सदाशिव अमरापुरकर
201, पंचधाना 'ए' विंग,
ऑफिस यारी रोड, वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-61
सचिन
बी/609, पिअरी अपार्टमेंट्स, स्वामी समर्थ
नगर, क्रास रोड, नंबर 3, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
साधना सिंह
बंगलो नं. 14, ब्राइटन टावर,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सईद जाफरी
सजल फ्लैट 503, वीरा देसाई रोड,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सैफ अली खान
बेलस्कॉट बंगलो नं. 5,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सलमान खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट, बी.जे.रोड,
बंद स्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
समीरा रेड्डी
9/बी, चाँद टेरेस, सेंट एंड्रयूज रोड,
होली फैमिली हॉस्पिटल के सामने,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
संजय दत्त
58, नरगिस दत्त रोड, पाली हिल,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
संजय कपूर
18, अर्जुन हाउस, मैगनम टावर,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सनोबर कबीर
201, शिव करण, ऑफिस यारी रोड,
7 बंगलोज, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सतीश कौशिक
बी/34, ट्रैंकिल ट्रीट, यारी रोड,
वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सतीश शाह
201/202, गुरुकुल, 14, कलानगर,
बांद्रा (पूर्व), मुंबई-51
सौरभ शुक्ला
एफ-19/102, ग्रीन क्रेस्ट, यमुना नगर,
ओशिवारा, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-53
शबाना आजमी
702, सागर सम्राट,
ग्रीनफील्ड रोड, जुहू,
मुंबई-49
शाबाज खान
फ्लैट.-604,
बीआईडीजी-11, स्टारशिप म्हाडा,
ओशिवारा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
शाहरुख खान
मन्नत, 44, लेक्स एंड,
बंदस्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-53
शाहिद कपूर
ए/201, वुडलैंड अपार्टमेंट्स
लोखंडवाला (पश्चिम),
मुंबई-53
शक्ति कपूर
7वीं मंजिल, पाम बीच,
मुंबई-49
शमा सिकंदर
ए-17/104, अल-कैफ, मिल्लत नगर,
लोखंडवाला के निकट, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
शम्मी कपूर
ब्लू हेवन, मलाबार हिल, माउंट प्लीजंट रोड,
मलाबार हिल,
मुंबई-6
शरत सक्सेना
8/ए, तक्षशिला प्लॉट 21,
महाकाली केव्ज रोड, अंधेरी (पूर्व)
मुंबई-93
शरबानी मुखर्जी
ग्रोट्टो विला, 2री हसनाबाद लेन,
सांताक्रुज (पश्चिम),
मुंबई-54
शशि कपूर
112, एटलस अपार्टमेंट्स,
जमुनादास मेहता रोड,
मुंबई-6
शशिकला
16, वल्लभ-बी, सेजल पार्क,
न्यू लिंक रोड, गोरेगाँव (पश्चिम),
मुंबई-104
शत्रुघ्न सिन्हा
49, रामायण, नूतन लक्ष्मी सोसायटी,
9वाँ रोड, जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
शीबा
2502, सिल्वर आर्क, शास्त्री नगर,
अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-58
शैफाली छाया
702, यूनिक पार्क, पद्मा नगर,
न्यू लिंक रोड, मलाड (पश्चिम),
मुंबई-64
शेखर कपूर
ए-5, बीच हाउस, गाँधीग्राम रोड,
हरे रामा हरे कृष्ण के सामने,
जुहू, मुंबई-49
शिखा स्वरूप
309, बी/1, सी विंग, देवाडिगा सोसायटी,
ओम नगर, अंधेरी (पूर्व),
मुंबई-99
शिल्पा शेट्टी
700/डी, आदित्य अपार्टमेंट्स, वरसोवा
टेलीफोन एक्सचेंज के सामने, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-16
शुभा खोटे
शुभांगिनी मिलिट्री रोड,
आर्मी ऑफिस के सामने
इंस्टिट्यूट, जुहू, मुंबई-49
सिमी ग्रेवाल
पलवोवा, 6ठी मंजिल, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल, मुंबई-6
सोनाली बेंद्रे
रॉयल एकार्ड, बीआईडीजी-4, फ्लैट-62
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
सोनाली कुलकर्णी
403, सागर दर्शन, चौथी मंजिल,
जुहू वरसोवा लिंक रोड,
अंधेरी (पश्चिम)मुंबई-53
सोनू निगम
1201, अमरनाथ टावर अमरनाथ कॉम्प्लेक्स,
7 बंगलोज, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
श्रीदेवी
लेन्स व्यू बीआईडीजी, 5वीं मंजिल,
प्रथमेश स्कूल के निकट,
वीरा देसाई रोड, एक्सटेंशन,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
सुचित्रा सेन
52/4/1, प्रथमेश बरुआ
सारणी,
कोलकाता-700019
सुदेश बेरी
11/डी/विलेरॉय पार्क, ठाकुर विलेज,
कांडीवलि (पूर्व), मुंबई-101
सोहैल खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, बी.जे.रोड,
बंद स्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
सुनील शेट्टी
18-बी, पृथ्वी अपार्टमेंट्स, अल्टामाउंट रोड,
मुंबई-26
सुनीता राव
802, विमल स्मृति, प्लॉट नंबर 770,
डिप्टी घांती रोड, दादर पारसी कॉलोनी,
