ऐसा प्यार और कहाँ?
ध्वनि और प्रकाश की कहानी हीर-रांझा, सोहनी-महिवाल से कम नहीं। जिसे पढ़ने और सुनने के बाद मुँह से केवल एक ही बात निकलती है। आह! इसे कहते हैं प्यार, जिसे अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता, सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
ध्वनि और प्रकाश दोनों एक ही काम्प्लेक्स में हाल ही में रहने आए हैं। इस बिल्डिंग को बने ज्यादा समय नहीं हुआ। ध्वनि जहाँ सुंदर दिखती है, वहीं प्रकाश भी स्मार्ट और हैंडसम है। निगाहों-निगाहों से उतरे दोनों एक-दूसरे के दिल में। लिफ्ट में जब पहली बार दोनों अकेले मिले। तो जान-पहचान के हिसाब से प्रकाश ने ध्वनि से हलो किया और खुद का नाम बताते हुए ध्वनि से नाम पूछ लिया। ध्वनि ने रिएक्ट ऐसे किया जैसे उनके अलावा और भी कोई लिफ्ट में हो। मी? आई एम ध्वनि।
ऐसे ही कभी कभार टकराने पर दोनों कुछेक जुमले छोड़ दिया करते थे। पहले कहाँ रहते थे या आप क्या करते हैं। वगैरह-वगैरह। उसके बाद दोनों के फ्रेंड सर्कल के जरिये दोनों में संपर्क बढ़ा। अन्य फ्लैट्स के दोस्त और ध्वनि की फ्रेंड्स के जरिये आगे की जानकारी दोनों तक पहुँच जाती थी। आग दोनों तरफ लगी हुई। चोरी-छिपे मिलना, फोन पर बात करना शुरू हुआ।
साल-दो साल की इन मुलाकातों के बाद ध्वनि ने एक दिन प्रकाश को बताया कि उसके दिल में छेद है। पहले तो प्रकाश का दिल धक करके रह गया। एक क्षण तो लगा जैसे ऐसी गंभीर बीमारी उसे खुद ही हो। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक न होने के कारण उसका ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। यदि तुम चाहो तो अपना जीवनसाथी कोई दूसरा चुन सकते हो। मैं तुम्हें यह बात पहले भी बताना चाहती थी लेकिन पता नहीं समय कब निकलता गया और आज हमें मिले 2 साल होने को आए। लेकिन अभी भी कुछ देर नहीं हुई है।
सोच-विचार करने के बाद प्रकाश ध्वनि की मेडिकल रिपोर्ट लेकर चेन्नई के हॉस्पिटल गया और इलाज के खर्च के बारे में पता लगा जिसमें लगभग ढाई से तीन लाख रुपए खर्च आना था। प्रकाश ने अपनी सैलेरी से सारे खर्च बंद करके पैसा जोड़ना शुरू किया। यहाँ तक कि घंटों ध्वनि से फोन पर बात करना बंद कर दिया। क्योंकि उसे फोन लगाने के लिए एसटीडी का ही उपयोग करना पड़ता था और उसका बिल महीने भर का लगभग दो-ढाई हजार आता था। कभी-कभार ही थोड़े समय के लिए फोन लगाता। अब उसके जीवन में रुपयों की अहमियत काफी बढ़ गई थी।
लगभग 2 साल में उसने डेढ़ लाख रुपया जोड़ लिया। प्रकाश और ध्वनि के दोस्तों ने भी उसकी आर्थिक मदद की। अपने माता-पिता को जैसे-तैसे राजी कर वह सवा लाख रुपया लेने में सफल हो गया। अंतरजातीय होने के कारण लड़की के माता-पिता बिल्कुल भी दोनों की शादी के पक्ष में नहीं थे। इसलिए दोनों ने चुपचाप चेन्नई जाकर इलाज करवाया और फोन पर ध्वनि के माता-पिता को इसकी जानकारी दी।
दोनों के साथ होने की खबर लगते ही ध्वनि के माता-पिता नाराज हुए और प्रकाश के घर उसके माता-पिता से लड़ने पहुँच गए कि कैसे तुम्हारा बेटा हमारी बेटी को लेकर चला गया और पुलिस में जाकर रिपोर्ट लिखाने की बात करने लगे। लेकिन कुछ घंटों के बाद प्रकाश के माता-पिता ध्वनि के घर गए और उनसे विनम्रता पूर्वक बोले 'आप ही नहीं दोनों की शादी के हम भी खिलाफ थे। परंतु जब प्रकाश ने हमें सारी बात बताई कि दोनों एक-दूसरे को प्यार करते हैं और इलाज के बाद शादी भी करने को तैयार हैं तो आखिर मुझे भी हार माननी पड़ी और शादी के लिए राजी होना पड़ा और जब वह इतना परेशान हो ही रहा है आपकी बेटी के इलाज के लिए तो मेरा आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि आप भी इतनी सी बात मान लें।
प्रकाश ने कभी पैसे का इतना महत्व नहीं समझा जितना पिछले 2 सालों में उसे समझ में आया है। मैंने तो हकीकत में इतना प्रेम पहली बार ही देखा है। सोचने का समय माँगकर उस समय भी ध्वनि के माता-पिता बात को टाल गए और दो दिन बाद जब प्रकाश और ध्वनि चेन्नई से लौटे तो प्रकाश से मिलने के बाद उन्होंने भी शादी के लिए हाँ कर दी। दोनों ने बड़ी धूमधाम से शादी रचाकर अन्य प्रेमी युगलों के लिए मिसाल पेश की। आज भी दोनों अपनी गृहस्थी भलीभाँति चला रहे हैं।
जीवन में कभी उन लोगों पर भरोसा मत करो, समय बदलने के साथ जिनकी भावनाएँ भी बदल जाती हैं बल्कि उन लोगों पर भरोसा करो जिनकी भावनाएँ समय बदलने के साथ नहीं बदलती। जैसा प्रकाश ने किया ध्वनि की बीमारी पता लगने के बाद भी उसकी चाहत में कोई कमी नहीं आई।
वो तेरे प्यार का गम!
'तुम्हें क्या मिला वह तो मैं नहीं जानता लेकिन एक बात जरूर जानता हूँ कि तुमने उस शख्स को खोया है जो कभी अपने आपसे भी ज्यादा तुम्हें प्यार करता था। तुमने उसे धोखा दिया है जिसने अपने जीवन में सिर्फ और सिर्फ तुम पर भरोसा किया। खैर तुम्हे जो करना था वह तुमने कर लिया बस अब एक आखिरी गुजारिश है। मेरे बाकी बचे जीवन में कभी भी और कहीं भी अगर तुम्हारा मुझसे सामना हो जाए तो भगवान के लिए अपना रास्ता बदल देना या फिर अपना मुँह फेर लेना। क्योंकि मैं जानता हूँ कि जब कभी भी मैं तुम्हारा चेहरा देखूँगा तब मुझे सिर्फ एक ही बात का अफसोस रहेगा कि मैंने इस चेहरे के पीछे छुपे हुए उस शख्स से प्यार किया जिसने आखिर तक मुझे धोखे के अलावा और कुछ भी नहीं दिया। हो सकता है कि उस वक्त मैं गुस्से में आकर कुछ ऎसा काम कर जाऊँ जो मैं कभी नहीं करना चाहता।''
उस दिन अचानक ही रीटा की नजर राजीव के द्वारा लिखे गए उस खत पर पड़ गई जो कई सालों से एक किताब के पन्नों के बीच में सड़ रहा था। यह खत राजीव और रीटा की प्यार की यादों को बयाँ करने वाला आखिर खत था।
कॉलेज के दिनो में ही इन दोनों के प्यार का गुल खिला था। रीटा प्रिंसीपल साहब की ऑफिस से बाहर ही निकली थी कि अचानक ही सामने के कैन्टीन में राजीव अपने दोस्तों के साथ काफी पी रहा था। नई स्टूडेंट को देखकर सभी सीनियर्स रीटा के नजदीक आ गए और देखते ही देखते उसकी रैगिंग शरू कर दी। हद तो तब हो गई जब रीटा को कहा गया कि 'वह एक अपाहिज महिला की तरह लंगडाती लंगडाती सभी स्टूडेन्ट्स के सामने आकर भीख माँगे।
रीटा के लिए दिल्ली शहर बिल्कुल नया था और यहाँ के लोग भी। वह बिलकुल घबरा गई और फूट फूट कर रोने लगी। उस समय राजीव ही था जो एक फरिश्ता बनकर उसे बचाने आया था। उसने सभी सीनियर्स को खूब डाँटा और उन्हें रीटा से माफी माँगने के लिए भी कहा।
उसी दिन से राजीव रीटा के मन को भा गया। धीरे-धीरे उन दोनों की दोस्ती बढ़ने लगी। दूरियाँ नजदीकियों में तब्दील होने लगी और एक दिन रीटा ने सामने से ही राजीव को प्रप्रोज कर दिया। राजीव को भी रीटा बहुत पसंद थी उसने भी उसे खुले मन से स्वीकार कर लिया। समय बीतता गया और उनका प्यार परवान चढ़ते गया। बात शादी तक भी आ पहुँची।
अब राजीव एक प्रतिष्ठित कंपनी में मैनेजर था उसकी तनख्वाह भी अच्छी थी। रीटा भी हाईस्कूल के विद्यार्थियों को पढ़ाती थी। अचानक ही राजीव का तबादला मुंबईClick here to see more news from this city शहर में हो गया। रीटा से कोसों दूर होने के बावजूद भी वह हर महीने उसे मिलने के लिए मुंबई से दिल्ली आता रहता था। दोनों घंटों तक टेलीफोन पर एक-दूसरे से बातें किया करते थे। लेकिन धीरे-धीरे रीटा के फोन आने बंद हो गए। राजीव जब कभी भी फोन करता या तो फोन काट दिया जाता या फिर लंबे समय तक उसमे घंटियाँ बजती रहती।
राजीव भी थोड़ा व्यस्त होने के कारण चार-पाँच महीनों तक दिल्ली नहीं जा पाया। बाद में राजीव को मालूम हुआ कि रीटा और उनका परिवार दिल्ली छोड़कर कहीं दूर चले गए हैं। राजीव ने रीटा के बारे में जानने के लिए पूरी कोशिश की। वह रीटा के हर दोस्त, हर रिश्तेदार से मिला लेकिन किसी को भी रीटा कहाँ है उसकी जानकारी नहीं थी।इस बात को पूरे पाँच साल बीत गए। एक दिन राजीव ऑफिस से बाहर ही निकला था कि सामने सड़क पर खड़े एक गुब्बारे वाले के पास एक महिला अपने छोटे बच्चे के साथ खड़ी थी। उसका बेटा गुब्बारे खरीदने के लिए बार बार उससे जिद करता था लेकिन वह मना कर रही थी।
राजीव को उस महिला का चेहरा कुछ जाना पहचाना लगा। वह न चाहते हुए भी अपनी कार को रोड के दूसरी तरफ ले गया। उसने उस महिला को गौर से देखने का प्रयास किया, वह महिला और कोई नहीं बल्कि रीटा ही थी और वह बच्चा जो कब से उससे गुब्बारा खरीदने की जिद कर रहा था वह उसका ही बेटा था। एक मिनट के लिए राजीव अपने आपको सँभाल नहीं पाया। रीटा अब तक कहाँ थी और कब उसकी शादी हो गई, उसने क्यों मुझे नहीं बताया? ऎसे कई सवाल थे जो राजीव को परेशान कर रहे थे। उसने धीरे से अपनी गाड़ी का दरवाजा खोला और रीटा के नजदीक आकर खड़ा हो गया।
एक पल के लिए तो अपने सामने राजीव को देखकर रीटा हैरान ही रह गई लेकिन बाद में अपने आपको सँभालते हुए सिर्फ फॉर्मलिटी के लिए उसने न चाहते हुए भी कहा 'हैलो राजीव कैसे हो?'
जिंदा हूँ। राजीव ने कड़वे लहजे में जवाब दिया। उसके जेहन में पिछले कई सालों से जो सवाल एक शूल की भाँति चुभ रहा था वह आज बाहर निकल ही गया 'रीटा तुम बिना बताए कहाँ चली गई थीं? मैंने तुम्हें कहाँ-कहाँ नहीं ढूँढा।
रीटा ने राजीव की इस बात का जवाब देना मुनासिब नहीं समझा और अपने बेटे के पास जाकर कहा' सोहम, बेटा यह राजीव अंकल हैं उन्हें हैलो कहो। सोहम ने मीठी मुस्कान के साथ राजीव को हैलो कहा। उसकी मुस्कान को देखकर राजीव अपनी कड़वाहट और गुस्सा भूल गया, उसने गुब्बारे वाले से एक बड़ा गुब्बारा खरीदकर उसके हाथ में थमा दिया।
रीटा सोहम की अँगुली पकड़कर अब सड़क के दूसरे छोर पर चलने लगी। सामने के मल्टी में ही उसका फ्लैट था। राजीव ने सोहम का दूसरा हाथ पकड़ लिया। राजीव बार-बार एक ही बात रट रहा था जिससे परेशान होकर आखिर में रीटा भड़क गई।
'देखो राजीव अब हमारे बीच में ऎसा कुछ भी नहीं रहा, जैसा तुम चाहते थे। कहीं मेरे पति ने तुम्हें मेरे साथ देख लिया तो मेरी गृहस्थी बर्बाद हो जाएगी। भगवान के लिए यहाँ से चले जाओ। प्लीस राजीव यहाँ से चले जाओ।' रीटा ने मुँह फेरते हुए कहा।
आज रीटा पूरी तरह बदल चुकी थी। यह वही रीटा थी जो कभी राजीव के लिए अपनी जान देने के लिए भी तैयार हो जाती थी लेकिन अचानक उसे क्या हो गया। आधी अधूरी बातों से राजीव को यह तो मालूम हो गया कि रीटा ने लंदन के एक बड़े उद्योगपति मोहन अग्रवाल से उसी समय शादी कर ली थी जब वह मुंबई में था। यह रिश्ता रीटा के चाचाजी लाए थे। उस वक्त रीटा असमंज में थी कि वह किसे चुने एक तरफ राजीव था तो और दूसरी और मोहन।मोहन के सामने राजीव की औकात फूटी कौड़ी की भी नहीं थी। उसके पास पुरखों की जायदाद और एक बड़ा कारोबार था। घर में दस-दस नौकर थे, वह रीटा के वो सभी सपने पूरे कर सकता था जिसे वह दिन-रात देखा करती थी। जबकि दूसरी और राजीव के पास उस व्यक्त रहने के लिए खुद का एक कमरा भी नहीं था। काफी सोच विचारकर अंत में रीटा ने प्यार के बदले पैसे देखकर मोहन से शादी कर ली और उसका पूरा परिवार दिल्ली छोड़ लंडन जा बसा।
बेचारा राजीव आखिर तक यह बात नहीं जान पाया कि वह सालों से जिस लड़की की प्रतिक्षा कर रहा था, वह आज एक लड़के की माँ बन चुकी है और मुंबई में अपने एक रिश्तेदार की शादी के लिए आई है।
राजीव अब तुम वापस चले जाओ। मेरे परिचितों का घर आ गया है। वो हम दोनों को जानते हैं। प्लीज चले जाओ' रीटा ने सामने वाली बिल्डिंग की और इशारा करते हुए कहा।
'लेकिन रीटा मेरी बात तो सुनो' राजीव अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया और रीटा अपने पति का विजिटिंग कार्ड देकर मल्टी के भीतर चली गई कार्ड में लिखा था। मि.मोहन कुमार अग्रवाल, एमडी फोर्च्युन प्राइवेट लि. लंदन।
उस मल्टी में दो-तीन तक शादी का माहौल रहा। शादी खत्म होने के बाद जब रीटा अपने परिवार के साथ लंदन जाने के लिए रवाना हो रही थी तभी मल्टी के चौकीदार ने उसे एक लेटर दिया और कहा कि मैडम यह एक साहब आपके लिए छोड़कर चले गए हैं। यह वही लेटर था जो रीटा आज पढ़ रही थी। उसने उसका दूसरा पन्ना खोला जिसे पढ़ने का कष्ट रीटा ने आज से पहले कभी नहीं किया था। जिसमें राजीव ने एक बड़ी बात लिखी थी। 'रीटा मालूम नहीं क्यों मैं चाहकर भी तुमसे नफरत नहीं कर पाया। तुम्हारे जाने के बाद भी मुझे हमेशा ऎसा लगा कि तुम मेरे साथ हो रीटा तुम नहीं हो फिर भी हमेशा ऎसा लगता कि तुम मेरे साथ हो, जब भी कोई बात होती है तब लोगों से मैं तुम्हारी बात छेड़ देता हूँ। तुम्हीं मेरी वो आँखें हो जो मुझे सूनी और तन्हा राहों में रास्ता दिखाती है। तुम्हारे मुस्कान को याद करके में दुनियाभर का गम भूल जाता हूँ। मैं तुम्हें कल भी प्यार करता था, आज भी करता हूँ और हमेशा करता रहूँगा। हो सके तो अगले जन्म में जरूर मिलना। सदा तुम्हें प्यार करने वाला राजीव!
