज. फाल्गुन शुक्ल नवमी (9)
25 फरवरी आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल दशमी (10)
26 फरवरी प्रदोष व्रत, पुष्य नक्षत्र वीर सावरकर दि. फाल्गुन शुक्ल एकादशी (11)
27 फरवरी ईद मिलादुन्नबी चंद्रशेखर आजाद दि. फाल्गुन शुक्ल द्वादशी (12)
28 फरवरी होलिका दहन, पूर्णिमा, चैतन्य महाप्रभु ज. विज्ञान दि., राजेंद्र प्रसाद दि. फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी (13)
दैनिक राशिफल
2 फरवरी 2010 दैनिक राशिफल
मेष
धन-संपत्ति में बढ़ोतरी होकर आत्मप्रसन्नता का अनुभव होगा। अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।
वृष
व्यापार-व्यवसाय में उन्नति के योग बनने से लाभ की आशा प्रबल होगी। पारिवारिक समस्याओं का निकाल होकर प्रसन्नता का वातावरण बनेगा। प्रवास में सतर्कता आवश्यक।
मिथुन
व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र में आशानुकूल लाभ होने की संभावना बनती है। अन्यथा साहस नहीं करें। वैवाहिक प्रस्ताव आएँगे। पूँजी निवेश एवं बचत में वृद्धि होगी।
कर्क
साझेदारी की समस्या का निराकरण होगा। पुरानी उधारी, लेनदारी में सफलता मिलेगी। बोलचाल की भाषा में सावधानी जरूरी है। विलासिता के प्रति रुझान बढ़ेगा।
सिंह
ब़ड़े लोगों से मुलाकात के अवसर आएँगे, जिसका लाभ भविष्य में आपको मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय में बढ़ोतरी होगी। कर्ज से दूर रहें। परिवार के सदस्यों की तरक्की होगी।
कन्या
यात्रा, प्रवास में लाभ मिलने की संभावना बनती है। राजकार्य अथवा शासन सत्ता से मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आलस्य न करें। परिवार के सदस्यों की मदद रहेगी।
तुला
पुरानी उधारी, लेनदारी में सफलता मिलेगी। नवीन कार्य रचनाओं को साकार रूप दे सकते हैं। नौकरीपेशा के स्थानांतरण या पदोन्नति की संभावना है। क्रोध, उत्तेजना पर नियंत्रण रखें।
वृश्चिक
वाहन तेज गति से न चलाएँ। रुपयों के लेनदेन में सावधानी रखें। संतान के कार्यों से समाज में आपकी आलोचना हो सकती है।
धनु
व्यापार में नए प्रस्ताव समृद्धि के संकेत देंगे। आर्थिक प्रयासों में सफलता मिलने के योग हैं। अपने काम से काम रखें। यात्रा प्रवास में लाभ मिलने की संभावना बनती है।
मकर
चलते हुए कार्यों में अवरोध उत्पन्न होंगे। परिवारजनों से सामंजस्य बनाए रखें। अधिक विश्वास किसी पर नहीं करें। अपव्यय होगा। अवसर चूकने से निराशा होगी।
कुंभ
महत्वपूर्ण कार्यों में प्रतिबद्ध होकर स्वयं सक्रिय होना आवश्यक है। नए कार्यों को करने से लाभ के मार्ग प्रशस्त होंगे। साझेदारी की समस्या का निराकरण होगा।
मीन
नए कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यापार में वृद्धि होकर आर्थिक क्षेत्र में सुधार की संभावना है। आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। गैरजरूरी वाद-विवाद से बचकर रहें।
मेष
धन-संपत्ति में बढ़ोतरी होकर आत्मप्रसन्नता का अनुभव होगा। अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।
वृष
व्यापार-व्यवसाय में उन्नति के योग बनने से लाभ की आशा प्रबल होगी। पारिवारिक समस्याओं का निकाल होकर प्रसन्नता का वातावरण बनेगा। प्रवास में सतर्कता आवश्यक।
मिथुन
व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र में आशानुकूल लाभ होने की संभावना बनती है। अन्यथा साहस नहीं करें। वैवाहिक प्रस्ताव आएँगे। पूँजी निवेश एवं बचत में वृद्धि होगी।
कर्क
साझेदारी की समस्या का निराकरण होगा। पुरानी उधारी, लेनदारी में सफलता मिलेगी। बोलचाल की भाषा में सावधानी जरूरी है। विलासिता के प्रति रुझान बढ़ेगा।
सिंह
ब़ड़े लोगों से मुलाकात के अवसर आएँगे, जिसका लाभ भविष्य में आपको मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय में बढ़ोतरी होगी। कर्ज से दूर रहें। परिवार के सदस्यों की तरक्की होगी।
कन्या
यात्रा, प्रवास में लाभ मिलने की संभावना बनती है। राजकार्य अथवा शासन सत्ता से मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आलस्य न करें। परिवार के सदस्यों की मदद रहेगी।
तुला
पुरानी उधारी, लेनदारी में सफलता मिलेगी। नवीन कार्य रचनाओं को साकार रूप दे सकते हैं। नौकरीपेशा के स्थानांतरण या पदोन्नति की संभावना है। क्रोध, उत्तेजना पर नियंत्रण रखें।
वृश्चिक
वाहन तेज गति से न चलाएँ। रुपयों के लेनदेन में सावधानी रखें। संतान के कार्यों से समाज में आपकी आलोचना हो सकती है।
धनु
व्यापार में नए प्रस्ताव समृद्धि के संकेत देंगे। आर्थिक प्रयासों में सफलता मिलने के योग हैं। अपने काम से काम रखें। यात्रा प्रवास में लाभ मिलने की संभावना बनती है।
मकर
चलते हुए कार्यों में अवरोध उत्पन्न होंगे। परिवारजनों से सामंजस्य बनाए रखें। अधिक विश्वास किसी पर नहीं करें। अपव्यय होगा। अवसर चूकने से निराशा होगी।
कुंभ
महत्वपूर्ण कार्यों में प्रतिबद्ध होकर स्वयं सक्रिय होना आवश्यक है। नए कार्यों को करने से लाभ के मार्ग प्रशस्त होंगे। साझेदारी की समस्या का निराकरण होगा।
मीन
नए कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यापार में वृद्धि होकर आर्थिक क्षेत्र में सुधार की संभावना है। आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। गैरजरूरी वाद-विवाद से बचकर रहें।
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