दादर (पूर्व), मुंबई-14
सन्नी देओल
प्लॉट नंबर 22, 11वाँ रोड
जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
सुप्रिया पाठक
61/62, स्काय हेवन, यारी रोड,
वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सुप्रिया पिलगाँवकर
बी/6-9, पियरी अपार्टमेंट्स, स्वामी समर्थ
क्रास रोड-3, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-53
सुरेश ओबेरॉय
5, करतार कुंज, गोल्डन बीच,
रुईया पार्क, जुहू, नियर हरे राम हरे कृष्ण मंदिर,
मुंबई-49
सुष्मिता मुखर्जी
रो हाउस, 11, क्रिस्टल पैलेस,
लिंक रोड, मलाड (पश्चिम),
मुंबई-64
सुष्मिता सेन
601, सद्गुरु सुंदरी अपार्टमेंट्स,
डॉ. अंबेडकर रोड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
स्वरूप संपत
11, सी ब्रीज, 13वाँ रोड,
जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
मे दैनिक राष्ट्रीय हिंदी मेल का सम्पादक हूँ.खुल्लम खुल्ला मेरी अभिव्यक्ति है .अपना विचार खुलेआम दुनिया के सामने व्यक्त करने का यह सशक्त माध्यम है.अरुण बंछोर-मोबाइल -9074275249 ,7974299792 सबको प्यार देने की आदत है हमें, अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे, कितना भी गहरा जख्म दे कोई, उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
सोमवार, 15 फ़रवरी 2010
सितारों का अता-पता( टी - ज़ेड)
तब्बू
1-बी/301, ग्रीन एकड्स, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
तनिशा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तनूजा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तारा देशपांडे
बी-21, जेवर महल, 66,
मरीन ड्राइव,
मुंबई-20
तारा शर्मा1,गुडस्टान, 34, भुलाभाई देसाई फिड,
मुंबई-26
तेजस्विनी कोल्हापुरे
अभिनव बंगलो,
गाँधीग्राम रोड, जुहू
मुंबई-49
टीनू आनंद101, लक्ष्यदीप, चौथा गुलमोहर क्रास रोड,
जेवीपीडी स्कीम, मुंबई-49
टॉम अल्टर
चौथी मंजिल, मेथोडिस्ट सेंटर-21
वायएमसीए रोड,
मुंबई-6
तुषार कपूर
26, ग्रेटर बॉम्बे को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी,
गुलमोहर क्रॉस रोड, नंबर 5, जेवीपीडी स्कीम,
जुहू, मुंबई-49
उदय चोपड़ा5, शाह इंडस्ट्रियल एस्टेट,
वीरा देसाई रोड, फन रिपब्लिक के बगल में,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उपासना सिंह
प्लॉट-54, संतोष बंगलो, आरएससी-4,
एसवीपी नगर, अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उर्मिला मातोंडकर602/बी, परसरामपुरिया टावर,
यमुना नगर, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
वर्षा उसगांवकर
वचन बंगलो, मीरा बाग-14,
सांताक्रुज (पश्चिम)
मुंबई-54
विजू खोटे
55-एच, गोरेगाँवकर रोड,
गामदेवी, मुंबई-7
विकास कलंत्री
2, वहेदना अपार्टमेंट्स,
75, हिल रोड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विक्रम गोखले
104/ए, मातेश्री रेसीडेंसी,
65, प्रार्थना समाज रोड,
विले पार्ले (पूर्व), मुंबई-57
विनोद खन्ना
13/सी, हिपाइआजो, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल, मुंबई-6
विवेक मुशरान
301, मसाबिले, नियर रिक अश.,
पाली रोड बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विवेक ओबेरॉय
301, बंगलो 5, करतार कुंज,
गोल्डन बीच, रुइया पार्क,
जुहू, मुंबई-49
विवेक वासवानी
141/डी, दियामाल पार्क,
कफी परेड,
मुंबई-5
वृजेश हिरजी
1/4, जुहू विशाल सोसायटी,
नार्थ-साउथ रोड नंबर 5,
जेवीपीडी अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-49
वहीदा रहमान
साहित गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, एबीजी रोड,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
यश टोंक
फ्लैट नंबर 40, प्लॉट नंबर 225,
रत्नादीप चारकोप मार्केट, कांडीवलि (पश्चिम),
मुंबई-67
यशपाल शर्मा003-बी, विंग, बी-37, सुरभि
गोकुलधाम, गोरेगाँव (पूर्व),
मुंबई-63
युक्ता मुखी
310/बी, एक्सलेंसी, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
जरीना वहाब
फ्लैट-103, मैग्नम ओपस, नाना नानी पार्क के सामने,
7 बंगलोज, वरसोवा,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-61
जीनत अमान
सोनी अपार्टमेंट, 19, रिबेलो रोड,
मेहबूब स्टूडियो के सामने,
माउंट मैरी हिल,
बांद्रा (पश्चिम), मुंबई-50
1-बी/301, ग्रीन एकड्स, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
तनिशा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तनूजा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तारा देशपांडे
बी-21, जेवर महल, 66,
मरीन ड्राइव,
मुंबई-20
तारा शर्मा1,गुडस्टान, 34, भुलाभाई देसाई फिड,