रीटा ने लेटर के नीचे देखा जिसमें उसी कंपनी का पता लिखा था जिसमें रीटा के पति काम करते थे। दूसरे दिन सुबह-सुबह रीटा ने अपने पति से पूछा 'क्या आप राजीव शर्मा को जानते हैं?
क्यों नहीं भला एक नौकर अपने बॉस को कैसे भूल सकता है। वह हमारी कंपनी के सीईओ हैं। फिलहाल वह मुंबई में हैं। मोहन ने बिना रीटा को देखे एक हाथ में चाय का कप और दूसरे हाथ में अखबार रखते हुए कहा।
मे दैनिक राष्ट्रीय हिंदी मेल का सम्पादक हूँ.खुल्लम खुल्ला मेरी अभिव्यक्ति है .अपना विचार खुलेआम दुनिया के सामने व्यक्त करने का यह सशक्त माध्यम है.अरुण बंछोर-मोबाइल -9074275249 ,7974299792 सबको प्यार देने की आदत है हमें, अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे, कितना भी गहरा जख्म दे कोई, उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
शुक्रवार, 5 मार्च 2010
प्रेम कथाएँ
प्रेम क्या होता है?
खिड़की के बाहर गर्मी की रात बिखरी हुई है, गर्मी की गुनगुनी-सी रात। खिड़की से सटकर लगी हुई रातरानी की झाड़ी के फूलों की मादक गंध खिड़की के परदे से अठखेलियाँ कर रही हवा के साथ कमरे में आ रही है। खिड़की के छज्जे पर लदी हुई रंगून क्रीपर की तलर भी लाल, सफेद और गुलाबी गुच्छों के कारण झुकी जा रही है।
खिड़की के पार दूर आसमान में आधा अधूरा चाँद टंका हुआ है। ग्रीष्म की धूप को दिन भर सहन करने के बाद झुलसे पेड़ों की पत्तियों और शाखाओं को रात की ठंडी हवा सहला रही है। हवा का स्पर्श पाकर पत्तियाँ कृतज्ञतावश झुकी जा रही हैं। गर्मी के मौसम की सबसे बड़ी विशेषता उसकी रात होती है। जितना तपता हुआ, जलता हुआ दिन उतनी ही सुहानी रात।
खिड़की से हटकर सोनू अंदर आ गया और अपनी कविता की डायरी लेकर कुर्सी पर बैठ गया। लड़का अभी भी उसी प्रकार सो रहा है। सोनू गौर से उस लड़के के चेहरे को देखने लगा। चौदह-पंद्रह वर्ष की मासूमियत से भरा हुआ चेहरा, जिस पर जवानी ने होठों के ऊपर कल्ले की तरह फूट रहे मूँछों के बारीक़-बारीक़ रोम के रूप में अभी दस्तक देना प्रारंभ ही किया है। गुलाबी होंठ जिनको बीमारी ने भले ही सुखा दिया है मगर अभी भी उनमें ताजगी है। बीमारी के बाद भी चेहरे पर किशोरावस्था की चमक और स्निग्धता बिखरी है।
सोनू को यहाँ लड़के की देखभाल के लिए रखा गया है। वैसे वो एक निजी अस्पताल का कर्मचारी है जिसके मालिक लड़के के पिता के करीबी दोस्त हैं उनके ही कारण सोनू को यहाँ भेजा गया है। लड़के को दवा देना उसे पलंग से उठाकर टहलाना, खाना खिलाना सबकी व्यवस्था सोनू को करनी होती है। लड़के की माँ नहीं है केवल पिता ही हैं, जिनको कारोबार के सिलसिले में घर से बाहर रहना पड़ता है। इससे ज्यादा न सोनू को पता है, न ही उसको पूछने की इजाजत है। उसे बस ये पता है कि यहाँ से उसे अच्छा पैसा मिलेगा जो कॉलेज की परीक्षा फीस भरने में काम आ जाएगा। यहाँ पर जब तक है तब तक कविता लिखने का भी समय है उसके पास।
अस्पताल की नौकरी वह केवल अपनी कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए ही कर रहा है, मगर अस्पताल में काम करते समय कविता? सोचा ही नहीं जा सकता।
सोनू भैय्या! लड़के की आवाज सुनकर सोनू की तंद्रा टूटी।
'हाँ बोलो।' सोनू ने कुर्सी से उठकर पलंग की तरफ जाते हुए कहा। 'पानी चाहिए सोनू भैया।'
लड़के ने उत्तर दिया। 'देता हूँ तुम लेटे रहो।' फिर घड़ी देखते हुए कहा, 'दवा लेने का टाइम भी तो हो गया है।' कहते हुए सोनू दवा निकालने लगा।
चलो उठकर बैठ जाओ दवा लेना है।' सोनू के कहते ही लड़का धीरे-धीरे उठा और तकिये से टिककर बैठ गया। दवा देने के बाद जब सोनू वापस कुर्सी पर बैठने लगा तो लड़के ने कहा, सोनू भैया यहीं बैठ जाओ न पलंग पर, आपसे बातें करूँगा, अब नींद तो आएगी नहीं।'
लड़के के अनुरोध पर सोनू वहीं बैठ गया। पलंग के पास रखी टेबल पर से कंघी उठा कर लड़के के बाल ठीक करने लगा। गर्मी की मस्त हवा के कारण लड़के के बाल बिखर-बिखर जा रहे हैं। शाम को नहाते समय लड़के ने जिद करके शैम्पू लगाया था और देर तक नहाता रहा था।
'सोनू भैया।' लड़के के सिर पर गिर रही एक लट को जब वो पीछे कर रहा था तब लड़के ने कहा, 'हूँ... कंघी को टेबल पर रखते हुए कहा सोनू ने। कुछ देर तक लड़का चुप रहा फिर बोला, 'ये प्रेम क्या होता है..?' लड़के के प्रश्न से सोनू कुछ चौंका फिर मुस्कराता हुआ बोला, 'प्रेम...? अभी तीन चार साल रुक जाओ, सब पता चल जाएगा।'
कहते हुए उसने लड़के के बालों को हल्के से बिखरा दिया।
तीन चार साल रुक पाऊँगा मैं...?'
लड़के ने उदासी से पूछा। लड़के के पूछते ही कमरे की हवा रुक गई।
क्या होता है प्रेम सोनू भैय्या...!?' सोनू को चुप देखकर लड़के ने फिर पूछा।
'प्रेम वह होता है जो हमें किसी दूसरे से जोड़ता है।' सोनू ने कुछ टालने वाले अंदाज में कहा।
'किससे?' लड़के ने फिर पूछा।
किसी से भी, उन सबसे जो हमें अच्छे लगते हैं, हमारे माँ-बाप, हमारे भाई-बहन, हमारे दोस्त।' सोनू ने जवाब दिया।
माँ तो मेरे पास नहीं है पापा हैं पर वो भी... भाई बहन भी नहीं हैं।'
कहते-कहते लड़का फिर चुप हो गया। लड़के की आँखें अचानक नम हो गई थीं। सोनू को लगा उसकी पलकों के किनारे झिलमिला भी रहे हैं।
उसने लड़के को सहज करने के लिए कहा, 'और सबसे खास प्रेम हमें किसी एक खास से भी होता है।' सोनू के इतना कहते ही लड़के के चेहरे के भाव अचानक बदल गए, मानो सोनू ने उसके मन की बात कह दी हो।
'कौन खास सोनू भैया?' उसने उत्सुकता से पूछा।
ये जो बाहर चाँद नजर आ रहा है न, आधा अधूरा-सा चाँद, इसको देखकर न तो रात की रानी के फूल झूम रहे हैं न पेड़ों की पत्तियाँ इठला रही हैं। क्योंकि ये सब एक खास चाँद से प्रेम करते हैं। पूर्णमासी के पूरे चाँद से। अभी दो दिन बाद जब ये चाँद पूरा हो जाएगा तब से सब उस खास के प्रेम में पागल हो जाएँगे। सोनू ने उत्तर दिया।
सचमुच? लड़के ने उत्सुकता से फिर पूछा।
हाँ बिल्कुल दिखाऊँगा। सोनू ने उत्तर दिया।
लड़का गौर से खिड़की के पार के चाँद को देखने लगा। उसके चेहरे के भाव पल-पल बदल रहे थे। कुछ देर तक देखते रहने के बाद लड़का फिर उदास हो गया।
तुम्हें मिला कोई खास? सोनू ने लड़के का मूड बदलने के लिए फिर पूछा।
लड़के ने सोनू की तरफ देखा। सोनू ने देखा उन दो नन्ही आँखों में सितारे झिलमिला रहे थे। फिर अचानक वो शरमा गया और चादर के धागे खींचने लगा।
हूँ... मतलब मिली है।' सोनू ने मजाक के अंदाज में पूछा।
'है नहीं थी..।' लड़के ने उसी तरह झुके हुए कहा पर उसकी आवाज डूबी हुई थी।
'कब? सोनू ने पूछा।
जब मैं स्कूल जाता था। लड़के के स्वर में उदासी थी। उसकी आवाज ऐसी थी मानो किसी सुनसान रात में पहाड़ पर लगे पेड़ों पर बर्फ गिर रही हो।
कौन थी..? सोनू ने फिर पूछा।
'मेरे साथ ही पढ़ती थी और मेरे साथ वही होता था जो अभी आपने कहा ना कि पूर्णमासी के चाँद को देखकर पेड़ों को हो जाता है।' लड़के ने धीरे से कहा।
हूँ... खूब बात-वात होती होंगी तब तो उससे।' सोनू ने शरारत के लहज़े में पूछा।
नहीं, बात तो एक बार भी नहीं हुई। लड़के ने सिर उठाकर उत्तर दिया।
अरे..! क्यों? सोनू ने पूछा।
हिम्मत नहीं होती थी और वो भी शायद बात करना नहीं चाहती थी। लड़के की आँखें बुझ गई थीं।
चलो अब जब स्कूल जाना शुरू करो तो सबसे पहले उससे जाकर बात करना और नहीं कर पाओ तो मुझे ले चलना मैं तुम्हारी तरफ से बात कर लूँगा। सोनू ने लड़के के सिर पर हाथ रखते हुए कहा।
क्यों मजाक करते हो सोनू भैय्या, अब कहाँ जा पाऊँगा मैं स्कूल? अब तो शायद मम्मी के पास चला जाऊँगा। कहते हुए लड़के ने सिर पर रखा सोनू का हाथ लेकर गोद में रख लिया और दोनों हाथों में दबा लिया। सोनू ने दूसरे हाथ से लड़के की आँखों में आई नमी को अपनी अँगुलियों में समेटते हुए कहा। लड़के ने कोई उत्तर नहीं दिया उसी तरह लेटा रहा। सोनू उसके बालों को सहलाता रहा। कुछ देर बाद जब उसको लगा कि लड़का सो गया है तो उसने आहिस्ता से लड़के का सिर अपनी गोद से उठाकर तकिये पर रखा उसे चादर ओढ़ाई और आकर अपने पलंग पर लेट गया।
अगले दिन से लड़के की तबीयत बिगड़ने लग गई थी। तेज बुखार में बड़बड़ाता रहता था। सोनू ने सुना कि उसकी बड़बड़ाहट में बार-बार मम्मी शब्द आ रहा है। नर्सिंग होम से कई बार डॉक्टर आकर लड़के को देखकर जा चुके थे।
बुखार के तीसरे दिन जब डॉक्टर सिन्हा लड़के को देखकर वापस जा रहे थे तब सोनू ने पूछा था, कोई डरने की बात तो नहीं है न सर।'
डरने की बात तो है, अब इसे अस्पताल में शिफ्ट करना ही पड़ेगा, ये रिकवर हो ही नहीं पा रहा है। इसके पिता कब तक आ जाएँगे?' डॉक्टर सिन्हा ने कहा था। 'बस शायद परसों तक आ जाएँगे, सर्वेंट बता रहा था कि उनका फोन आया था।' सोनू ने उत्तर दिया।
'ठीक है उनके आते ही इसे शिफ्ट कर देंगे, तब तक ध्यान रखना कुछ भी हो तो तुरंत खबर करना। कहते हुए डॉक्टर सिन्हा चले गए। सोनू आकर लड़के के सिरहाने बैठ गया और धीरे-धीरे उसका सिर दबाने लगा। कुछ देर बाद लड़का कसमसाया और उसने आँखें खोल दीं। सोनू को देखा तो मुस्करा दिया।
'उठ गए, चलो अच्छा किया, शाम भी हो गई है।' सोनू ने कहा।
लड़का कुछ देर तक सोनू को देखता रहा फिर बोला, 'सोनू भैया क्या अब मैं उसको कभी नहीं देख पाऊँगा?'