मुंबई-26
तेजस्विनी कोल्हापुरे
अभिनव बंगलो,
गाँधीग्राम रोड, जुहू
मुंबई-49
टीनू आनंद101, लक्ष्यदीप, चौथा गुलमोहर क्रास रोड,
जेवीपीडी स्कीम, मुंबई-49
टॉम अल्टर
चौथी मंजिल, मेथोडिस्ट सेंटर-21
वायएमसीए रोड,
मुंबई-6
तुषार कपूर
26, ग्रेटर बॉम्बे को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी,
गुलमोहर क्रॉस रोड, नंबर 5, जेवीपीडी स्कीम,
जुहू, मुंबई-49
उदय चोपड़ा5, शाह इंडस्ट्रियल एस्टेट,
वीरा देसाई रोड, फन रिपब्लिक के बगल में,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उपासना सिंह
प्लॉट-54, संतोष बंगलो, आरएससी-4,
एसवीपी नगर, अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उर्मिला मातोंडकर602/बी, परसरामपुरिया टावर,
यमुना नगर, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
वर्षा उसगांवकर
वचन बंगलो, मीरा बाग-14,
सांताक्रुज (पश्चिम)
मुंबई-54
विजू खोटे
55-एच, गोरेगाँवकर रोड,
गामदेवी, मुंबई-7
विकास कलंत्री
2, वहेदना अपार्टमेंट्स,
75, हिल रोड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विक्रम गोखले
104/ए, मातेश्री रेसीडेंसी,
65, प्रार्थना समाज रोड,
विले पार्ले (पूर्व), मुंबई-57
विनोद खन्ना
13/सी, हिपाइआजो, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल, मुंबई-6
विवेक मुशरान
301, मसाबिले, नियर रिक अश.,
पाली रोड बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विवेक ओबेरॉय
301, बंगलो 5, करतार कुंज,
गोल्डन बीच, रुइया पार्क,
जुहू, मुंबई-49
विवेक वासवानी
141/डी, दियामाल पार्क,
कफी परेड,
मुंबई-5
वृजेश हिरजी
1/4, जुहू विशाल सोसायटी,
नार्थ-साउथ रोड नंबर 5,
जेवीपीडी अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-49
वहीदा रहमान
साहित गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, एबीजी रोड,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
यश टोंक
फ्लैट नंबर 40, प्लॉट नंबर 225,
रत्नादीप चारकोप मार्केट, कांडीवलि (पश्चिम),
मुंबई-67
यशपाल शर्मा003-बी, विंग, बी-37, सुरभि
गोकुलधाम, गोरेगाँव (पूर्व),
मुंबई-63
युक्ता मुखी
310/बी, एक्सलेंसी, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
जरीना वहाब
फ्लैट-103, मैग्नम ओपस, नाना नानी पार्क के सामने,
7 बंगलोज, वरसोवा,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-61
जीनत अमान
सोनी अपार्टमेंट, 19, रिबेलो रोड,
मेहबूब स्टूडियो के सामने,
माउंट मैरी हिल,
बांद्रा (पश्चिम), मुंबई-50
ऐश्वर्या
ऐश्वर्या नजर आएँगी मुमताज के रूप में!
मुमताज महल की भूमिका के लिए ऐश्वर्या से अच्छा विकल्प हो ही नहीं सकता। इसलिए बेन किंग्सले ने अपनी आगामी फिल्म ‘ताज’ के लिए ऐश्वर्या को चुना है, जबकि शाहजहाँ की भूमिका वे खुद निभाएँगे।
भारतीय दर्शकों के लिए बेग किंग्सले एक परिचित नाम है क्योंकि ‘गाँधी’ फिल्म में उन्होंने महात्मा गाँधी की भूमिका निभाई थी। 27 वर्ष बाद बेन फिर भारत लौटे हैं। वे मुगल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म बनाने की सोच रहे हैं।
इस फिल्म की चर्चा अरसे से है और किंग्सले ने इस विषय पर काफी रिसर्च किया है। सूत्रों के मुताबिक सब तय हो चुका है और जल्दी ही इस बारे में घोषणा की जाएगी। खूबसूरत ऐश्वर्या के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका होगी।
जब ऐश्वर्या मिस वर्ल्ड बनीं
19 नवंबर 1994 वह दिन था, जब करोड़ों हिन्दुस्तानी टीवी के आगे आँखें लगाए बैठे थे। ये सारी आँखें उस बिल्लौरी आँखों वाली लड़की को ढूँढ रही थीं, जिसने अपने अद्वितीय सौंदर्य से हर किसी को अचंभित कर दिया था।
दक्षिण अफ्रीका के सनसिटी में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के आयोजक ऐश्वर्या राय नामक भारतीय सुंदरी के विलक्षण रूप पर हतप्रभ थे। यह नवयौवना स्पर्धा के आरंभिक चरण में मिस फोटोजनिक का खिताब जीत चुकी थी और ज्यादातर विश्लेषकों का मत था कि प्रतियोगिता का मुख्य खिताब वही जीतेगी। इसीलिए निर्णायकों ने जब विश्व सुंदरी स्पर्धा की विजेता के बतौर ऐश्वर्या राय म लिया तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ, सिवाय खुद 20 साल की उस तरुणी के, जो हाथों में अपना चेहरा छुपाए खुशी के आँसू छलका रही थी। नितांत मासूमियत के साथ व्यक्त किया गया यह हाव-भाव बाद में सौंदर्य प्रतियोगिताओं की हर स्पर्धा के लिए चिर-परिचित शैली बन गया।
ऐश्वर्या के मिस वर्ल्ड चुने जाते ही खार (मुंबई) स्थित उन के बंगले पर बधाइयाँ आना शुरू हो गईं। ऐश की माँ वृंदा अपने हाथों से सबको मिठाई बाँट रही थी। आम हिन्दुस्तानी यह देखकर अचंभित था कि एक ही वर्ष में दो भारतीय बालाएँ सुष्मिता !! और ऐश्वर्या राय मिस यूनिवर्स और मिस वर्ल्ड जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने में कैसे सफल हो गईं। तीन दशक बाद कोई भारतीय लड़की विश्व सुंदरी का ताज पहनने में कामयाब हुई थी। यह पल हर देशवासी के लिए गर्व का भी अवसर था और हैरत का भी।
कुछ राजनीतिक, सामाजिक विश्लेषकों ने कयास लगाया कि यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत के विशाल प्रसाधन बाजार में सेंध लगाने की साजिश है। जो भी हो, ऐश्वर्या राय का विश्व सुंदरी बनना एक महत्वपूर्ण घटना थी। खासकर बॉलीवुड के लिए, क्योंकि इसके बाद ही भारतीय सिनेमा को अगली सुपर तारिका मिली।
ऐश्वर्या के लिए मिस वर्ल्ड तक का सफर आसान भी था और मुश्किल भी। आसान इसलिए कि अपनी दैवीय सुंदरता की वजह से वे स्पर्धा में भाग लेने से पूर्व ही विजेता घोषित की जा चुकी थीं। मुश्किल इस वजह से कि अपनी ही एक हमवतन कोमलांगी के कारण उन्हें ब्रह्मांड सुंदरी के खिताब से वंचित रहना पड़ा। इन दोनों अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए प्रतियोगियों का चयन मिस इंडिया प्रतियोगिता के माध्यम से किया जाता है।
इस स्पर्धा की विजेता आमतौर पर मिस यूनिवर्स के खिताब हेतु भेजी जाती है, जबकि उपविजेता को मिस वर्ल्ड स्पर्धा में भाग लेना होता है। फेमिना मिस इंडिया स्पर्धा के आयोजक तक मान रहे थे कि ऐश्वर्या ही विजेता बनेंगी। लेकिन स्पर्धा के प्रश्नोत्तर खंड में बंगाली बाला सुष्मिता सेन दक्षिण भारतीय ऐश्वर्या से बाजी मार गईं। सुष्मिता को विजेता चुना गया और ऐश को उपविजेता।
मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के दौरान ऐश से पूछा गया कि वे खिताब जीतने पर क्या करेंगी? ऐश का जवाब था - 'निराश्रित बच्चों की सेवा करूँगी?' प्रतियोगिता जीतने के बाद ऐश्वर्या को संयुक्त राष्ट्र ने अपना सांस्कृतिक राजदूत नियुक्त किया और उन्हें निर्धन बच्चों की सेवा का दायित्व सौंपा।
दूसरी ओर भारत में कुछ महिला संगठन विश्व सुंदरी स्पर्धा पर अश्लीलता का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध की माँग कर रहे थे। ऐश ने इन्हें जवाब दिया कि वे नारेबाजी या आलोचना के बजाय जरूरतमंदों के बीच जाकर काम करें। ऐश और सुष्मिता से प्रेरित होकर लारा दत्ता, प्रियंका जैसी भारतीय सुंदरियों ने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य स्पर्धाओं में खिताब जीते। ऐश्वर्या के विश्व सुंदरी बनने का ही प्रताप था कि अमिताभ बच्चन अपनी एबीसीएल कंपनी के साथ मिस वर्ल्ड स्पर्धा के प्रायोजन हेतु आगे आए।
मुंबई की ओबेरॉय होटल में कैंसर पीड़ितों के सहायतार्थ आयोजित एक फैशन-शो से ऐश्वर्या राय ने ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा था। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी वे पूरी दुनिया में चर्चित हो जाएँगी। मिस वर्ल्ड चुने जाने के बाद ऐश्वर्या को सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात से हुई कि कुछ समालोचकों ने उन्हें बार्बी डॉल कहना शुरू कर दिया।
बॉलीवुड में लंबा समय गुजारने के बाद ऐश्वर्या यह साबित कर चुकी हैं कि उनमें सुंदरता के अलावा भी बहुत कुछ है, जो रजतपट की श्वेत आभा पर सतरंगी किरदारों के साथ उभरकर आता है। सूरत और सीरत दोनों पैमानों पर ऐश विजेता सिद्ध हुई हैं। बॉलीवुड भी बधाई का पात्र है कि उसने इस स्वप्न सुंदरी के भीतर छुपी प्रतिभा को पहचान कर निखरने का मौका दिया।
मुमताज महल की भूमिका के लिए ऐश्वर्या से अच्छा विकल्प हो ही नहीं सकता। इसलिए बेन किंग्सले ने अपनी आगामी फिल्म ‘ताज’ के लिए ऐश्वर्या को चुना है, जबकि शाहजहाँ की भूमिका वे खुद निभाएँगे।
भारतीय दर्शकों के लिए बेग किंग्सले एक परिचित नाम है क्योंकि ‘गाँधी’ फिल्म में उन्होंने महात्मा गाँधी की भूमिका निभाई थी। 27 वर्ष बाद बेन फिर भारत लौटे हैं। वे मुगल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म बनाने की सोच रहे हैं।
इस फिल्म की चर्चा अरसे से है और किंग्सले ने इस विषय पर काफी रिसर्च किया है। सूत्रों के मुताबिक सब तय हो चुका है और जल्दी ही इस बारे में घोषणा की जाएगी। खूबसूरत ऐश्वर्या के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका होगी।
जब ऐश्वर्या मिस वर्ल्ड बनीं
19 नवंबर 1994 वह दिन था, जब करोड़ों हिन्दुस्तानी टीवी के आगे आँखें लगाए बैठे थे। ये सारी आँखें उस बिल्लौरी आँखों वाली लड़की को ढूँढ रही थीं, जिसने अपने अद्वितीय सौंदर्य से हर किसी को अचंभित कर दिया था।