क्यों नहीं देख पाओगे? मुझे उसका पता, टेलीफोन नंबर दो अभी बुला लेता हूँ।' सोनू ने उत्तर दिया।
वो तो मुझे कुछ भी नहीं पता। लड़के ने उदासी के साथ कहा।
चलो मैं कल स्कूल जाकर पता कर लूँगा और उसको बुला लाऊँगा। सोनू ने लड़के का उत्साह बढ़ाने के लिए कहा। लड़का फिर अचानक बोला, 'सोनू भैया आज पूर्णिमा है ना? आज आपने कुछ दिखाने को कहा था।'
'हाँ भाई दिखा दूँगा रात तो होने दो।'
सोनू भैया मैं अपनी मम्मी को भी देखना चाहता था पर नहीं देख पाया, ये सब मेरे साथ ही..' कहते-कहते लड़का चुप हो गया।
चलो आज दिखा दूँगा जब चाँद पूरा होगा ना तब उसमें तुमको अपनी मम्मी भी दिखेंगी और वो भी। वो सब दिखेंगे, जिनको तुम प्रेम करते हो। सोनू ने कहा।
'सच...।' लड़के ने उत्साह में भरकर कहा।
बिल्कुल सच! सोनू ने उत्तर दिया।
पर मैं उनको छू तो नहीं पाऊँगा न?' लड़का फिर उदास हो गया।
क्यों नहीं छू पाओगे? जब चाँद को देखो तो मेरी इस हथेली को छू लेना तुमको ऐसा लगेगा कि तुम उन सबको छू रहे हो जिनको तुम प्रेम करते हो। सोनू ने अपनी हथेली दिखाते हुए कहा।
ठीक है। लड़का फिर उत्साह में भर गया।
पर देखो जब चाँद में तुम्हारी वो खास नजर आए तो उसे देखकर शरमा मत जाना।
सोनू ने लड़के की कमर में गुदगुदी करते हुए कहा लड़का खिलखिला उठा।
रात को लड़का सोनू ने गोद में उठाकर खिड़की पर बैठा दिया था क्योंकि तब उसके चलने-फिरने की ताकत बिल्कुल क्षीण हो गई थी।
'देखो वो पूरा पील चाँद।' अमलतास के दो पेड़ों के ऊपर दिख रहे चाँद की ओर इशारा करते हुए सोनू ने कहा। लड़के ने सिर उठा कर चाँद को देखा।
'देखो उसमें अपनी मम्मी को। दिख रही हैं ना? सोनू ने पूछा, लड़के ने हाँ में सिर हिलाया।
ठीक है अब आँखें बंद करके मेरी इस हथेली को छुओ। सोनू के कहते ही लड़के ने वैसा ही किया। थोड़ी देर बाद लड़के ने हथेली को खींचकर अपने चेहरे से सटा लिया। कुछ ही देर में सोनू की हथेली भीग गई।
सोनू ने लड़के की आँखें पोंछीं और फिर कहा, चलो अब फिर देखो चाँद को, अब वो दिखेगी। लड़के ने फिर चाँद को देखा।
दिखी? सोनू ने पूछा। लड़के ने फिर हाँ में सिर हिलाया और आँखें बंद कर लीं और सोनू की हथेली को फिर चेहरे से लगा लिया। अबकी बार सोनू को हथेली पर नमी की जगह आँच का एहसास हुआ लड़के की गर्म साँसों की आँच का एहसास। आँच धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। बढ़ते-बढ़ते अचानक एकदम ठंडी हो गई और हथेली पर साँसों के टकराने का एहसास भी बंद हो गया। सोनू ने देखा दूर आसमान पर एक सितारा टूटा और रोशनी की लकीर छोड़ता हुआ चाँद की तरफ बढ़ा। चाँद के ठीक पास आकर वो सितारा बुझ गया मानो चाँद को छूकर खामोश हो गया हो।
सोनू ने आहिस्ता से लड़के का चेहरा हथेली पर से हटाया, लड़का उसकी बाँहों में झूल गया। हवा बिल्कुल ठहर गई थी मगर रात रानी के छोटे-छोटे फूल चुपचाप आँसुओं की तरह टप-टप करके जमीन पर टपक रहे थे।
खिड़की के बाहर गर्मी की रात बिखरी हुई है, गर्मी की गुनगुनी-सी रात। खिड़की से सटकर लगी हुई रातरानी की झाड़ी के फूलों की मादक गंध खिड़की के परदे से अठखेलियाँ कर रही हवा के साथ कमरे में आ रही है। खिड़की के छज्जे पर लदी हुई रंगून क्रीपर की तलर भी लाल, सफेद और गुलाबी गुच्छों के कारण झुकी जा रही है।
खिड़की के पार दूर आसमान में आधा अधूरा चाँद टंका हुआ है। ग्रीष्म की धूप को दिन भर सहन करने के बाद झुलसे पेड़ों की पत्तियों और शाखाओं को रात की ठंडी हवा सहला रही है। हवा का स्पर्श पाकर पत्तियाँ कृतज्ञतावश झुकी जा रही हैं। गर्मी के मौसम की सबसे बड़ी विशेषता उसकी रात होती है। जितना तपता हुआ, जलता हुआ दिन उतनी ही सुहानी रात।
खिड़की से हटकर सोनू अंदर आ गया और अपनी कविता की डायरी लेकर कुर्सी पर बैठ गया। लड़का अभी भी उसी प्रकार सो रहा है। सोनू गौर से उस लड़के के चेहरे को देखने लगा। चौदह-पंद्रह वर्ष की मासूमियत से भरा हुआ चेहरा, जिस पर जवानी ने होठों के ऊपर कल्ले की तरह फूट रहे मूँछों के बारीक़-बारीक़ रोम के रूप में अभी दस्तक देना प्रारंभ ही किया है। गुलाबी होंठ जिनको बीमारी ने भले ही सुखा दिया है मगर अभी भी उनमें ताजगी है। बीमारी के बाद भी चेहरे पर किशोरावस्था की चमक और स्निग्धता बिखरी है।
सोनू को यहाँ लड़के की देखभाल के लिए रखा गया है। वैसे वो एक निजी अस्पताल का कर्मचारी है जिसके मालिक लड़के के पिता के करीबी दोस्त हैं उनके ही कारण सोनू को यहाँ भेजा गया है। लड़के को दवा देना उसे पलंग से उठाकर टहलाना, खाना खिलाना सबकी व्यवस्था सोनू को करनी होती है। लड़के की माँ नहीं है केवल पिता ही हैं, जिनको कारोबार के सिलसिले में घर से बाहर रहना पड़ता है। इससे ज्यादा न सोनू को पता है, न ही उसको पूछने की इजाजत है। उसे बस ये पता है कि यहाँ से उसे अच्छा पैसा मिलेगा जो कॉलेज की परीक्षा फीस भरने में काम आ जाएगा। यहाँ पर जब तक है तब तक कविता लिखने का भी समय है उसके पास।
अस्पताल की नौकरी वह केवल अपनी कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए ही कर रहा है, मगर अस्पताल में काम करते समय कविता? सोचा ही नहीं जा सकता।
सोनू भैय्या! लड़के की आवाज सुनकर सोनू की तंद्रा टूटी।
'हाँ बोलो।' सोनू ने कुर्सी से उठकर पलंग की तरफ जाते हुए कहा। 'पानी चाहिए सोनू भैया।'
लड़के ने उत्तर दिया। 'देता हूँ तुम लेटे रहो।' फिर घड़ी देखते हुए कहा, 'दवा लेने का टाइम भी तो हो गया है।' कहते हुए सोनू दवा निकालने लगा।
चलो उठकर बैठ जाओ दवा लेना है।' सोनू के कहते ही लड़का धीरे-धीरे उठा और तकिये से टिककर बैठ गया। दवा देने के बाद जब सोनू वापस कुर्सी पर बैठने लगा तो लड़के ने कहा, सोनू भैया यहीं बैठ जाओ न पलंग पर, आपसे बातें करूँगा, अब नींद तो आएगी नहीं।'
लड़के के अनुरोध पर सोनू वहीं बैठ गया। पलंग के पास रखी टेबल पर से कंघी उठा कर लड़के के बाल ठीक करने लगा। गर्मी की मस्त हवा के कारण लड़के के बाल बिखर-बिखर जा रहे हैं। शाम को नहाते समय लड़के ने जिद करके शैम्पू लगाया था और देर तक नहाता रहा था।
'सोनू भैया।' लड़के के सिर पर गिर रही एक लट को जब वो पीछे कर रहा था तब लड़के ने कहा, 'हूँ... कंघी को टेबल पर रखते हुए कहा सोनू ने। कुछ देर तक लड़का चुप रहा फिर बोला, 'ये प्रेम क्या होता है..?' लड़के के प्रश्न से सोनू कुछ चौंका फिर मुस्कराता हुआ बोला, 'प्रेम...? अभी तीन चार साल रुक जाओ, सब पता चल जाएगा।'
कहते हुए उसने लड़के के बालों को हल्के से बिखरा दिया।
तीन चार साल रुक पाऊँगा मैं...?'
लड़के ने उदासी से पूछा। लड़के के पूछते ही कमरे की हवा रुक गई।
क्या होता है प्रेम सोनू भैय्या...!?' सोनू को चुप देखकर लड़के ने फिर पूछा।
'प्रेम वह होता है जो हमें किसी दूसरे से जोड़ता है।' सोनू ने कुछ टालने वाले अंदाज में कहा।
'किससे?' लड़के ने फिर पूछा।
किसी से भी, उन सबसे जो हमें अच्छे लगते हैं, हमारे माँ-बाप, हमारे भाई-बहन, हमारे दोस्त।' सोनू ने जवाब दिया।
माँ तो मेरे पास नहीं है पापा हैं पर वो भी... भाई बहन भी नहीं हैं।'
कहते-कहते लड़का फिर चुप हो गया। लड़के की आँखें अचानक नम हो गई थीं। सोनू को लगा उसकी पलकों के किनारे झिलमिला भी रहे हैं।
उसने लड़के को सहज करने के लिए कहा, 'और सबसे खास प्रेम हमें किसी एक खास से भी होता है।' सोनू के इतना कहते ही लड़के के चेहरे के भाव अचानक बदल गए, मानो सोनू ने उसके मन की बात कह दी हो।
'कौन खास सोनू भैया?' उसने उत्सुकता से पूछा।
ये जो बाहर चाँद नजर आ रहा है न, आधा अधूरा-सा चाँद, इसको देखकर न तो रात की रानी के फूल झूम रहे हैं न पेड़ों की पत्तियाँ इठला रही हैं। क्योंकि ये सब एक खास चाँद से प्रेम करते हैं। पूर्णमासी के पूरे चाँद से। अभी दो दिन बाद जब ये चाँद पूरा हो जाएगा तब से सब उस खास के प्रेम में पागल हो जाएँगे। सोनू ने उत्तर दिया।
सचमुच? लड़के ने उत्सुकता से फिर पूछा।
हाँ बिल्कुल दिखाऊँगा। सोनू ने उत्तर दिया।
लड़का गौर से खिड़की के पार के चाँद को देखने लगा। उसके चेहरे के भाव पल-पल बदल रहे थे। कुछ देर तक देखते रहने के बाद लड़का फिर उदास हो गया।
तुम्हें मिला कोई खास? सोनू ने लड़के का मूड बदलने के लिए फिर पूछा।
लड़के ने सोनू की तरफ देखा। सोनू ने देखा उन दो नन्ही आँखों में सितारे झिलमिला रहे थे। फिर अचानक वो शरमा गया और चादर के धागे खींचने लगा।
हूँ... मतलब मिली है।' सोनू ने मजाक के अंदाज में पूछा।
'है नहीं थी..।' लड़के ने उसी तरह झुके हुए कहा पर उसकी आवाज डूबी हुई थी।
'कब? सोनू ने पूछा।
जब मैं स्कूल जाता था। लड़के के स्वर में उदासी थी। उसकी आवाज ऐसी थी मानो किसी सुनसान रात में पहाड़ पर लगे पेड़ों पर बर्फ गिर रही हो।
कौन थी..? सोनू ने फिर पूछा।
'मेरे साथ ही पढ़ती थी और मेरे साथ वही होता था जो अभी आपने कहा ना कि पूर्णमासी के चाँद को देखकर पेड़ों को हो जाता है।' लड़के ने धीरे से कहा।
हूँ... खूब बात-वात होती होंगी तब तो उससे।' सोनू ने शरारत के लहज़े में पूछा।
नहीं, बात तो एक बार भी नहीं हुई। लड़के ने सिर उठाकर उत्तर दिया।
अरे..! क्यों? सोनू ने पूछा।
हिम्मत नहीं होती थी और वो भी शायद बात करना नहीं चाहती थी। लड़के की आँखें बुझ गई थीं।
चलो अब जब स्कूल जाना शुरू करो तो सबसे पहले उससे जाकर बात करना और नहीं कर पाओ तो मुझे ले चलना मैं तुम्हारी तरफ से बात कर लूँगा। सोनू ने लड़के के सिर पर हाथ रखते हुए कहा।
क्यों मजाक करते हो सोनू भैय्या, अब कहाँ जा पाऊँगा मैं स्कूल? अब तो शायद मम्मी के पास चला जाऊँगा। कहते हुए लड़के ने सिर पर रखा सोनू का हाथ लेकर गोद में रख लिया और दोनों हाथों में दबा लिया। सोनू ने दूसरे हाथ से लड़के की आँखों में आई नमी को अपनी अँगुलियों में समेटते हुए कहा। लड़के ने कोई उत्तर नहीं दिया उसी तरह लेटा रहा। सोनू उसके बालों को सहलाता रहा। कुछ देर बाद जब उसको लगा कि लड़का सो गया है तो उसने आहिस्ता से लड़के का सिर अपनी गोद से उठाकर तकिये पर रखा उसे चादर ओढ़ाई और आकर अपने पलंग पर लेट गया।
अगले दिन से लड़के की तबीयत बिगड़ने लग गई थी। तेज बुखार में बड़बड़ाता रहता था। सोनू ने सुना कि उसकी बड़बड़ाहट में बार-बार मम्मी शब्द आ रहा है। नर्सिंग होम से कई बार डॉक्टर आकर लड़के को देखकर जा चुके थे।
बुखार के तीसरे दिन जब डॉक्टर सिन्हा लड़के को देखकर वापस जा रहे थे तब सोनू ने पूछा था, कोई डरने की बात तो नहीं है न सर।'
डरने की बात तो है, अब इसे अस्पताल में शिफ्ट करना ही पड़ेगा, ये रिकवर हो ही नहीं पा रहा है। इसके पिता कब तक आ जाएँगे?' डॉक्टर सिन्हा ने कहा था। 'बस शायद परसों तक आ जाएँगे, सर्वेंट बता रहा था कि उनका फोन आया था।' सोनू ने उत्तर दिया।
'ठीक है उनके आते ही इसे शिफ्ट कर देंगे, तब तक ध्यान रखना कुछ भी हो तो तुरंत खबर करना। कहते हुए डॉक्टर सिन्हा चले गए। सोनू आकर लड़के के सिरहाने बैठ गया और धीरे-धीरे उसका सिर दबाने लगा। कुछ देर बाद लड़का कसमसाया और उसने आँखें खोल दीं। सोनू को देखा तो मुस्करा दिया।
'उठ गए, चलो अच्छा किया, शाम भी हो गई है।' सोनू ने कहा।
लड़का कुछ देर तक सोनू को देखता रहा फिर बोला, 'सोनू भैया क्या अब मैं उसको कभी नहीं देख पाऊँगा?'
क्यों नहीं देख पाओगे? मुझे उसका पता, टेलीफोन नंबर दो अभी बुला लेता हूँ।' सोनू ने उत्तर दिया।
वो तो मुझे कुछ भी नहीं पता। लड़के ने उदासी के साथ कहा।
चलो मैं कल स्कूल जाकर पता कर लूँगा और उसको बुला लाऊँगा। सोनू ने लड़के का उत्साह बढ़ाने के लिए कहा। लड़का फिर अचानक बोला, 'सोनू भैया आज पूर्णिमा है ना? आज आपने कुछ दिखाने को कहा था।'
'हाँ भाई दिखा दूँगा रात तो होने दो।'
सोनू भैया मैं अपनी मम्मी को भी देखना चाहता था पर नहीं देख पाया, ये सब मेरे साथ ही..' कहते-कहते लड़का चुप हो गया।
चलो आज दिखा दूँगा जब चाँद पूरा होगा ना तब उसमें तुमको अपनी मम्मी भी दिखेंगी और वो भी। वो सब दिखेंगे, जिनको तुम प्रेम करते हो। सोनू ने कहा।
'सच...।' लड़के ने उत्साह में भरकर कहा।
बिल्कुल सच! सोनू ने उत्तर दिया।
पर मैं उनको छू तो नहीं पाऊँगा न?' लड़का फिर उदास हो गया।
क्यों नहीं छू पाओगे? जब चाँद को देखो तो मेरी इस हथेली को छू लेना तुमको ऐसा लगेगा कि तुम उन सबको छू रहे हो जिनको तुम प्रेम करते हो। सोनू ने अपनी हथेली दिखाते हुए कहा।
ठीक है। लड़का फिर उत्साह में भर गया।
पर देखो जब चाँद में तुम्हारी वो खास नजर आए तो उसे देखकर शरमा मत जाना।
सोनू ने लड़के की कमर में गुदगुदी करते हुए कहा लड़का खिलखिला उठा।
रात को लड़का सोनू ने गोद में उठाकर खिड़की पर बैठा दिया था क्योंकि तब उसके चलने-फिरने की ताकत बिल्कुल क्षीण हो गई थी।
'देखो वो पूरा पील चाँद।' अमलतास के दो पेड़ों के ऊपर दिख रहे चाँद की ओर इशारा करते हुए सोनू ने कहा। लड़के ने सिर उठा कर चाँद को देखा।
'देखो उसमें अपनी मम्मी को। दिख रही हैं ना? सोनू ने पूछा, लड़के ने हाँ में सिर हिलाया।
ठीक है अब आँखें बंद करके मेरी इस हथेली को छुओ। सोनू के कहते ही लड़के ने वैसा ही किया। थोड़ी देर बाद लड़के ने हथेली को खींचकर अपने चेहरे से सटा लिया। कुछ ही देर में सोनू की हथेली भीग गई।
सोनू ने लड़के की आँखें पोंछीं और फिर कहा, चलो अब फिर देखो चाँद को, अब वो दिखेगी। लड़के ने फिर चाँद को देखा।
दिखी? सोनू ने पूछा। लड़के ने फिर हाँ में सिर हिलाया और आँखें बंद कर लीं और सोनू की हथेली को फिर चेहरे से लगा लिया। अबकी बार सोनू को हथेली पर नमी की जगह आँच का एहसास हुआ लड़के की गर्म साँसों की आँच का एहसास। आँच धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। बढ़ते-बढ़ते अचानक एकदम ठंडी हो गई और हथेली पर साँसों के टकराने का एहसास भी बंद हो गया। सोनू ने देखा दूर आसमान पर एक सितारा टूटा और रोशनी की लकीर छोड़ता हुआ चाँद की तरफ बढ़ा। चाँद के ठीक पास आकर वो सितारा बुझ गया मानो चाँद को छूकर खामोश हो गया हो।
सोनू ने आहिस्ता से लड़के का चेहरा हथेली पर से हटाया, लड़का उसकी बाँहों में झूल गया। हवा बिल्कुल ठहर गई थी मगर रात रानी के छोटे-छोटे फूल चुपचाप आँसुओं की तरह टप-टप करके जमीन पर टपक रहे थे।
तेंडुलकर का दोहरा शतक
प्रश्न : दद्दू, महान सचिन तेंडुलकर ने 24 फरवरी 2010 को दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध ग्वालियर वन डे क्रिकेट मैच में वन डे इतिहास का पहला दोहरा शतक लगाया। इस विश्व रिकार्ड को बनाने में उन्हें इतनी देर क्यों लगी?