दक्षिण अफ्रीका के सनसिटी में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के आयोजक ऐश्वर्या राय नामक भारतीय सुंदरी के विलक्षण रूप पर हतप्रभ थे। यह नवयौवना स्पर्धा के आरंभिक चरण में मिस फोटोजनिक का खिताब जीत चुकी थी और ज्यादातर विश्लेषकों का मत था कि प्रतियोगिता का मुख्य खिताब वही जीतेगी। इसीलिए निर्णायकों ने जब विश्व सुंदरी स्पर्धा की विजेता के बतौर ऐश्वर्या राय म लिया तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ, सिवाय खुद 20 साल की उस तरुणी के, जो हाथों में अपना चेहरा छुपाए खुशी के आँसू छलका रही थी। नितांत मासूमियत के साथ व्यक्त किया गया यह हाव-भाव बाद में सौंदर्य प्रतियोगिताओं की हर स्पर्धा के लिए चिर-परिचित शैली बन गया।
ऐश्वर्या के मिस वर्ल्ड चुने जाते ही खार (मुंबई) स्थित उन के बंगले पर बधाइयाँ आना शुरू हो गईं। ऐश की माँ वृंदा अपने हाथों से सबको मिठाई बाँट रही थी। आम हिन्दुस्तानी यह देखकर अचंभित था कि एक ही वर्ष में दो भारतीय बालाएँ सुष्मिता !! और ऐश्वर्या राय मिस यूनिवर्स और मिस वर्ल्ड जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने में कैसे सफल हो गईं। तीन दशक बाद कोई भारतीय लड़की विश्व सुंदरी का ताज पहनने में कामयाब हुई थी। यह पल हर देशवासी के लिए गर्व का भी अवसर था और हैरत का भी।
कुछ राजनीतिक, सामाजिक विश्लेषकों ने कयास लगाया कि यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत के विशाल प्रसाधन बाजार में सेंध लगाने की साजिश है। जो भी हो, ऐश्वर्या राय का विश्व सुंदरी बनना एक महत्वपूर्ण घटना थी। खासकर बॉलीवुड के लिए, क्योंकि इसके बाद ही भारतीय सिनेमा को अगली सुपर तारिका मिली।
ऐश्वर्या के लिए मिस वर्ल्ड तक का सफर आसान भी था और मुश्किल भी। आसान इसलिए कि अपनी दैवीय सुंदरता की वजह से वे स्पर्धा में भाग लेने से पूर्व ही विजेता घोषित की जा चुकी थीं। मुश्किल इस वजह से कि अपनी ही एक हमवतन कोमलांगी के कारण उन्हें ब्रह्मांड सुंदरी के खिताब से वंचित रहना पड़ा। इन दोनों अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए प्रतियोगियों का चयन मिस इंडिया प्रतियोगिता के माध्यम से किया जाता है।
इस स्पर्धा की विजेता आमतौर पर मिस यूनिवर्स के खिताब हेतु भेजी जाती है, जबकि उपविजेता को मिस वर्ल्ड स्पर्धा में भाग लेना होता है। फेमिना मिस इंडिया स्पर्धा के आयोजक तक मान रहे थे कि ऐश्वर्या ही विजेता बनेंगी। लेकिन स्पर्धा के प्रश्नोत्तर खंड में बंगाली बाला सुष्मिता सेन दक्षिण भारतीय ऐश्वर्या से बाजी मार गईं। सुष्मिता को विजेता चुना गया और ऐश को उपविजेता।
मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के दौरान ऐश से पूछा गया कि वे खिताब जीतने पर क्या करेंगी? ऐश का जवाब था - 'निराश्रित बच्चों की सेवा करूँगी?' प्रतियोगिता जीतने के बाद ऐश्वर्या को संयुक्त राष्ट्र ने अपना सांस्कृतिक राजदूत नियुक्त किया और उन्हें निर्धन बच्चों की सेवा का दायित्व सौंपा।
दूसरी ओर भारत में कुछ महिला संगठन विश्व सुंदरी स्पर्धा पर अश्लीलता का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध की माँग कर रहे थे। ऐश ने इन्हें जवाब दिया कि वे नारेबाजी या आलोचना के बजाय जरूरतमंदों के बीच जाकर काम करें। ऐश और सुष्मिता से प्रेरित होकर लारा दत्ता, प्रियंका जैसी भारतीय सुंदरियों ने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य स्पर्धाओं में खिताब जीते। ऐश्वर्या के विश्व सुंदरी बनने का ही प्रताप था कि अमिताभ बच्चन अपनी एबीसीएल कंपनी के साथ मिस वर्ल्ड स्पर्धा के प्रायोजन हेतु आगे आए।
मुंबई की ओबेरॉय होटल में कैंसर पीड़ितों के सहायतार्थ आयोजित एक फैशन-शो से ऐश्वर्या राय ने ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा था। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी वे पूरी दुनिया में चर्चित हो जाएँगी। मिस वर्ल्ड चुने जाने के बाद ऐश्वर्या को सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात से हुई कि कुछ समालोचकों ने उन्हें बार्बी डॉल कहना शुरू कर दिया।
बॉलीवुड में लंबा समय गुजारने के बाद ऐश्वर्या यह साबित कर चुकी हैं कि उनमें सुंदरता के अलावा भी बहुत कुछ है, जो रजतपट की श्वेत आभा पर सतरंगी किरदारों के साथ उभरकर आता है। सूरत और सीरत दोनों पैमानों पर ऐश विजेता सिद्ध हुई हैं। बॉलीवुड भी बधाई का पात्र है कि उसने इस स्वप्न सुंदरी के भीतर छुपी प्रतिभा को पहचान कर निखरने का मौका दिया।