उत्तर- क्योंकि इसके पहले वे कई बार अंपायरों के गलत फैसलों का शिकार होकर आउट हो गए थे।
प्रश्न : दद्दू, महान सचिन तेंडुलकर ने 24 फरवरी 2010 को दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध ग्वालियर वन डे क्रिकेट मैच में वन डे इतिहास का पहला दोहरा शतक लगाया। इस विश्व रिकार्ड को बनाने में उन्हें इतनी देर क्यों लगी?
उत्तर- क्योंकि इसके पहले वे कई बार अंपायरों के गलत फैसलों का शिकार होकर आउट हो गए थे।
पर्यटन
कला-शिल्प का अद्भुत संगम : खजुराहो
खजुराहो के मंदिर भारतीय कला का एक उत्कृष्ट नमूना है। इन मंदिरों की दीवारों पर उकरी देवी-देवताओं की विभिन्न मुद्राओं की मनोहारी प्रतिमा अपने आप में दुलर्भ है, जिसके समान कोई ओर नहीं है। मध्यप्रदेश में स्थित खजुराहो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
हर साल लाखों की संख्या में देशी व विदेशी पर्यटक खजुराहों आते हैं व यहाँ की खूबसूरती को अपनी स्मृति में कैद करके ले जाते हैं। यहाँ शाम के वक्त होने वाले लाइट शो में खजुराहो के मंदिरों की खूबसूरती का चरम देखने को मिलता है, जो एक यादगार व अविस्मरणीय अनुभव होता है।
भारतीय कला व संस्कृति के संगम स्थल खजुराहों के आसपास भी कई ऐसे स्थान है, जो आपकी खजुराहो यात्रा को पूर्णता प्रदान करते हैं। इनमें खजुराहो से 25 किमी दूर स्थित राजगढ़ पैलेस (हैरिटेज होटल), रंगून झील (पिकनिक स्पॉट), पन्ना राष्ट्रीय उद्यान आदि स्थल है।
खजुराहो को प्यार का प्रतीक भी कहा जाता है। यहाँ काम मुद्रा में मग्न देवताओं की भी मूर्तियाँ है, जो अश्लीलता नहीं बल्कि सौंदर्य और प्यार की प्रतीक हैं। प्यार के साक्षी इन्हीं मंदिरों में प्रतिवर्ष कई जोड़े परिणय सूत्र में बँधकर अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं।
खजुराहो एक पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ मंदिरों के गाँव के रूप में भी विख्यात है। यहाँ के मंदिर लगभग 1000 सालों से भी अधिक पुराने हैं, जिन्हें मध्यभारत के चंदेल राजपूत राजाओं ने बनवाया था।
वर्तमान में प्राचीन 85 मंदिरों में से मात्र 22 मंदिर ही सुरक्षित बचे हैं। शेष मंदिर आज खंडहर के रूप में तब्दील होकर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिर पूर्वी, पश्चिमी व दक्षिणी आदि तीन भागों में विभाजित हैं।
पश्चिमी भाग के मंदिर :-
खजुराहो में पश्चिमी भाग के मंदिरों में प्रमुख मंदिर कंडरिया महादेव मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर (ग्रेनाइट से बना सुंदर मंदिर), काली माँ का मंदिर, देवी जगदंबा मंदिर आदि प्रमुख हैं। इन मंदिरों के उत्तर में चित्रगुप्त मंदिर (सूर्य देवता का मंदिर), विश्वनाथन मंदिर (तीन मुखी ब्रह्मा की प्रतिमा तथा 6 फीट ऊँची नंदी प्रतिमा), मटंगेश्वर मंदिर (8 फीट ऊँचा शिवलिंग) आदि स्थित है।
मंदिरों में स्थित प्रतिमाओं की जर्जर स्थिति को देखते हुए इनमें से कई मंदिरों में पूजा करना प्रतिबंधित है। इनमें से केवल ममटंगेश्वर मंदिर में ही अब तक पूजा करना जारी है।
पूर्वी भाग के मंदिर :-
इस भाग में हिंदू व जैन दोनों के देवी-देवताओं की दुर्लभ प्रतिमाएँ स्थित हैं। मंदिरों का यह भाग खजुराहो गाँव के समीप स्थित है। पूर्वी भाग का सबसे बड़ा मंदिर जैन तीर्थंकर 'भगवान पार्श्वनाथ जी का मंदिर' है। इसके बाद दूसरा जैन मंदिर 'घाटी मंदिर' है। इस मंदिर के उत्तर में 'आदिनाथ मंदिर' हैं। मंदिरों के इस समूह में ब्रह्मा, वामन आदि हिंदू देवताओं के मंदिर भी शोभायमान है।
दक्षिणी भाग के मंदिर :-
मंदिरों का यह समूह खजुराहो गाँव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इनमें सबसे अच्छा मंदिर 'चित्रभुज मंदिर' है। इस भाग के मंदिरों से कुछ दूरी पर सड़क के उस पार जैन मंदिरों का एक समूह है, जिनमें कई जैन तीर्थंकरों के सुंदर व आकर्षक मंदिर है।
खजुराहो के आसपास :-
भारतीय कला व संस्कृति के संगम स्थल खजुराहों के आसपास भी कई ऐसे स्थान है, जो आपकी खजुराहो यात्रा को पूर्णता प्रदान करते हैं। इनमें खजुराहो से 25 किमी दूर स्थित राजगढ़ पैलेस (हैरिटेज होटल), रंगून झील (पिकनिक स्पॉट), पन्ना राष्ट्रीय उद्यान (34 किमी दूर) आदि रमणीय स्थल हैं।
भारत की इस विरासत को देखना मात्र ही अपने आप में भारतीय कला से रूबरू होना है, जो अपने आप में अनूठी है, प्राचीन है व गौरवशाली है। आप भी मंदिरों के इस गाँव की सुंदरता को निहारने एक बार अवश्य खजुराहों जाएँ।
ऐतिहासिक स्थलों की नगरी शिवपुरी
हल्की-हल्की बूँदों की वर्षा हो रही थी। प्रभात ने घने काले बादल की चुनरी ओढ़ रखी थी। सखियों के साथ मैं टाटा सफारी में सवार होकर आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर जा रही थी कि हमें एक ढाबा खुला दिखाई दिया। प्रातः पाँच बजे थे, मन कर रहा था कि हमें गरमागरम चाय मिल जाए तो सफर तय करना और भी आसान हो जाएगा।
गाड़ी ढाबे के पास रुकी, हमारी नज़र कोयले की आँच पर बन रही चाय से निकलते धुएँ पर पड़ी एवं उसके साथ-साथ नाश्ते के लिए बाजरे की रोटी तथा सब्जी मिली। ढाबे के चारों ओर हरियाली नज़र आ रही थी, रंग-बिरंगे महुए एवं पलास के फूल खिले हुए थे जिन पर वर्षा की बूँदें मोती की तरह चमक रही थीं।
इंदौर से शिवपुरी तक का सफर हम लगभग तय कर चुके थे। गुना क्षेत्र से हम गुजरते हुए शिवपुरी ज़िले में पहुँचे। हमारी नज़र यहाँ के पहा़डों पर पड़ी, जिन पर हरियाली थी एवं घने जंगल स्थित थे। वादियों के मध्य प्रकृति की गोद से झरने बह रहे थे एवं उठती सूर्य की किरणों के प्रकाश में वे झिलमिलाते, बलखाते हुए नदियों की ओर बह रहे थे।
गुना जिले से हम जब शिवपुरी नगर की ओर गाड़ी में सफर कर रहे थे तब हमने देखा कि सिंध नदी गुना से उत्तर दिशा से बहती हुई भिड़ से चंबल नदी से जा मिलती है। शिवपुरी की चार मुख्य नदियाँ हैं सिंध, कूनो, बेतवा एवं पार्वती।
कहते हैं कि शिवपुरी का माधव नेशनल पार्क, विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है। मुख्य रूप से नहार बाघ, तेंदुआ, लक्कड़ बग्घा, तरक्षु, भालू, सांभर आदि जानवर यहाँ पर पाए जाते हैं। वर्षा के आने से मोर अपने रंग-बिरंगे पंख को फैला देते हैं। उपस्थित जनता खूबसूरत दृश्य की प्रशंसा करने लगी तथा कैमरे से छायाचित्र लेने लगी। नेशनल पार्क में पक्षी एवं जानवरों का हमने जीवंत रूप देखा। माधव विलास महल में सिंधिया राजवंश ग्रीष्म काल के समय निवास करते थे। वन वाटिका के मध्य स्थित यह महल गुलाब के फूल के समान प्रतीत हो रहा था। महल के भीतर कला की सुंदर मूर्तियाँ प्रदर्शित थीं। सुंदर आकृतियों वाले महल की छत से शिवपुरी नगर एवं माधव नेशनल पार्क नजर आते हैं। खूबसूरत चित्रकला से महल के विभिन्न कक्षों को सजाया गया था। अब यह महल भारत सरकार के अधीन है।
शिवपुरी में पर्यटक महाराजा एवं राजकुमारों द्वारा बनाई गई छतरियों को देखने आते हैं। इस ऐतिहासिक स्थल पर विभिन्न गाथाएँ एवं प्राचीन कहानियाँ सुन सकते हैं। ये छतरियाँ संगमरमर की हैं एवं इन पर सुंदर आकृतियाँ उकेरी गई हैं। सिंधिया राजकुमारों ने इन्हें मुगल वाटिका में स्थापित किया था। इस स्थान पर माधवराव सिंधिया की छतरी स्थित है उसी तरह महारानी सँख्याराजे सिंधिया की सुंदर छतरी भी है। हिंदू एवं इस्लामी के वास्तुशिल्पीय मिश्रित रूप नजर आते हैं। राजपूत एवं मुगल परम्पराओं के वास्तुशिल्पीय को रूपांतर करती कला दर्शकों को अपनी ओर आकृष्ट करती है।
ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने में काफी देर हो गई थी। सूरज ढलने वाला था कि हमारी दृष्टि जॉर्ज किले की ओर आकर्षित हुई। सँख्या सागर के तट पर स्थित इस किले को जीवाजीराव सिंधिया ने निर्मित किया था।
ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने में काफी देर हो गई थी। सूरज ढलने वाला था कि हमारी दृष्टि जॉर्ज किले की ओर आकर्षित हुई। सँख्या सागर के तट पर स्थित इस किले को जीवाजीराव सिंधिया ने निर्मित किया था। परंतु इस किले की एक विशेषता है जो अक्सर आम किलों के स्थान पर देखी नहीं जाती, वह यह है कि यह महल माधव नेशनल पार्क के अंदर स्थित है। इसलिए महल की सुंदरता और निखर उठती है जब किले के चारों ओर घने जंगल स्थित हैं।
प्राचीन महलों एवं प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों के दर्शन कर जब हम वापस लौट रहे थे तब हमने वहाँ के स्थानीय रंगमंच एवं लोकगीत सुने जो आदिवासी लोगों ने पात्रों के माध्यम से दर्शाए थे। कार्यक्रम के अंत में हम होटल वापस लौट आए।
खजुराहो के मंदिर भारतीय कला का एक उत्कृष्ट नमूना है। इन मंदिरों की दीवारों पर उकरी देवी-देवताओं की विभिन्न मुद्राओं की मनोहारी प्रतिमा अपने आप में दुलर्भ है, जिसके समान कोई ओर नहीं है। मध्यप्रदेश में स्थित खजुराहो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
हर साल लाखों की संख्या में देशी व विदेशी पर्यटक खजुराहों आते हैं व यहाँ की खूबसूरती को अपनी स्मृति में कैद करके ले जाते हैं। यहाँ शाम के वक्त होने वाले लाइट शो में खजुराहो के मंदिरों की खूबसूरती का चरम देखने को मिलता है, जो एक यादगार व अविस्मरणीय अनुभव होता है।
भारतीय कला व संस्कृति के संगम स्थल खजुराहों के आसपास भी कई ऐसे स्थान है, जो आपकी खजुराहो यात्रा को पूर्णता प्रदान करते हैं। इनमें खजुराहो से 25 किमी दूर स्थित राजगढ़ पैलेस (हैरिटेज होटल), रंगून झील (पिकनिक स्पॉट), पन्ना राष्ट्रीय उद्यान आदि स्थल है।
खजुराहो को प्यार का प्रतीक भी कहा जाता है। यहाँ काम मुद्रा में मग्न देवताओं की भी मूर्तियाँ है, जो अश्लीलता नहीं बल्कि सौंदर्य और प्यार की प्रतीक हैं। प्यार के साक्षी इन्हीं मंदिरों में प्रतिवर्ष कई जोड़े परिणय सूत्र में बँधकर अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं।
खजुराहो एक पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ मंदिरों के गाँव के रूप में भी विख्यात है। यहाँ के मंदिर लगभग 1000 सालों से भी अधिक पुराने हैं, जिन्हें मध्यभारत के चंदेल राजपूत राजाओं ने बनवाया था।
वर्तमान में प्राचीन 85 मंदिरों में से मात्र 22 मंदिर ही सुरक्षित बचे हैं। शेष मंदिर आज खंडहर के रूप में तब्दील होकर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिर पूर्वी, पश्चिमी व दक्षिणी आदि तीन भागों में विभाजित हैं।
पश्चिमी भाग के मंदिर :-
खजुराहो में पश्चिमी भाग के मंदिरों में प्रमुख मंदिर कंडरिया महादेव मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर (ग्रेनाइट से बना सुंदर मंदिर), काली माँ का मंदिर, देवी जगदंबा मंदिर आदि प्रमुख हैं। इन मंदिरों के उत्तर में चित्रगुप्त मंदिर (सूर्य देवता का मंदिर), विश्वनाथन मंदिर (तीन मुखी ब्रह्मा की प्रतिमा तथा 6 फीट ऊँची नंदी प्रतिमा), मटंगेश्वर मंदिर (8 फीट ऊँचा शिवलिंग) आदि स्थित है।
मंदिरों में स्थित प्रतिमाओं की जर्जर स्थिति को देखते हुए इनमें से कई मंदिरों में पूजा करना प्रतिबंधित है। इनमें से केवल ममटंगेश्वर मंदिर में ही अब तक पूजा करना जारी है।
पूर्वी भाग के मंदिर :-
इस भाग में हिंदू व जैन दोनों के देवी-देवताओं की दुर्लभ प्रतिमाएँ स्थित हैं। मंदिरों का यह भाग खजुराहो गाँव के समीप स्थित है। पूर्वी भाग का सबसे बड़ा मंदिर जैन तीर्थंकर 'भगवान पार्श्वनाथ जी का मंदिर' है। इसके बाद दूसरा जैन मंदिर 'घाटी मंदिर' है। इस मंदिर के उत्तर में 'आदिनाथ मंदिर' हैं। मंदिरों के इस समूह में ब्रह्मा, वामन आदि हिंदू देवताओं के मंदिर भी शोभायमान है।
दक्षिणी भाग के मंदिर :-
मंदिरों का यह समूह खजुराहो गाँव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इनमें सबसे अच्छा मंदिर 'चित्रभुज मंदिर' है। इस भाग के मंदिरों से कुछ दूरी पर सड़क के उस पार जैन मंदिरों का एक समूह है, जिनमें कई जैन तीर्थंकरों के सुंदर व आकर्षक मंदिर है।
खजुराहो के आसपास :-
भारतीय कला व संस्कृति के संगम स्थल खजुराहों के आसपास भी कई ऐसे स्थान है, जो आपकी खजुराहो यात्रा को पूर्णता प्रदान करते हैं। इनमें खजुराहो से 25 किमी दूर स्थित राजगढ़ पैलेस (हैरिटेज होटल), रंगून झील (पिकनिक स्पॉट), पन्ना राष्ट्रीय उद्यान (34 किमी दूर) आदि रमणीय स्थल हैं।
भारत की इस विरासत को देखना मात्र ही अपने आप में भारतीय कला से रूबरू होना है, जो अपने आप में अनूठी है, प्राचीन है व गौरवशाली है। आप भी मंदिरों के इस गाँव की सुंदरता को निहारने एक बार अवश्य खजुराहों जाएँ।
ऐतिहासिक स्थलों की नगरी शिवपुरी
हल्की-हल्की बूँदों की वर्षा हो रही थी। प्रभात ने घने काले बादल की चुनरी ओढ़ रखी थी। सखियों के साथ मैं टाटा सफारी में सवार होकर आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर जा रही थी कि हमें एक ढाबा खुला दिखाई दिया। प्रातः पाँच बजे थे, मन कर रहा था कि हमें गरमागरम चाय मिल जाए तो सफर तय करना और भी आसान हो जाएगा।
गाड़ी ढाबे के पास रुकी, हमारी नज़र कोयले की आँच पर बन रही चाय से निकलते धुएँ पर पड़ी एवं उसके साथ-साथ नाश्ते के लिए बाजरे की रोटी तथा सब्जी मिली। ढाबे के चारों ओर हरियाली नज़र आ रही थी, रंग-बिरंगे महुए एवं पलास के फूल खिले हुए थे जिन पर वर्षा की बूँदें मोती की तरह चमक रही थीं।
इंदौर से शिवपुरी तक का सफर हम लगभग तय कर चुके थे। गुना क्षेत्र से हम गुजरते हुए शिवपुरी ज़िले में पहुँचे। हमारी नज़र यहाँ के पहा़डों पर पड़ी, जिन पर हरियाली थी एवं घने जंगल स्थित थे। वादियों के मध्य प्रकृति की गोद से झरने बह रहे थे एवं उठती सूर्य की किरणों के प्रकाश में वे झिलमिलाते, बलखाते हुए नदियों की ओर बह रहे थे।
गुना जिले से हम जब शिवपुरी नगर की ओर गाड़ी में सफर कर रहे थे तब हमने देखा कि सिंध नदी गुना से उत्तर दिशा से बहती हुई भिड़ से चंबल नदी से जा मिलती है। शिवपुरी की चार मुख्य नदियाँ हैं सिंध, कूनो, बेतवा एवं पार्वती।
कहते हैं कि शिवपुरी का माधव नेशनल पार्क, विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है। मुख्य रूप से नहार बाघ, तेंदुआ, लक्कड़ बग्घा, तरक्षु, भालू, सांभर आदि जानवर यहाँ पर पाए जाते हैं। वर्षा के आने से मोर अपने रंग-बिरंगे पंख को फैला देते हैं। उपस्थित जनता खूबसूरत दृश्य की प्रशंसा करने लगी तथा कैमरे से छायाचित्र लेने लगी। नेशनल पार्क में पक्षी एवं जानवरों का हमने जीवंत रूप देखा। माधव विलास महल में सिंधिया राजवंश ग्रीष्म काल के समय निवास करते थे। वन वाटिका के मध्य स्थित यह महल गुलाब के फूल के समान प्रतीत हो रहा था। महल के भीतर कला की सुंदर मूर्तियाँ प्रदर्शित थीं। सुंदर आकृतियों वाले महल की छत से शिवपुरी नगर एवं माधव नेशनल पार्क नजर आते हैं। खूबसूरत चित्रकला से महल के विभिन्न कक्षों को सजाया गया था। अब यह महल भारत सरकार के अधीन है।
शिवपुरी में पर्यटक महाराजा एवं राजकुमारों द्वारा बनाई गई छतरियों को देखने आते हैं। इस ऐतिहासिक स्थल पर विभिन्न गाथाएँ एवं प्राचीन कहानियाँ सुन सकते हैं। ये छतरियाँ संगमरमर की हैं एवं इन पर सुंदर आकृतियाँ उकेरी गई हैं। सिंधिया राजकुमारों ने इन्हें मुगल वाटिका में स्थापित किया था। इस स्थान पर माधवराव सिंधिया की छतरी स्थित है उसी तरह महारानी सँख्याराजे सिंधिया की सुंदर छतरी भी है। हिंदू एवं इस्लामी के वास्तुशिल्पीय मिश्रित रूप नजर आते हैं। राजपूत एवं मुगल परम्पराओं के वास्तुशिल्पीय को रूपांतर करती कला दर्शकों को अपनी ओर आकृष्ट करती है।
ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने में काफी देर हो गई थी। सूरज ढलने वाला था कि हमारी दृष्टि जॉर्ज किले की ओर आकर्षित हुई। सँख्या सागर के तट पर स्थित इस किले को जीवाजीराव सिंधिया ने निर्मित किया था।
ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने में काफी देर हो गई थी। सूरज ढलने वाला था कि हमारी दृष्टि जॉर्ज किले की ओर आकर्षित हुई। सँख्या सागर के तट पर स्थित इस किले को जीवाजीराव सिंधिया ने निर्मित किया था। परंतु इस किले की एक विशेषता है जो अक्सर आम किलों के स्थान पर देखी नहीं जाती, वह यह है कि यह महल माधव नेशनल पार्क के अंदर स्थित है। इसलिए महल की सुंदरता और निखर उठती है जब किले के चारों ओर घने जंगल स्थित हैं।
प्राचीन महलों एवं प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों के दर्शन कर जब हम वापस लौट रहे थे तब हमने वहाँ के स्थानीय रंगमंच एवं लोकगीत सुने जो आदिवासी लोगों ने पात्रों के माध्यम से दर्शाए थे। कार्यक्रम के अंत में हम होटल वापस लौट आए।
मिर्च-मसाला
आसान नहीं है कॉमेडी : दीपिका
दीपिका पादुकोण का कहना है कि कॉमेडी करना बहुत मुश्किल है और इसके लिए सही टाइमिंग और मेहनत की जरूरत होती है। आने वाली फिल्म ‘हाउसफुल’ में वे कॉमेडी करती हुई नजर आएँगी।
कई एक्टर्स का कहना है कि कॉमेडी रोल निभाना आसान नहीं है और दीपिका की भी यही राय है। ‘हाउसफुल’ की तारीफ करते हुए दीपिका का कहना है कि इस फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जिन्हें करते हुए कलाकारों को हँसी रोकना मुश्किल हो गया था। बड़ी मुश्किल से उन्होंने इन दृश्यों की शूटिंग की।
‘हाउसफुल’ के डायरेक्टर साजिद खान के बारे में दीपिका बताती हैं कि उनकी फिल्म की शूटिंग करना पिकनिक जैसा है। सेट पर किसी किस्म का तनाव नहीं रहता था और शूटिंग के दौरान सभी कलाकारों ने खूब धमाल मचाई। दीपिका के अलावा ‘हाउसफुल’ में लारा दत्ता और जिया खान भी हैं।
दीपिका पादुकोण का कहना है कि कॉमेडी करना बहुत मुश्किल है और इसके लिए सही टाइमिंग और मेहनत की जरूरत होती है। आने वाली फिल्म ‘हाउसफुल’ में वे कॉमेडी करती हुई नजर आएँगी।
कई एक्टर्स का कहना है कि कॉमेडी रोल निभाना आसान नहीं है और दीपिका की भी यही राय है। ‘हाउसफुल’ की तारीफ करते हुए दीपिका का कहना है कि इस फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जिन्हें करते हुए कलाकारों को हँसी रोकना मुश्किल हो गया था। बड़ी मुश्किल से उन्होंने इन दृश्यों की शूटिंग की।
‘हाउसफुल’ के डायरेक्टर साजिद खान के बारे में दीपिका बताती हैं कि उनकी फिल्म की शूटिंग करना पिकनिक जैसा है। सेट पर किसी किस्म का तनाव नहीं रहता था और शूटिंग के दौरान सभी कलाकारों ने खूब धमाल मचाई। दीपिका के अलावा ‘हाउसफुल’ में लारा दत्ता और जिया खान भी हैं।
गुरुवार, 4 मार्च 2010
खबर-संसार
बढ़ रहे हैं माइग्रेन के युवा मरीज
माइग्रेन के युवा मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार करीब 10 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में माइग्रेन से पीड़ित है। स्पेशलिस्ट के अनुसार इसके बढ़ने का कारण शुरुआत में ही युवा मरीजों का इस पर ज्यादा ध्यान न देना है। जब तक प्रॉब्लम बढ़ नहीं जाती माइग्रेन से पीड़ित युवा मरीज डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं और इसे सामान्य सिरदर्द ही समझते रहते हैं। इससे उनकी प्रॉब्लम बढ़ती जाती है।
वास्तव में मॉर्डन लाइफ स्टाइल अपना असर दिखाने लगी है। भागमभाग भरी जिंदगी, लेट नाइट स्लीपिंग, देर से उठना, असमय खाना और बढ़ते टेंशन आदि जैसे कई कारणों से माइग्रेन के युवा मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सावधानी न रखने से यह गंभीर भी हो सकता है। अस्पतालों में प्रति माह 100 से अधिक युवा मरीज माइग्रेन के पहुँचते हैं। न्यूरोलोजिस्ट के अनुसार अस्पताल में मरीज तभी पहुँचते हैं जब स्थिति बिगड़ जाती है। माइग्रेन की शुरुआती स्थिति में ही यदि एक्सपर्ट से मिल लिया जाए तो इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। बाद में ठीक होने में इसे थोड़ा समय लगता है।
माइग्रेन रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड नर्व्स के फैलने और उनसे कुछ केमिकल निकलने के कारण होता है। कुछ खास कारण इसे प्रेरित करते हैं। माइग्रेन की 4 स्टेज रहती हैं- प्रोडोम, ऑरा, हैडेक और पोस्टड्रोम। खास बात यह है कि माइग्रेन युवाओं में ज्यादा पाया जाता है। आजकल दवाओं से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसकी अलग-अलग स्टेज के आधार पर ही इसे पूरी तरह ठीक होने में लगने वाला समय भी अलग-अलग होता है।
माइग्रेन के लक्षण
आधे सिर में दर्द होना और धीरे-धीरे बढ़ते जाना।
सिरदर्द के साथ उल्टी की इच्छा होना या उल्टी होना।
सिरदर्द के साथ डायरिया होना।
धीरे-धीरे आँखों के सामने अंधेरा छा जाना। कुछ चीजें धुँधली दिखाई देना।
सिरदर्द के पहले भी आलस्य, नींद आना, भूख न लगना, ध्वनि का चुभना जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं।
माइग्रेन से कैसे बचें
प्रतिदिन सोने और जागने का समय निश्चित करें। कोशिश करें कि रात में जल्दी सोएँ और सुबह जल्दी जागें।
समय पर भोजन करें। लंबे समय तक उपवास न रखें।
केफीन का सेवन कम करने के लिए कॉफी और चाय का सेवन कम करें।
तेज प्रकाश से बचें।
माइग्रेन को प्रेरित करने वाली चीजों को पहचानें और उनसे बचें।
व्यायाम और योगा को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएँ।
तनाव कम करने के लिए रिलेक्सेशन तकनीकों का उपयोग करें।
दिमाग को तेज बनाता है इंटरनेट
इंटरनेट का सही इस्तेमाल इंसानी दिमाग को और तेज बना सकता है। अमेरिकी प्रांत उत्तरी कैरोलीना के एलान विश्वविद्यालय के इमेजिनिंग इंटरनेट सेंटर और प्यू इंटरनेट तथा अमेरिकन लाइफ प्रोजेक्ट की ओर से कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है।
सर्वे में शामिल 395 इंटरनेट यूजर्स और एक्सपर्ट्स में से तीन चौथाई से ज्यादा ने माना है कि इंटरनेट के इस्तेमाल से लोगों के दिमाग को तेज किया जा सकता है। इमेजिंग इंटरनेट सेंटर की निदेशक जेना एंडरसन ने बताया कि सर्वे में शामिल अधिकतर युवाओं ने माना कि इंटरनेट 2020 तक पढ़ने और लिखने की इंसानी क्षमता को बढ़ा देगा।
उन्होंने कहा कि चार में से तीन एक्सपर्ट्स के अनुसार इंटरनेट के प्रयोग से मनुष्य की इंटेलिजेंस को बढ़ाया जा सकता है और दो तिहाई लोगों ने माना कि इंटरनेट लिखने-पढ़ने और ज्ञान में वृद्धि करता है। हालाँकि सर्वे में शामिल 21 प्रतिशत युवाओं ने यह भी माना कि इंटरनेट का बहुत अधिक इस्तेमाल करने वालों पर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है और उनके जनरल नॉलेज का लेवल घट सकता है। एंडरसन ने कहा कि अब भी कई लोग ऐसे हैं जो ऑनलाइन सर्च इंजनों का विरोध करते हैं।
ज्यादा टीवी देखने से उम्र होगी कम
टेलीविजन के आगे घंटों बैठने वाले युवाओं को सावधान होने की जरूरत है। लगातार टीवी देखने से आपकी उम्र घट सकती है। ऑस्ट्रेलिया के बेकर आईडीआई हार्ट और डायबिटीज इंस्टीट्यूट के रिसर्च में यह परिणाम निकला है। इस स्टडी में करीब 8,800 युवाओं के डेली रूटीन पर नजर रखी और पाया कि लगातार बैठकर टीवी देखने से युवाओं में हार्ट डीसिज का खतरा बढ़ जाता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के न्यूज लेटर में पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार रोजाना घंटों टीवी देखने से युवाओं में दिल के रोग बढ़ रहे हैं। टीवी के घातक इफेक्ट तेजी से फैल रहे हैं। इससे कम उम्र में हार्ट डीसिज से मरने की संभावना 18 प्रतिशत, जबकि कैंसर जैसी बीमारी के शिकार होने की संभावना 9 प्रतिशत बढ़ जाती है।
दो घंटे से कम टीवी देखने वाले युवाओं का कम्पैरिजन में चार घंटों से ज्यादा टीवी देखने वाले युवाओं से करने पर यह पाया गया कि ज्यादा टीवी देखने वाले 46 प्रतिशत युवा की किसी भी बीमारी से जल्दी मौत होती है, जबकि हार्ट डीसिज से होने वाली मौतों का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि हार्ट डीसिज और अन्य मौतों के पीछे सिगरेट पीना, हाई ब्लड प्रैशर, इम्बैलेंस्ड डाइट, अनियमित लाइफस्टाइल जैसे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन यह स्टडी लगातार टीवी देखने वालों पर फोकस्ड था और उसमें यह तथ्य उभर कर आया कि लगातार बैठे रहने से फिर चाहे वो टेबल कुर्सी में बैठना हो या कम्प्यूटर या फिर टीवी पर इससे सेहत संबंधी विकार पैदा हो जाते हैं। शोधकर्ता डेविड डनस्टॉन के अनुसार मानव का शरीर चलने फिरने के लिए बना है लगातार बैठे रहने के लिए नहीं।
तकनीकी, सोशल और फाइनेंशियल चैंजेस का मतलब है कि मनुष्य की मांसपेशियाँ पर्याप्त काम नहीं कर रही है। प्रतिदिन जितनी एनर्जी खर्च होनी चाहिए वह नहीं होने से आयु भी कम हो रही है। डनस्टॉन के मुताबिक यह बातें सिर्फ ज्यादा वजन वाले या मोटे लोगों पर ही लागू नहीं है, बल्कि स्वस्थ युवाओं के लिए भी है।
स्वस्थ व्यक्ति के भी लगातार बैठे रहने से उसके शुगर फैट्स और ब्लड फैट्स पर बुरा असर पड़ता है। इस रिसर्च में 25 वर्ष और अधिक आयु के 3846 युवा और 4954 युवा महिलाओं का ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट किया गया और उनके ब्लड टेस्ट से कोलेस्ट्राल और ब्लड शुगर के लेवल की जाँच की गई। इन सभी युवाओं से उनकी टीवी देखने संबंधी आदतों की जानकारी भी ली गई।
लारा दत्ता : प्यार किया तो डरना क्या
लारा दत्ता और टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति की नजदीकियों के बारे में हमेशा चर्चा होती है, लेकिन लारा इससे साफ मुकर जाती थी। वो मेरा दोस्त है, जैसे रटे रटाए बयान वे देती थी। लेकिन लारा ने अब सोच लिया है कि प्यार किया तो डरना क्या, इसलिए पिछले दिनों वे सार्वजनिक रूप से महेश भूपति के साथ नजर आईं। फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह में दोनों कपल की तरह साथ आए और साथ बैठकर उन्होंने कार्यक्रम का आनंद लिया।
केली दोरजी से लारा का वर्षों तक रोमांस चला। ब्रेकअप के बाद डीनो से कुछ समय तक उनका नाम जोड़ा गया, लेकिन बाद में महेश भूपति, लारा की जिंदगी में आ गए।
जहाँ तक करियर का सवाल है तो ‘ब्लू’ की असफलता को लारा भूला चुकी हैं और उनकी निगाहें अब ‘हाउसफुल’ पर लगी हुई हैं। इसमें भी लारा के साथ अक्षय कुमार हैं। फिल्म से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दीपिका पादुकोण और जिया खान के फिल्म में होने के बावजूद लारा उनसे ज्यादा सेक्सी फिल्म में नजर आ रही हैं।
राहुल महाजन किससे शादी करेंगे
कौन बनेगी मिसेस महाजन?