खबर-संसार
अभिषेक-ऐश की जोड़ी अव्वल
'सिलेब्रिटी कपल' में इस समय अभिषेक और ऐश्वर्या बच्चन की जोड़ी का डंका बज रहा है और अधिकांश लोग इस दंपति को ‘हैप्पीली मैरिड’ जोड़ी मानते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। यह खूबसूरत जोड़ा युवाओं में इस कदर लोकप्रिय है कि इसने अमिताभ और जया बच्चन को भी पीछे छोड़ दिया है।
पिछले दिनों करवाए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों से यह बात सामने आई है, जिसमें अभिषेक और ऐश की जोड़ी को सर्वेक्षण के दायरे में आए 32 फीसदी लोगों ने 'फेवरेट सिलेब्रिटी कपल' चुना।
किंग खान और उनकी पत्नी गौरी को सर्वेक्षण में अभि-ऐश के बाद सर्वाधिक 29 फीसदी मत मिले, जबकि बिग बी और जया बच्चन की जोड़ी को 20 फीसदी लोगों ने अपनी पसंदीदा जोड़ी चुना है और तीसरा स्थान दिया है।
सर्वेक्षण में सर्वाधिक हैरानी की बात यह है कि ढलती उम्र में भी बिग बी और जया बच्चन को लोग 'हैप्पीली मैरिड कपल' की श्रेणी में रखते हुए उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।
सुखिर्यों के लिहाज से अभिषेक से आगे रहने वाले किंग खान और उनकी पत्नी गौरी के करीबी प्रतिद्वंद्वी आमिर खान और किरण खान को लोगों ने चार फीसदी मतों के साथ चौथे स्थान पर रखा हैं। इसका मतलब साफ है कि लोग आमिर को तो एक उम्दा कलाकार मानते हैं लेकिन घरेलू मोर्चे पर वे लोगों की पसंद पर खरे नहीं उतरे।
इस पायदान पर नवविवाहित जोड़ी राजस्थान रॉयल्स कपल राज और शिल्पा को मात्र चार फीसदी जबकि मुन्ना भाई यानी संजय और मान्यता को मात्र दो फीसदी लोगों ने 'हैप्पीली मैरिड' दंपति की श्रेणी में रखा है।
इंटरनेट मैट्रिमोनियिल साइट शादी डॉट कॉम द्वारा वेलेंटाइन डे से पूर्व करवाए एक इस सर्वेक्षण से और भी कई रोचक बातें उभर कर सामने आई हैं।
सर्वेक्षण दर्शाता है कि शादी डॉट कॉम द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण में दुनियाभर से 3.6 लाख लोगों ने भाग लिया और इस साइट के साथ ही फेसबुक पर अपने विचार व्यक्त किए।
सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार वेलेंटाइन क्विज में भाग लेने वाले 42.64 फीसदी लोगों ने अपने बारे में खुलासा किया कि वे प्यार के नाम पर फ्लर्ट करते हैं जबकि 40.54 फीसदी ने कहा कि वे बेहद केयर करने वाले हैं।
9.31 फीसदी ने कहा कि वे अपने प्रियतम को लुभाने के लिए रोमांटिक होना पसंद करेंगे जबकि केवल 7.51 फीसदी ने कहा कि सही जीवनसाथी चुनने में वह खुशमिजाजी को काफी महत्व देते हैं।
ब्लॉगिंग दिलाती है मुफ्त की पब्लिसिटी
विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर और भारतीय राजनीति को ‘कलरफुल एंड ड्रामेटिक’ बनाने वाले अमरसिंह से लेकर राज्य स्तर के विधायक और पार्षद तक आजकल ब्लॉगिंग में व्यस्त हैं और ‘मुफ्त की पब्लिसिटी’ लूट रहे हैं।
मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन और प्रचार की बड़ी कीमत अदा करनी पड़ती है और इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं लेकिन इंटरनेट स्पेस एकदम फ्री है। इस प्रकार नेता मुफ्त के प्रचार के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ सहायक संपादक बाल मुकुंद का कहना है कि नेता मुफ्त पब्लिसिटी, युवाओं तक पहुँच और अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बगावत, तीनों ही लक्ष्यों को एक साथ साधने के लिए ब्लॉग का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक नया जरिया है जिससे वे अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुँचाना चाहते हैं।
एक नेता ने कहा कि ब्लॉगिंग अपनी बात रखने का सर्वाधिक सरल तरीका है क्योंकि इसमें 'हींग लगे न फिटकरी और रंग भी चोखा' वाली बात है।
उधर, सर्च इंजन गूगल से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इंटरनेट स्पेस विशाल और पूरी तरह शुल्क मुक्त है। ऐसे में किसी को इसके इस्तेमाल से रोकने का कहीं कोई प्रावधान नहीं है और इसका इस्तेमाल पूरी तरह स्वविवेक पर आधारित है।
NDनईदुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता ने कहा कि नव धनाढ्य मध्य वर्ग से जुड़े नेताओं का यह नया शगल है जिससे कुछ होने जाने वाला नहीं है क्योंकि आम जनता आज भी अखबार ही पढ़ती है। उनका कहना है कि आडवाणी और राहुल गाँधी जैसे बड़े नेताओं को यह दिखाने के लिए उनके दलों के नेता ब्लॉगिंग कर रहे हैं कि वे बहुत बड़े टेक्नोकेट्र हैं।