हरप्रीत छाबड़ा, डिम्पी गाँगुली और निकुंज मलिक में से किसी एक को राहुल महाजन अपनी दुल्हनियाँ बनाने वाले हैं और निर्णय लेने के लिए उनके पास कुछ घंटों का समय शेष है।
कौन बनेगी मिसेस महाजन? उम्मीद है कि राहुल ने अब तक इसका जवाब खोज लिया होगा। ‘राहुल दुल्हनियाँ ले जाएगा’ कार्यक्रम के जरिए उन्होंने कई लड़कियों को इस कसौटी पर परखा कि क्या वे उनकी जीवन-संगिनी बनने लायक है।हरप्रीत, डिम्पी और निकुंज को राहुल ने नजदीकी से जाना। उनके घरवालों से मिले। अपने परिवार से मिलवाया। ऑन स्क्रीन पर हम वही देखते हैं जो दिखाया जाता है। ऑफ स्क्रीन भी बहुत कुछ ऐसा घटता है, जिससे राहुल को इन्हें परखने में मदद मिली होगी। आखिर राहुल किसे चुनेंगे? दिल्ली की हरप्रीत सुंदर हैं। मासूम हैं। कम उम्र में ही परिपक्व बातें करती हैं। एक सीधी लकीर पर अब तक वे चली हैं। बुराई करने और विवादों से दूर रहना उन्हें पसंद है। क्या हरप्रीत की यह सादगी से राहुल प्रभावित होंगे?
कोलकाता की डिम्पी गाँगुली बेहद चंचल है। जो दिल पर है वो उसकी जुबाँ पर है। उनका दिल एकदम साफ है। राहुल कार्यक्रम शुरू होने के पहले कह चुके हैं कि बंगाली संस्कृति और लोग उन्हें पसंद है। क्या बंगाल की डिम्पी का जादू उन पर चलेगा?
निकुंज मलिक को जो सही लगता है उसे कहने से वे घबराती नहीं हैं। कम बोलने वाली निकुंज उम्र में अन्य दोनों लड़कियों से बड़ी हैं। उनमें एक किस्म की अकड़ है। अपने विचारों को वे छिपाती नहीं हैं, व्यक्त कर देती हैं। क्या निकुंज की खामोशी के अर्थ को राहुल समझेंगे? 6 मार्च की शाम को इसका जवाब मिल जाएगा। राहुल अनेक बार कह चुके हैं कि वे राखी की तरह अपने वादे से मुकरेंगे नहीं। शादी जरूर करेंगे। चलिए, राहुल पर विश्वास कर लेते हैं।
कैटरीना ने ऐश्वर्या को फिर पछाड़ा
कुछ दिनों पहले कैटरीना उस ज्वैलरी कंपनी की ब्रांड एम्बेसेडर बन गईं, जिस प्रचार ऐश्वर्या करती थीं। अब ऐश्वर्या को एक और झटका कैटरीना ने दे दिया है। एक साबुन का प्रचार ऐश्वर्या अपने पति अभिषेक के साथ करते हुए नजर आती थीं, लेकिन अब ऐश की जगह कैटरीना नजर आएँगी। उम्र और युवाओं में लोकप्रियता का फायदा कैटरीना को मिल रहा है।
कैटरीना की ऐश से कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है और न ही वे ऐश्वर्या की जगह लेने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऐसा लगातार होने से कहा जा रहा है कि कैटरीना, ऐश्वर्या को मात देने की कोशिश कर रही हैं।
बॉर्बी डॉल को लेकर भी दोनों के बीच जो कुछ हुआ उसको लेकर खूब चर्चाएँ हुईं। इसके बाद सुंदरता या गूगल सर्च को लेकर जो सर्वेक्षण हुए उसमें भी कैटरीना का स्थान ऐश्वर्या से ऊपर रहा है।
माइग्रेन के युवा मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार करीब 10 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में माइग्रेन से पीड़ित है। स्पेशलिस्ट के अनुसार इसके बढ़ने का कारण शुरुआत में ही युवा मरीजों का इस पर ज्यादा ध्यान न देना है। जब तक प्रॉब्लम बढ़ नहीं जाती माइग्रेन से पीड़ित युवा मरीज डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं और इसे सामान्य सिरदर्द ही समझते रहते हैं। इससे उनकी प्रॉब्लम बढ़ती जाती है।
वास्तव में मॉर्डन लाइफ स्टाइल अपना असर दिखाने लगी है। भागमभाग भरी जिंदगी, लेट नाइट स्लीपिंग, देर से उठना, असमय खाना और बढ़ते टेंशन आदि जैसे कई कारणों से माइग्रेन के युवा मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सावधानी न रखने से यह गंभीर भी हो सकता है। अस्पतालों में प्रति माह 100 से अधिक युवा मरीज माइग्रेन के पहुँचते हैं। न्यूरोलोजिस्ट के अनुसार अस्पताल में मरीज तभी पहुँचते हैं जब स्थिति बिगड़ जाती है। माइग्रेन की शुरुआती स्थिति में ही यदि एक्सपर्ट से मिल लिया जाए तो इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। बाद में ठीक होने में इसे थोड़ा समय लगता है।
माइग्रेन रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड नर्व्स के फैलने और उनसे कुछ केमिकल निकलने के कारण होता है। कुछ खास कारण इसे प्रेरित करते हैं। माइग्रेन की 4 स्टेज रहती हैं- प्रोडोम, ऑरा, हैडेक और पोस्टड्रोम। खास बात यह है कि माइग्रेन युवाओं में ज्यादा पाया जाता है। आजकल दवाओं से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसकी अलग-अलग स्टेज के आधार पर ही इसे पूरी तरह ठीक होने में लगने वाला समय भी अलग-अलग होता है।
माइग्रेन के लक्षण
आधे सिर में दर्द होना और धीरे-धीरे बढ़ते जाना।
सिरदर्द के साथ उल्टी की इच्छा होना या उल्टी होना।
सिरदर्द के साथ डायरिया होना।
धीरे-धीरे आँखों के सामने अंधेरा छा जाना। कुछ चीजें धुँधली दिखाई देना।
सिरदर्द के पहले भी आलस्य, नींद आना, भूख न लगना, ध्वनि का चुभना जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं।
माइग्रेन से कैसे बचें
प्रतिदिन सोने और जागने का समय निश्चित करें। कोशिश करें कि रात में जल्दी सोएँ और सुबह जल्दी जागें।
समय पर भोजन करें। लंबे समय तक उपवास न रखें।
केफीन का सेवन कम करने के लिए कॉफी और चाय का सेवन कम करें।
तेज प्रकाश से बचें।
माइग्रेन को प्रेरित करने वाली चीजों को पहचानें और उनसे बचें।
व्यायाम और योगा को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएँ।
तनाव कम करने के लिए रिलेक्सेशन तकनीकों का उपयोग करें।
दिमाग को तेज बनाता है इंटरनेट
इंटरनेट का सही इस्तेमाल इंसानी दिमाग को और तेज बना सकता है। अमेरिकी प्रांत उत्तरी कैरोलीना के एलान विश्वविद्यालय के इमेजिनिंग इंटरनेट सेंटर और प्यू इंटरनेट तथा अमेरिकन लाइफ प्रोजेक्ट की ओर से कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है।
सर्वे में शामिल 395 इंटरनेट यूजर्स और एक्सपर्ट्स में से तीन चौथाई से ज्यादा ने माना है कि इंटरनेट के इस्तेमाल से लोगों के दिमाग को तेज किया जा सकता है। इमेजिंग इंटरनेट सेंटर की निदेशक जेना एंडरसन ने बताया कि सर्वे में शामिल अधिकतर युवाओं ने माना कि इंटरनेट 2020 तक पढ़ने और लिखने की इंसानी क्षमता को बढ़ा देगा।
उन्होंने कहा कि चार में से तीन एक्सपर्ट्स के अनुसार इंटरनेट के प्रयोग से मनुष्य की इंटेलिजेंस को बढ़ाया जा सकता है और दो तिहाई लोगों ने माना कि इंटरनेट लिखने-पढ़ने और ज्ञान में वृद्धि करता है। हालाँकि सर्वे में शामिल 21 प्रतिशत युवाओं ने यह भी माना कि इंटरनेट का बहुत अधिक इस्तेमाल करने वालों पर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है और उनके जनरल नॉलेज का लेवल घट सकता है। एंडरसन ने कहा कि अब भी कई लोग ऐसे हैं जो ऑनलाइन सर्च इंजनों का विरोध करते हैं।
ज्यादा टीवी देखने से उम्र होगी कम
टेलीविजन के आगे घंटों बैठने वाले युवाओं को सावधान होने की जरूरत है। लगातार टीवी देखने से आपकी उम्र घट सकती है। ऑस्ट्रेलिया के बेकर आईडीआई हार्ट और डायबिटीज इंस्टीट्यूट के रिसर्च में यह परिणाम निकला है। इस स्टडी में करीब 8,800 युवाओं के डेली रूटीन पर नजर रखी और पाया कि लगातार बैठकर टीवी देखने से युवाओं में हार्ट डीसिज का खतरा बढ़ जाता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के न्यूज लेटर में पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार रोजाना घंटों टीवी देखने से युवाओं में दिल के रोग बढ़ रहे हैं। टीवी के घातक इफेक्ट तेजी से फैल रहे हैं। इससे कम उम्र में हार्ट डीसिज से मरने की संभावना 18 प्रतिशत, जबकि कैंसर जैसी बीमारी के शिकार होने की संभावना 9 प्रतिशत बढ़ जाती है।
दो घंटे से कम टीवी देखने वाले युवाओं का कम्पैरिजन में चार घंटों से ज्यादा टीवी देखने वाले युवाओं से करने पर यह पाया गया कि ज्यादा टीवी देखने वाले 46 प्रतिशत युवा की किसी भी बीमारी से जल्दी मौत होती है, जबकि हार्ट डीसिज से होने वाली मौतों का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि हार्ट डीसिज और अन्य मौतों के पीछे सिगरेट पीना, हाई ब्लड प्रैशर, इम्बैलेंस्ड डाइट, अनियमित लाइफस्टाइल जैसे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन यह स्टडी लगातार टीवी देखने वालों पर फोकस्ड था और उसमें यह तथ्य उभर कर आया कि लगातार बैठे रहने से फिर चाहे वो टेबल कुर्सी में बैठना हो या कम्प्यूटर या फिर टीवी पर इससे सेहत संबंधी विकार पैदा हो जाते हैं। शोधकर्ता डेविड डनस्टॉन के अनुसार मानव का शरीर चलने फिरने के लिए बना है लगातार बैठे रहने के लिए नहीं।
तकनीकी, सोशल और फाइनेंशियल चैंजेस का मतलब है कि मनुष्य की मांसपेशियाँ पर्याप्त काम नहीं कर रही है। प्रतिदिन जितनी एनर्जी खर्च होनी चाहिए वह नहीं होने से आयु भी कम हो रही है। डनस्टॉन के मुताबिक यह बातें सिर्फ ज्यादा वजन वाले या मोटे लोगों पर ही लागू नहीं है, बल्कि स्वस्थ युवाओं के लिए भी है।
स्वस्थ व्यक्ति के भी लगातार बैठे रहने से उसके शुगर फैट्स और ब्लड फैट्स पर बुरा असर पड़ता है। इस रिसर्च में 25 वर्ष और अधिक आयु के 3846 युवा और 4954 युवा महिलाओं का ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट किया गया और उनके ब्लड टेस्ट से कोलेस्ट्राल और ब्लड शुगर के लेवल की जाँच की गई। इन सभी युवाओं से उनकी टीवी देखने संबंधी आदतों की जानकारी भी ली गई।
लारा दत्ता : प्यार किया तो डरना क्या
लारा दत्ता और टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति की नजदीकियों के बारे में हमेशा चर्चा होती है, लेकिन लारा इससे साफ मुकर जाती थी। वो मेरा दोस्त है, जैसे रटे रटाए बयान वे देती थी। लेकिन लारा ने अब सोच लिया है कि प्यार किया तो डरना क्या, इसलिए पिछले दिनों वे सार्वजनिक रूप से महेश भूपति के साथ नजर आईं। फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह में दोनों कपल की तरह साथ आए और साथ बैठकर उन्होंने कार्यक्रम का आनंद लिया।
केली दोरजी से लारा का वर्षों तक रोमांस चला। ब्रेकअप के बाद डीनो से कुछ समय तक उनका नाम जोड़ा गया, लेकिन बाद में महेश भूपति, लारा की जिंदगी में आ गए।
जहाँ तक करियर का सवाल है तो ‘ब्लू’ की असफलता को लारा भूला चुकी हैं और उनकी निगाहें अब ‘हाउसफुल’ पर लगी हुई हैं। इसमें भी लारा के साथ अक्षय कुमार हैं। फिल्म से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दीपिका पादुकोण और जिया खान के फिल्म में होने के बावजूद लारा उनसे ज्यादा सेक्सी फिल्म में नजर आ रही हैं।
राहुल महाजन किससे शादी करेंगे
कौन बनेगी मिसेस महाजन?
हरप्रीत छाबड़ा, डिम्पी गाँगुली और निकुंज मलिक में से किसी एक को राहुल महाजन अपनी दुल्हनियाँ बनाने वाले हैं और निर्णय लेने के लिए उनके पास कुछ घंटों का समय शेष है।
कौन बनेगी मिसेस महाजन? उम्मीद है कि राहुल ने अब तक इसका जवाब खोज लिया होगा। ‘राहुल दुल्हनियाँ ले जाएगा’ कार्यक्रम के जरिए उन्होंने कई लड़कियों को इस कसौटी पर परखा कि क्या वे उनकी जीवन-संगिनी बनने लायक है।हरप्रीत, डिम्पी और निकुंज को राहुल ने नजदीकी से जाना। उनके घरवालों से मिले। अपने परिवार से मिलवाया। ऑन स्क्रीन पर हम वही देखते हैं जो दिखाया जाता है। ऑफ स्क्रीन भी बहुत कुछ ऐसा घटता है, जिससे राहुल को इन्हें परखने में मदद मिली होगी। आखिर राहुल किसे चुनेंगे? दिल्ली की हरप्रीत सुंदर हैं। मासूम हैं। कम उम्र में ही परिपक्व बातें करती हैं। एक सीधी लकीर पर अब तक वे चली हैं। बुराई करने और विवादों से दूर रहना उन्हें पसंद है। क्या हरप्रीत की यह सादगी से राहुल प्रभावित होंगे?
कोलकाता की डिम्पी गाँगुली बेहद चंचल है। जो दिल पर है वो उसकी जुबाँ पर है। उनका दिल एकदम साफ है। राहुल कार्यक्रम शुरू होने के पहले कह चुके हैं कि बंगाली संस्कृति और लोग उन्हें पसंद है। क्या बंगाल की डिम्पी का जादू उन पर चलेगा?
निकुंज मलिक को जो सही लगता है उसे कहने से वे घबराती नहीं हैं। कम बोलने वाली निकुंज उम्र में अन्य दोनों लड़कियों से बड़ी हैं। उनमें एक किस्म की अकड़ है। अपने विचारों को वे छिपाती नहीं हैं, व्यक्त कर देती हैं। क्या निकुंज की खामोशी के अर्थ को राहुल समझेंगे? 6 मार्च की शाम को इसका जवाब मिल जाएगा। राहुल अनेक बार कह चुके हैं कि वे राखी की तरह अपने वादे से मुकरेंगे नहीं। शादी जरूर करेंगे। चलिए, राहुल पर विश्वास कर लेते हैं।
कैटरीना ने ऐश्वर्या को फिर पछाड़ा
कुछ दिनों पहले कैटरीना उस ज्वैलरी कंपनी की ब्रांड एम्बेसेडर बन गईं, जिस प्रचार ऐश्वर्या करती थीं। अब ऐश्वर्या को एक और झटका कैटरीना ने दे दिया है। एक साबुन का प्रचार ऐश्वर्या अपने पति अभिषेक के साथ करते हुए नजर आती थीं, लेकिन अब ऐश की जगह कैटरीना नजर आएँगी। उम्र और युवाओं में लोकप्रियता का फायदा कैटरीना को मिल रहा है।
कैटरीना की ऐश से कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है और न ही वे ऐश्वर्या की जगह लेने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऐसा लगातार होने से कहा जा रहा है कि कैटरीना, ऐश्वर्या को मात देने की कोशिश कर रही हैं।
बॉर्बी डॉल को लेकर भी दोनों के बीच जो कुछ हुआ उसको लेकर खूब चर्चाएँ हुईं। इसके बाद सुंदरता या गूगल सर्च को लेकर जो सर्वेक्षण हुए उसमें भी कैटरीना का स्थान ऐश्वर्या से ऊपर रहा है।
मंगलवार, 2 मार्च 2010
पर्यटन
अमर प्रेम कहानी का साक्षी मांडू
मांडू मध्यप्रदेश का एक ऐसा पर्यटनस्थल है, जो रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम का साक्षी है। यहाँ के खंडहर व इमारतें हमें इतिहास के उस झरोखे के दर्शन कराते हैं, जिसमें हम मांडू के शासकों की विशाल समृद्ध विरासत व शानो-शौकत से रूबरू होते हैं।
कहने को लोग मांडू को खंडहरों का गाँव भी कहते हैं परंतु इन खंडहरों के पत्थर भी बोलते हैं और सुनाते हैं हमें इतिहास की अमर गाथा। हरियाली की खूबसूरत चादर ओढ़ा मांडू विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर एक सुंदर पर्यटनस्थल रहा है। यहाँ के शानदार व विशाल दरवाजे मांडू प्रवेश के साथ ही इस तरह हमारा स्वागत करते हैं। मानों हमने किसी समृद्ध शासक के नगर में प्रवेश कर रहे हो। मांडू में प्रवेश के घुमावदार रास्तों के साथ ही मांडू के बारे में जानने की तथा इसकी खूबसूरत इमारतों को देखने की हमारी जिज्ञासा चरम तक पहुँच जाती है। यहाँ के विशाल इमली के पेड़ व मीठे सीताफलों से लदे पेड़ों को देखकर हमारे मुँह में पानी आना स्वभाविक है।
यहाँ की कबीटनुमा स्पेशल इमली के स्वाद के चटखारे लिए बगैर भला कैसे हमारी मांडू यात्रा पूरी हो सकती है। आप भी यदि मांडू दर्शन को जा रहे हैं तो एक बार अवश्य यहाँ की इमली, सीताफल व कमलगट्टे का स्वाद चखिएगा। आइए चलते हैं मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडू की सैर पर।
मांडू के बारे में कुछ बातें :
मांडू का दूसरा नाम 'मांडवगढ़' भी है। यह विन्ध्याचल की पहाड़ियों पर लगभग 2,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। मांडू को पहले 'शादियाबाद' के नाम से भी जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'खुशियों का नगर'।
मांडू पहाड़ों व चट्टानों का इलाका है, जहाँ पर ऐतिहासिक महत्व की कई पुरानी इमारते हैं। मालवा के राजपूत परमार शासक भी बाहरी आक्रमण से अपनी रक्षा के लिए मांडू को एक महफूज स्थान मानते थे।
मांडू में यहाँ जरूर जाएँ :
मांडू में पर्यटकों के लिए देखने लायक बहुत से स्थान हैं, जिनमें रानी रूपमती का महल, हिंडोला महल, जहाज महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल आदि स्थान प्रमुख हैं।
इसी के साथ ही मांडू को 'मांडवगढ़ जैन तीर्थ' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान सुपार्श्वनाथ की पद्मासन मुद्रा में विराजित श्वेत वर्णी सुंदर प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना सन् 1472 में की गई थी। मांडवगढ़ में कई अन्य पुराने ऐतिहासिक महत्व के जैन मंदिर भी है, जिसके कारण यह जैन धर्मावलंबियों के लिए एक तीर्थ स्थान है।
स्वागत करते प्रवेश द्वार :
मांडू में लगभग 12 प्रवेश द्वार है, जो मांडू में 45 किलोमीटर के दायरे में मुंडेर के समान निर्मित है। इन दरवाजों में 'दिल्ली दरवाजा' प्रमुख है। यह मांडू का प्रवेश द्वार है। इसका निर्माण सन् 1405 से 1407 के मध्य में हुआ था। यह खड़ी ढाल के रूप में घुमावदार मार्ग पर बनाया गया है, जहाँ पहुँचने पर हाथियों की गति धीमी हो जाती थी।
इस दरवाजे में प्रवेश करते ही अन्य दरवाजों की शुरुआत के साथ ही मांडू दर्शन का आरंभ हो जाता है। मांडू के प्रमुख दरवाजों में आलमगीर दरवाजा, भंगी दरवाजा, रामपोल दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा आदि अनेक दरवाजे हैं।
जामा मस्जिद (जामी मस्जिद) :
मांडू का मुख्य आकर्षण जामा मस्जिद है, इस विशाल मस्जिद का निर्माण कार्य होशंगशाह के शासनकाल में आरंभ किया गया था तथा महमूद प्रथम के शासनकाल में यह मस्जिद बनकर तैयार हुई थी। इस मस्जिद की गिनती मांडू की नायाब व शानदार इमारतों में की जाती है। यह भी कहा जाता है कि जामा मस्जिद डेमास्कस (सीरिया देश की राजधानी) की एक प्रसिद्ध मस्जिद का प्रतिरूप है।
अशरफी महल :
जामा मस्जिद के सामने ही अशरफी महल है। अशरफी का अर्थ होता है 'सोने के सिक्के'। इस महल का निर्माण होशंगशाह खिलजी के उत्तराधिकारी मोहम्मद खिलजी ने इस्लामिक भाषा के विद्यालय (मदरसा) के लिए किया था। यहाँ विद्धार्थियों के रहने के लिए कई कमरों का निर्माण भी किया गया था।
जहाज महल :
जहाज महल का निर्माण 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य कराया था। यह महल जहाज की आकृति में दो कृत्रिम तालाबों कपूर तालाब व मुंज तालाब दो तालाबों के मध्य में बना हुआ है। लगभग 120 मीटर लंबे इस खूबसूरत महल को दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानों तालाब के बीच में कोई सुंदर जहाज तैर रहा हो। संभवत: इसका निर्माण श्रृंगारप्रेमी सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने विशेष तौर पर अंत:पुर (महिलाओं के लिए बनाए गए महल) के रूप में किया था।
होशंगशाह की कब्र :
होशंगशाह की कब्र, जो कि भारत में मार्बल से बनाई हुई ऐसी पहली कब्र है, जिसमें आपको अफगानी शिल्पकला का बेहतर नमूना देखने को मिलता है। यह यहाँ का गुंबज, बरामदे तथा मार्बल की जाली आदि की खूबसूरती बेजोड़ है।
हिंडोला महल :
हिंडोला महल मांडू के खूबसूरत महलों में से एक है। हिंडोला का अर्थ होता 'झूला'। इस महल की दीवारे कुछ झुकी होने के कारण यह महल हवा में झुलते हिंडोले के समान प्रतीत होता है। अत: इसे हिंडोला महल के नाम से जाना जाता है। हिंडोला महल का निर्माण ग्यासुद्दीन खिलजी ने 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य सभा भवन के रूप में निर्मित सुंदर महल है। यहाँ के सुंदर कॉलम इसे और भी खूबसूरती प्रदान करते हैं। इस महल के पश्चिम में कई छोटे-बड़े सुंदर महल है। इसके समीप ही चंपा बाबड़ी है।
रानी रूपमती का महल :
रानी रूपमती के महल को देखे बगैर मांडू दर्शन अधूरा सा है। 365 मीटर ऊँची खड़ी चट्टान पर स्थित इस महल का निर्माण बाजबहादुर ने रानी रूपमती के लिए कराया था। इसी के साथ ही सैनिकों के लिए मांडू की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के बेहतर स्थान के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता था।
कहा जाता है कि रानी रूपमती सुबह ऊठकर माँ नर्मदा के दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती थी। अत: रूपमती के नर्मदा दर्शन को सुलभ बनाने हेतु बाजबहादुर ने ऊँचाई पर स्थित इस महल का निर्माण कराया था।
बाज बहादुर का महल :
बाज बहादुर के महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था। इस महल में विशाल आँगन व हॉल बने हुए हैं। यहाँ से हमें मांडू का सुंदर नजारा देखने को मिलता है।
रेवा कुंड :
रेवा कुंड का निर्माण बादशाह बाजबहादुर ने अपनी प्रेयसी रानी रूपमती के महल में पानी की पर्याप्त व्यवस्था के स्त्रोत के रूप में किया था।
अन्य स्थल
नीलकंठ
यहाँ शिवजी का मंदिर है जिसमें जाने के लिए अंदर सीढ़ी उतरकर जाना पड़ता है। इस मंदिर के सौंदर्य को शब्दों में बयाँ नहीं किया सकता। ऊपर पेड़ों से घिरे तालाब से एक धार नीचे शिवजी का अभिषेक करती जाती है।
नीलकंठ महल
मंदिर के समीप स्थित इस महल का निर्माण शाह बदगा खान ने अकबर की हिंदू पत्नी के लिए करवाया था। इसकी दीवारों पर अकबर कालीन कला के नमूने देखे जा सकते हैं।
हाथी महल, दरिया खान की मजार, दाई का महल, दाई की छोटी बहन का महल, मलिक मघत की मस्जिद और जाली महल भी दर्शनीय हैं। यहाँ ईको पॉइंट पर पर्यटकों की भीड़ लगी ही रहती है। लोहानी गुफाएँ और उनके सामने स्थित सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों को खींचता है।
मांडू से दूरी :
धार से दूरी - लगभग 33 किलोमीटर
इंदौर से दूरी - लगभग 100 किलोमीटर
नजदीकी रेलवे स्टेशन - इंदौर व रतलाम
बस सुविधा उपलब्ध : रतलाम, उज्जैन, भोपाल, महू, धार आदि स्थानों से मांडू हेतु डेली बस सुविधा उपलब्ध है।
मांडू जाने का बेहतर समय : जुलाई से मार्च माह का समय मांडू जाने के लिए बेहतर स्थान है। बेहतर होगा कि आप बरसात के मौसम में मांडू जाएँ क्योंकि इस मौसम में मांडू की खूबसूरती चरम पर होती है।
ठहरने के स्थान :
मांडू में म. प्र. पर्यटन विभाग का होटल मालवा रिर्जोट है। इसके अलावा मांडू में कई छोटे-बड़े होटल व धर्मशालाएँ हैं, जहाँ आप ठहरकर मांडू के खूबसूरत नजारों का आनंद उठा सकते हैं।
अपने में इतिहास समेटे बाग की गुफाएँ
'शब-ए-मालवा' इंदौर 150 किलोमीटर दूर एक ऐसी एतेहासिक और प्राकृतिक धरोहर स्थित है जिसका ज्यादातर लोगों ने नाम तो सुना है लेकिन देखा कम ही है। दुर्गम स्थल पर स्थित होने के कारण सैर-सपाटा पसंद करने वाले लोग उस तरफ आसानी से रुख नहीं करते लेकिन दूर देश से आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए यह धरोहर एक जिज्ञासा का विषय हमेशा से बनी रहती है।
खासतौर से बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों के लिए यह किसी तीर्थ से कम नहीं है। यह धार जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाग की गुफाएँ हैं जो अपने भित्ति चित्रों की वजह से अजंता के समकक्ष मानी जाती हैं। इन्हें भारत सरकार ने राष्ट्रीय महत्व का सुरक्षित पुरा स्मारक घोषित कर रखा है।
क्या है बाग में :
बाग नदी और बाग कस्बे के नाम की वजह से इन गुफाओं को 'बाग की गुफाओं' के नाम से जाना जाता है। गुफाओं के बनाने के लिए खूबसूरत जगह का चुनना यह बताता है कि बाग गुफा मंडप के निर्माता प्राकृतिक सौन्दर्य के उपासक थे। वर्ष 1953 में भारत सरकार द्वारा बाग गुफाओं को 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित किया गया। इसके संरक्षण का जिम्मा पुरातत्व विभाग को सौंपा गया। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के एक रेतीले पत्थर के पर्वत पर निर्मित इन गुफाओं की संख्या 9 है।
बाग की गुफाएँ बहुत सुंदर स्थान पर स्थित हैं। सामने बाग नदी बहती है और चारों ओर हरियाली तथा जंगल हैं। धार जिले में विंध्य श्रेणी के दक्षिणी ढाल पर, नर्मदा नदी की एक सहायक नदी बागवती के किनारे उसकी सतह से 150 फुट की ऊँचाई पर यह विश्व प्रसिद्ध गुफाएँ है
पहली गुफा 'गृह गुफा' कहलाती है। दूसरी गुफा 'पांडव गुफा' के नाम से प्रख्यात है। यह बाकी सब गुफाओं से अधिक बड़ी और अधिक सुरक्षित प्रतीत होती है। तीसरी गुफा का नाम 'हाथीखाना' है। इसमें बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए कोठरियाँ बनी हुई हैं। चौथी गुफा को 'रंगमहल' कहा जाता है। पाँचवी गुफा बौद्ध भिक्षुओं के एक स्थान पर बैठकर प्रवचन सुनने के लिए बनाई गई थी। पाँचवी और छठी गुफा आपस में मिली हुई हैं तथा इनके बीच का सभा मंडप 46 फुट वर्गाकार है।
सातवीं, आठवीं और नौवीं गुफाओं की हालत ठीक नहीं है और वे अवशेष मात्र ही नजर आती हैं। इन गुफाओं की एक विशेषता यह भी है कि इनके अंदर जाकर इतनी ठंडक का अहसास होता है जैसे आप किसी एयरकंडीशन कक्ष में आ गए हों। गुफाओं के अंदर कई जगह से पहाड़ों से प्राकृतिक तरीके से पानी भी रिसकर आता रहता है। ये गुफाएँ कई शताब्दी पुरानी हैं।
लेकिन इनका काल निर्धारण आज भी नहीं हो पाया है। इतिहासविद इन्हें अजंता से पुराना तो नहीं मानते लेकिन यह जरूर मानते हैं कि यहाँ के भित्ति चित्रों में अंकित मनुष्यों की वेश-भूषा व अलंकार आदि से इनका समय वही निश्चित होता है जो अजंता की पहली और दूसरी गुफाओं का है। विख्यात इतिहासविद और पुराविद श्री कुमार स्वामी ने इन्हें पाँचवी शताब्दी का माना है।
भित्ति चित्र अब संग्रहालय में :
बाग की गुफाओं के भित्ति चित्र कई शताब्दियों तक प्रकृति ने सहेजकर रखे थे। बाद में जंगलों की कटाई और गुफाओं में बाबाओं-महात्माओं द्वारा आग जलाने और धुँआ करने के बाद इन भित्ति चित्रों पर संकट मंडराने लगा। गुफाओं के अंदर चमगादड़ों ने भी अपने डेरे बना लिए थे। नमी और आर्द्रता की वजह से भी भित्ति चित्र प्रभावित हो रहे थे। तब इन्हें गुफा से हटाने का निर्णय लिया गया।
1982 से इन चित्रों को दीवारों व छतों से निकालने का कार्य शुरू हुआ। नमी से प्रभावित इन चित्रों को तेज धार वाले औजारों से काटकर दीवारों से अलग किया गया। निकाले गए चित्रों को मजबूती देने के उद्देश्य से फाइबर ग्लास एवं अन्य पदार्थों से माउंटिंग की गई। चित्रों को वापस मूल स्वरूप में लाने के लिए उनकी रासायनिक पदार्थों से फैंसिंग की गई।
बाद में इन चित्रों को गुफाओं के सामने निर्मित संग्रहालय में रखा गया। इन चित्रों को अब संग्रहालय में ही देखा जा सकता है। गुफाओं के भीतर अब सिर्फ मूर्तियाँ ही बची हैं जिनमें से अधिकांश बुद्ध की हैं या फिर बुद्ध के जीवनकाल से जुड़ी घटनाओं को बयान करती हैं।
कैसे जाएँ, कब जाएँ :
बाग की गुफाएँ बहुत सुंदर स्थान पर स्थित हैं। सामने बाग नदी बहती है और चारों ओर हरियाली तथा जंगल हैं। धार जिले में विंध्य श्रेणी के दक्षिणी ढाल पर, नर्मदा नदी की एक सहायक नदी बागवती के किनारे उसकी सतह से 150 फुट की ऊँचाई पर यह विश्व प्रसिद्ध गुफाएँ हैं। अगर आप स्वंय के वाहन से बाग जाना चाहते हैं तो उसमें काफी सहूलियत रहेगी। इंदौर से 65 किलोमीटर दूर है धार।
धार से 71 किलोमीटर की दूरी पर आदिवासी क्षेत्र टांडा है। यहाँ पहुँचने के बाद बाग कस्बा सिर्फ 20 किमी दूर रह जाता है। बाग पहुँचने के बाद 7 किमी का रास्ता तय करके इन गुफाओं तक पहुँचा जा सकता है। यहाँ जाने का सबसे अच्छा मौसम बारिश का है क्योंकि गुफाओं के सामने बहने वाली बाग नदी उस समय बहती है। यह मौसमी नदी है और गर्मियाँ आने तक सूख जाती है। नदी के सूखने से वहाँ का दृश्य थोड़ा अधूरा-अधूरा सा लगने लगता है।
मांडू मध्यप्रदेश का एक ऐसा पर्यटनस्थल है, जो रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम का साक्षी है। यहाँ के खंडहर व इमारतें हमें इतिहास के उस झरोखे के दर्शन कराते हैं, जिसमें हम मांडू के शासकों की विशाल समृद्ध विरासत व शानो-शौकत से रूबरू होते हैं।
कहने को लोग मांडू को खंडहरों का गाँव भी कहते हैं परंतु इन खंडहरों के पत्थर भी बोलते हैं और सुनाते हैं हमें इतिहास की अमर गाथा। हरियाली की खूबसूरत चादर ओढ़ा मांडू विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर एक सुंदर पर्यटनस्थल रहा है। यहाँ के शानदार व विशाल दरवाजे मांडू प्रवेश के साथ ही इस तरह हमारा स्वागत करते हैं। मानों हमने किसी समृद्ध शासक के नगर में प्रवेश कर रहे हो। मांडू में प्रवेश के घुमावदार रास्तों के साथ ही मांडू के बारे में जानने की तथा इसकी खूबसूरत इमारतों को देखने की हमारी जिज्ञासा चरम तक पहुँच जाती है। यहाँ के विशाल इमली के पेड़ व मीठे सीताफलों से लदे पेड़ों को देखकर हमारे मुँह में पानी आना स्वभाविक है।
यहाँ की कबीटनुमा स्पेशल इमली के स्वाद के चटखारे लिए बगैर भला कैसे हमारी मांडू यात्रा पूरी हो सकती है। आप भी यदि मांडू दर्शन को जा रहे हैं तो एक बार अवश्य यहाँ की इमली, सीताफल व कमलगट्टे का स्वाद चखिएगा। आइए चलते हैं मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडू की सैर पर।
मांडू के बारे में कुछ बातें :
मांडू का दूसरा नाम 'मांडवगढ़' भी है। यह विन्ध्याचल की पहाड़ियों पर लगभग 2,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। मांडू को पहले 'शादियाबाद' के नाम से भी जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'खुशियों का नगर'।
मांडू पहाड़ों व चट्टानों का इलाका है, जहाँ पर ऐतिहासिक महत्व की कई पुरानी इमारते हैं। मालवा के राजपूत परमार शासक भी बाहरी आक्रमण से अपनी रक्षा के लिए मांडू को एक महफूज स्थान मानते थे।
मांडू में यहाँ जरूर जाएँ :
मांडू में पर्यटकों के लिए देखने लायक बहुत से स्थान हैं, जिनमें रानी रूपमती का महल, हिंडोला महल, जहाज महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल आदि स्थान प्रमुख हैं।
इसी के साथ ही मांडू को 'मांडवगढ़ जैन तीर्थ' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान सुपार्श्वनाथ की पद्मासन मुद्रा में विराजित श्वेत वर्णी सुंदर प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना सन् 1472 में की गई थी। मांडवगढ़ में कई अन्य पुराने ऐतिहासिक महत्व के जैन मंदिर भी है, जिसके कारण यह जैन धर्मावलंबियों के लिए एक तीर्थ स्थान है।
स्वागत करते प्रवेश द्वार :
मांडू में लगभग 12 प्रवेश द्वार है, जो मांडू में 45 किलोमीटर के दायरे में मुंडेर के समान निर्मित है। इन दरवाजों में 'दिल्ली दरवाजा' प्रमुख है। यह मांडू का प्रवेश द्वार है। इसका निर्माण सन् 1405 से 1407 के मध्य में हुआ था। यह खड़ी ढाल के रूप में घुमावदार मार्ग पर बनाया गया है, जहाँ पहुँचने पर हाथियों की गति धीमी हो जाती थी।
इस दरवाजे में प्रवेश करते ही अन्य दरवाजों की शुरुआत के साथ ही मांडू दर्शन का आरंभ हो जाता है। मांडू के प्रमुख दरवाजों में आलमगीर दरवाजा, भंगी दरवाजा, रामपोल दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा आदि अनेक दरवाजे हैं।
जामा मस्जिद (जामी मस्जिद) :
मांडू का मुख्य आकर्षण जामा मस्जिद है, इस विशाल मस्जिद का निर्माण कार्य होशंगशाह के शासनकाल में आरंभ किया गया था तथा महमूद प्रथम के शासनकाल में यह मस्जिद बनकर तैयार हुई थी। इस मस्जिद की गिनती मांडू की नायाब व शानदार इमारतों में की जाती है। यह भी कहा जाता है कि जामा मस्जिद डेमास्कस (सीरिया देश की राजधानी) की एक प्रसिद्ध मस्जिद का प्रतिरूप है।
अशरफी महल :
जामा मस्जिद के सामने ही अशरफी महल है। अशरफी का अर्थ होता है 'सोने के सिक्के'। इस महल का निर्माण होशंगशाह खिलजी के उत्तराधिकारी मोहम्मद खिलजी ने इस्लामिक भाषा के विद्यालय (मदरसा) के लिए किया था। यहाँ विद्धार्थियों के रहने के लिए कई कमरों का निर्माण भी किया गया था।
जहाज महल :
जहाज महल का निर्माण 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य कराया था। यह महल जहाज की आकृति में दो कृत्रिम तालाबों कपूर तालाब व मुंज तालाब दो तालाबों के मध्य में बना हुआ है। लगभग 120 मीटर लंबे इस खूबसूरत महल को दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानों तालाब के बीच में कोई सुंदर जहाज तैर रहा हो। संभवत: इसका निर्माण श्रृंगारप्रेमी सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने विशेष तौर पर अंत:पुर (महिलाओं के लिए बनाए गए महल) के रूप में किया था।
होशंगशाह की कब्र :
होशंगशाह की कब्र, जो कि भारत में मार्बल से बनाई हुई ऐसी पहली कब्र है, जिसमें आपको अफगानी शिल्पकला का बेहतर नमूना देखने को मिलता है। यह यहाँ का गुंबज, बरामदे तथा मार्बल की जाली आदि की खूबसूरती बेजोड़ है।
हिंडोला महल :
हिंडोला महल मांडू के खूबसूरत महलों में से एक है। हिंडोला का अर्थ होता 'झूला'। इस महल की दीवारे कुछ झुकी होने के कारण यह महल हवा में झुलते हिंडोले के समान प्रतीत होता है। अत: इसे हिंडोला महल के नाम से जाना जाता है। हिंडोला महल का निर्माण ग्यासुद्दीन खिलजी ने 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य सभा भवन के रूप में निर्मित सुंदर महल है। यहाँ के सुंदर कॉलम इसे और भी खूबसूरती प्रदान करते हैं। इस महल के पश्चिम में कई छोटे-बड़े सुंदर महल है। इसके समीप ही चंपा बाबड़ी है।
रानी रूपमती का महल :
रानी रूपमती के महल को देखे बगैर मांडू दर्शन अधूरा सा है। 365 मीटर ऊँची खड़ी चट्टान पर स्थित इस महल का निर्माण बाजबहादुर ने रानी रूपमती के लिए कराया था। इसी के साथ ही सैनिकों के लिए मांडू की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के बेहतर स्थान के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता था।
कहा जाता है कि रानी रूपमती सुबह ऊठकर माँ नर्मदा के दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती थी। अत: रूपमती के नर्मदा दर्शन को सुलभ बनाने हेतु बाजबहादुर ने ऊँचाई पर स्थित इस महल का निर्माण कराया था।
बाज बहादुर का महल :
बाज बहादुर के महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था। इस महल में विशाल आँगन व हॉल बने हुए हैं। यहाँ से हमें मांडू का सुंदर नजारा देखने को मिलता है।
रेवा कुंड :
रेवा कुंड का निर्माण बादशाह बाजबहादुर ने अपनी प्रेयसी रानी रूपमती के महल में पानी की पर्याप्त व्यवस्था के स्त्रोत के रूप में किया था।
अन्य स्थल
नीलकंठ
यहाँ शिवजी का मंदिर है जिसमें जाने के लिए अंदर सीढ़ी उतरकर जाना पड़ता है। इस मंदिर के सौंदर्य को शब्दों में बयाँ नहीं किया सकता। ऊपर पेड़ों से घिरे तालाब से एक धार नीचे शिवजी का अभिषेक करती जाती है।
नीलकंठ महल
मंदिर के समीप स्थित इस महल का निर्माण शाह बदगा खान ने अकबर की हिंदू पत्नी के लिए करवाया था। इसकी दीवारों पर अकबर कालीन कला के नमूने देखे जा सकते हैं।
हाथी महल, दरिया खान की मजार, दाई का महल, दाई की छोटी बहन का महल, मलिक मघत की मस्जिद और जाली महल भी दर्शनीय हैं। यहाँ ईको पॉइंट पर पर्यटकों की भीड़ लगी ही रहती है। लोहानी गुफाएँ और उनके सामने स्थित सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों को खींचता है।
मांडू से दूरी :
धार से दूरी - लगभग 33 किलोमीटर
इंदौर से दूरी - लगभग 100 किलोमीटर
नजदीकी रेलवे स्टेशन - इंदौर व रतलाम
बस सुविधा उपलब्ध : रतलाम, उज्जैन, भोपाल, महू, धार आदि स्थानों से मांडू हेतु डेली बस सुविधा उपलब्ध है।
मांडू जाने का बेहतर समय : जुलाई से मार्च माह का समय मांडू जाने के लिए बेहतर स्थान है। बेहतर होगा कि आप बरसात के मौसम में मांडू जाएँ क्योंकि इस मौसम में मांडू की खूबसूरती चरम पर होती है।
ठहरने के स्थान :
मांडू में म. प्र. पर्यटन विभाग का होटल मालवा रिर्जोट है। इसके अलावा मांडू में कई छोटे-बड़े होटल व धर्मशालाएँ हैं, जहाँ आप ठहरकर मांडू के खूबसूरत नजारों का आनंद उठा सकते हैं।
अपने में इतिहास समेटे बाग की गुफाएँ
'शब-ए-मालवा' इंदौर 150 किलोमीटर दूर एक ऐसी एतेहासिक और प्राकृतिक धरोहर स्थित है जिसका ज्यादातर लोगों ने नाम तो सुना है लेकिन देखा कम ही है। दुर्गम स्थल पर स्थित होने के कारण सैर-सपाटा पसंद करने वाले लोग उस तरफ आसानी से रुख नहीं करते लेकिन दूर देश से आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए यह धरोहर एक जिज्ञासा का विषय हमेशा से बनी रहती है।
खासतौर से बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों के लिए यह किसी तीर्थ से कम नहीं है। यह धार जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाग की गुफाएँ हैं जो अपने भित्ति चित्रों की वजह से अजंता के समकक्ष मानी जाती हैं। इन्हें भारत सरकार ने राष्ट्रीय महत्व का सुरक्षित पुरा स्मारक घोषित कर रखा है।
क्या है बाग में :
बाग नदी और बाग कस्बे के नाम की वजह से इन गुफाओं को 'बाग की गुफाओं' के नाम से जाना जाता है। गुफाओं के बनाने के लिए खूबसूरत जगह का चुनना यह बताता है कि बाग गुफा मंडप के निर्माता प्राकृतिक सौन्दर्य के उपासक थे। वर्ष 1953 में भारत सरकार द्वारा बाग गुफाओं को 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित किया गया। इसके संरक्षण का जिम्मा पुरातत्व विभाग को सौंपा गया। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के एक रेतीले पत्थर के पर्वत पर निर्मित इन गुफाओं की संख्या 9 है।
बाग की गुफाएँ बहुत सुंदर स्थान पर स्थित हैं। सामने बाग नदी बहती है और चारों ओर हरियाली तथा जंगल हैं। धार जिले में विंध्य श्रेणी के दक्षिणी ढाल पर, नर्मदा नदी की एक सहायक नदी बागवती के किनारे उसकी सतह से 150 फुट की ऊँचाई पर यह विश्व प्रसिद्ध गुफाएँ है
पहली गुफा 'गृह गुफा' कहलाती है। दूसरी गुफा 'पांडव गुफा' के नाम से प्रख्यात है। यह बाकी सब गुफाओं से अधिक बड़ी और अधिक सुरक्षित प्रतीत होती है। तीसरी गुफा का नाम 'हाथीखाना' है। इसमें बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए कोठरियाँ बनी हुई हैं। चौथी गुफा को 'रंगमहल' कहा जाता है। पाँचवी गुफा बौद्ध भिक्षुओं के एक स्थान पर बैठकर प्रवचन सुनने के लिए बनाई गई थी। पाँचवी और छठी गुफा आपस में मिली हुई हैं तथा इनके बीच का सभा मंडप 46 फुट वर्गाकार है।
सातवीं, आठवीं और नौवीं गुफाओं की हालत ठीक नहीं है और वे अवशेष मात्र ही नजर आती हैं। इन गुफाओं की एक विशेषता यह भी है कि इनके अंदर जाकर इतनी ठंडक का अहसास होता है जैसे आप किसी एयरकंडीशन कक्ष में आ गए हों। गुफाओं के अंदर कई जगह से पहाड़ों से प्राकृतिक तरीके से पानी भी रिसकर आता रहता है। ये गुफाएँ कई शताब्दी पुरानी हैं।
लेकिन इनका काल निर्धारण आज भी नहीं हो पाया है। इतिहासविद इन्हें अजंता से पुराना तो नहीं मानते लेकिन यह जरूर मानते हैं कि यहाँ के भित्ति चित्रों में अंकित मनुष्यों की वेश-भूषा व अलंकार आदि से इनका समय वही निश्चित होता है जो अजंता की पहली और दूसरी गुफाओं का है। विख्यात इतिहासविद और पुराविद श्री कुमार स्वामी ने इन्हें पाँचवी शताब्दी का माना है।
भित्ति चित्र अब संग्रहालय में :
बाग की गुफाओं के भित्ति चित्र कई शताब्दियों तक प्रकृति ने सहेजकर रखे थे। बाद में जंगलों की कटाई और गुफाओं में बाबाओं-महात्माओं द्वारा आग जलाने और धुँआ करने के बाद इन भित्ति चित्रों पर संकट मंडराने लगा। गुफाओं के अंदर चमगादड़ों ने भी अपने डेरे बना लिए थे। नमी और आर्द्रता की वजह से भी भित्ति चित्र प्रभावित हो रहे थे। तब इन्हें गुफा से हटाने का निर्णय लिया गया।
1982 से इन चित्रों को दीवारों व छतों से निकालने का कार्य शुरू हुआ। नमी से प्रभावित इन चित्रों को तेज धार वाले औजारों से काटकर दीवारों से अलग किया गया। निकाले गए चित्रों को मजबूती देने के उद्देश्य से फाइबर ग्लास एवं अन्य पदार्थों से माउंटिंग की गई। चित्रों को वापस मूल स्वरूप में लाने के लिए उनकी रासायनिक पदार्थों से फैंसिंग की गई।
बाद में इन चित्रों को गुफाओं के सामने निर्मित संग्रहालय में रखा गया। इन चित्रों को अब संग्रहालय में ही देखा जा सकता है। गुफाओं के भीतर अब सिर्फ मूर्तियाँ ही बची हैं जिनमें से अधिकांश बुद्ध की हैं या फिर बुद्ध के जीवनकाल से जुड़ी घटनाओं को बयान करती हैं।
कैसे जाएँ, कब जाएँ :
बाग की गुफाएँ बहुत सुंदर स्थान पर स्थित हैं। सामने बाग नदी बहती है और चारों ओर हरियाली तथा जंगल हैं। धार जिले में विंध्य श्रेणी के दक्षिणी ढाल पर, नर्मदा नदी की एक सहायक नदी बागवती के किनारे उसकी सतह से 150 फुट की ऊँचाई पर यह विश्व प्रसिद्ध गुफाएँ हैं। अगर आप स्वंय के वाहन से बाग जाना चाहते हैं तो उसमें काफी सहूलियत रहेगी। इंदौर से 65 किलोमीटर दूर है धार।
धार से 71 किलोमीटर की दूरी पर आदिवासी क्षेत्र टांडा है। यहाँ पहुँचने के बाद बाग कस्बा सिर्फ 20 किमी दूर रह जाता है। बाग पहुँचने के बाद 7 किमी का रास्ता तय करके इन गुफाओं तक पहुँचा जा सकता है। यहाँ जाने का सबसे अच्छा मौसम बारिश का है क्योंकि गुफाओं के सामने बहने वाली बाग नदी उस समय बहती है। यह मौसमी नदी है और गर्मियाँ आने तक सूख जाती है। नदी के सूखने से वहाँ का दृश्य थोड़ा अधूरा-अधूरा सा लगने लगता है।
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