कांग्रेस नेता शशि थरूर संभवत: ऐसे पहले केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने अपनी ब्लॉगिंग के जरिए राजनीतिक हलचल पैदा की। थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा शुरू किए गए किफायत अभियान के संदर्भ में इकॉनोमी क्लास में यात्रा करने को सोशल नेटवर्किंग साइट ‘ट्विटर’ पर कैटल क्लास कहकर विवाद खड़ा कर दिया था।
इन दिनों पूर्व सपा नेता अमरसिंह का ब्लॉग भी चर्चा में है और उन्होंने तो पिछले दिनों एक समारोह तक में कह डाला कि सिंगापुर में गुर्दो के ऑपरेशन के बाद खाली समय में ब्लॉगिंग करना और ब्लॉग में कांग्रेस तथा सोनिया गांधी की तारीफ करना ही सपा से उनकी विदाई का कारण बना।
भाजपा के फायर ब्रांड नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विजय कुमार मल्होत्रा भी ट्विटर पर विराजमान हैं। राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने भी कई साल पहले ब्लॉगिंग शुरू की थी लेकिन पिछले कुछ साल से उनका ब्लॉग अपडेट नहीं हुआ है। उधर कांग्रेसी नेता प्रिया दत्त, मिलिंद देवड़ा तथा सचिन पायलट की भी वेबसाइट हैं। मिलिंद तो फेसबुक पर भी उपलब्ध हैं।
न केवल केंद्रीय स्तर के नेता बल्कि कई दक्षिण भारतीय राज्यों के मंत्रियों और विधायकों के बीच भी ब्लॉगिंग जोर पकड़ रही है, जिनमें कर्नाटक से भाजपा के एस सुरेश कुमार, राजीव चंद्रशेखर, के रघुपति भट्ट, तमिलनाडु से द्रमुक नेता तथा मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के पुत्र एमके स्टालिन आदि प्रमुख हैं।
'सिलेब्रिटी कपल' में इस समय अभिषेक और ऐश्वर्या बच्चन की जोड़ी का डंका बज रहा है और अधिकांश लोग इस दंपति को ‘हैप्पीली मैरिड’ जोड़ी मानते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। यह खूबसूरत जोड़ा युवाओं में इस कदर लोकप्रिय है कि इसने अमिताभ और जया बच्चन को भी पीछे छोड़ दिया है।
पिछले दिनों करवाए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों से यह बात सामने आई है, जिसमें अभिषेक और ऐश की जोड़ी को सर्वेक्षण के दायरे में आए 32 फीसदी लोगों ने 'फेवरेट सिलेब्रिटी कपल' चुना।
किंग खान और उनकी पत्नी गौरी को सर्वेक्षण में अभि-ऐश के बाद सर्वाधिक 29 फीसदी मत मिले, जबकि बिग बी और जया बच्चन की जोड़ी को 20 फीसदी लोगों ने अपनी पसंदीदा जोड़ी चुना है और तीसरा स्थान दिया है।
सर्वेक्षण में सर्वाधिक हैरानी की बात यह है कि ढलती उम्र में भी बिग बी और जया बच्चन को लोग 'हैप्पीली मैरिड कपल' की श्रेणी में रखते हुए उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।
सुखिर्यों के लिहाज से अभिषेक से आगे रहने वाले किंग खान और उनकी पत्नी गौरी के करीबी प्रतिद्वंद्वी आमिर खान और किरण खान को लोगों ने चार फीसदी मतों के साथ चौथे स्थान पर रखा हैं। इसका मतलब साफ है कि लोग आमिर को तो एक उम्दा कलाकार मानते हैं लेकिन घरेलू मोर्चे पर वे लोगों की पसंद पर खरे नहीं उतरे।
इस पायदान पर नवविवाहित जोड़ी राजस्थान रॉयल्स कपल राज और शिल्पा को मात्र चार फीसदी जबकि मुन्ना भाई यानी संजय और मान्यता को मात्र दो फीसदी लोगों ने 'हैप्पीली मैरिड' दंपति की श्रेणी में रखा है।
इंटरनेट मैट्रिमोनियिल साइट शादी डॉट कॉम द्वारा वेलेंटाइन डे से पूर्व करवाए एक इस सर्वेक्षण से और भी कई रोचक बातें उभर कर सामने आई हैं।
सर्वेक्षण दर्शाता है कि शादी डॉट कॉम द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण में दुनियाभर से 3.6 लाख लोगों ने भाग लिया और इस साइट के साथ ही फेसबुक पर अपने विचार व्यक्त किए।
सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार वेलेंटाइन क्विज में भाग लेने वाले 42.64 फीसदी लोगों ने अपने बारे में खुलासा किया कि वे प्यार के नाम पर फ्लर्ट करते हैं जबकि 40.54 फीसदी ने कहा कि वे बेहद केयर करने वाले हैं।
9.31 फीसदी ने कहा कि वे अपने प्रियतम को लुभाने के लिए रोमांटिक होना पसंद करेंगे जबकि केवल 7.51 फीसदी ने कहा कि सही जीवनसाथी चुनने में वह खुशमिजाजी को काफी महत्व देते हैं।
ब्लॉगिंग दिलाती है मुफ्त की पब्लिसिटी
विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर और भारतीय राजनीति को ‘कलरफुल एंड ड्रामेटिक’ बनाने वाले अमरसिंह से लेकर राज्य स्तर के विधायक और पार्षद तक आजकल ब्लॉगिंग में व्यस्त हैं और ‘मुफ्त की पब्लिसिटी’ लूट रहे हैं।
मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन और प्रचार की बड़ी कीमत अदा करनी पड़ती है और इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं लेकिन इंटरनेट स्पेस एकदम फ्री है। इस प्रकार नेता मुफ्त के प्रचार के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ सहायक संपादक बाल मुकुंद का कहना है कि नेता मुफ्त पब्लिसिटी, युवाओं तक पहुँच और अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बगावत, तीनों ही लक्ष्यों को एक साथ साधने के लिए ब्लॉग का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक नया जरिया है जिससे वे अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुँचाना चाहते हैं।
एक नेता ने कहा कि ब्लॉगिंग अपनी बात रखने का सर्वाधिक सरल तरीका है क्योंकि इसमें 'हींग लगे न फिटकरी और रंग भी चोखा' वाली बात है।
उधर, सर्च इंजन गूगल से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इंटरनेट स्पेस विशाल और पूरी तरह शुल्क मुक्त है। ऐसे में किसी को इसके इस्तेमाल से रोकने का कहीं कोई प्रावधान नहीं है और इसका इस्तेमाल पूरी तरह स्वविवेक पर आधारित है।
NDनईदुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता ने कहा कि नव धनाढ्य मध्य वर्ग से जुड़े नेताओं का यह नया शगल है जिससे कुछ होने जाने वाला नहीं है क्योंकि आम जनता आज भी अखबार ही पढ़ती है। उनका कहना है कि आडवाणी और राहुल गाँधी जैसे बड़े नेताओं को यह दिखाने के लिए उनके दलों के नेता ब्लॉगिंग कर रहे हैं कि वे बहुत बड़े टेक्नोकेट्र हैं।
कांग्रेस नेता शशि थरूर संभवत: ऐसे पहले केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने अपनी ब्लॉगिंग के जरिए राजनीतिक हलचल पैदा की। थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा शुरू किए गए किफायत अभियान के संदर्भ में इकॉनोमी क्लास में यात्रा करने को सोशल नेटवर्किंग साइट ‘ट्विटर’ पर कैटल क्लास कहकर विवाद खड़ा कर दिया था।
इन दिनों पूर्व सपा नेता अमरसिंह का ब्लॉग भी चर्चा में है और उन्होंने तो पिछले दिनों एक समारोह तक में कह डाला कि सिंगापुर में गुर्दो के ऑपरेशन के बाद खाली समय में ब्लॉगिंग करना और ब्लॉग में कांग्रेस तथा सोनिया गांधी की तारीफ करना ही सपा से उनकी विदाई का कारण बना।
भाजपा के फायर ब्रांड नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विजय कुमार मल्होत्रा भी ट्विटर पर विराजमान हैं। राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने भी कई साल पहले ब्लॉगिंग शुरू की थी लेकिन पिछले कुछ साल से उनका ब्लॉग अपडेट नहीं हुआ है। उधर कांग्रेसी नेता प्रिया दत्त, मिलिंद देवड़ा तथा सचिन पायलट की भी वेबसाइट हैं। मिलिंद तो फेसबुक पर भी उपलब्ध हैं।
न केवल केंद्रीय स्तर के नेता बल्कि कई दक्षिण भारतीय राज्यों के मंत्रियों और विधायकों के बीच भी ब्लॉगिंग जोर पकड़ रही है, जिनमें कर्नाटक से भाजपा के एस सुरेश कुमार, राजीव चंद्रशेखर, के रघुपति भट्ट, तमिलनाडु से द्रमुक नेता तथा मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के पुत्र एमके स्टालिन आदि प्रमुख हैं।
रविवार, 14 फ़रवरी 2010
साहित्यिक
मैं हूं न!
मुकुंद बाबू की आज अन्तिम विदाई भी हो गई। सभी नाते-रिश्तेदार पूर्ण तृप्त हो करुणा जी की झोली में संवेदनाएं उडेल अपने-अपने नीडों की ओर उड गए। बेटी धरा भी अपने पति व बच्चों के साथ मां से मिलकर लौट गई। इस सबसे निबटते रात उतरने लगी। रह गया केवल हार्दिक और उसके बच्चे। अब चिंता हो आई- मम्मी अकेली कैसे रहेंगी? जब तक पापा रहे कोई चिन्ता नहीं थी। दोनों मिलकर आराम से रह रहे थे। अब क्या करे वह? मम्मी से क्या कहे वह? पता नहीं मम्मी इतनी जल्दी साथ भी चलेगी या नहीं? पूरी रात यही सोचते करवटों में कट गई। इससे पहले मां को लेकर कभी चिन्ता नहीं हुई थी। कुछ भी कहते संकोच नहीं हुआ था, पर पापा के जाने के बाद मम्मी को देखना रहता है, उसके मुंह से शब्द नहीं फूटते। मां के कंधे पर सिर रखने वाला बेटा अब मां का सिर अपने कंधे पर टिका लेता है। मैं हूं न मां, आप चिन्ता क्यों करती हैं? मैं चिंता क्या करूंगी? पर चालीस साल का साथ छूटा है- अच्छा-बुरा, हंसते-रोते, लडते-झगडते- कैसे भुला सकती हूं। मम्मी, मैंने भी पापा को खोया है। उनके रहते मैं कितना निश्चिन्त था। मेरी हर समस्या का समाधान उनके पास था। पापा हाथ छुडाकर चले गए हैं। कितना अकेला हो गया हूं मैं! और मां-बेटे दोनों अपने-अपने आंसू बहने देते। आकर उन्हें संभालती। बच्चे कहते- दादी मां, आप और पापा रोएंगे तो हम भी रोएंगे। हमें भी अपने दादा जी चाहिए। उनके जाने से हमारी खुशी छिन गई है। करुणा जी झट अपने आंसू पोंछ लेतीं और मुस्कराकर कहतीं- कहां रो रही हूं। बस तुम्हारे दादाजी याद आ गए। सबको उदास देखकर बच्चे भी उदास रहते। पहले की तरह मस्ती नहीं करते और न कोई चीज लेने की जिद्द। जैसे बच्चे भी समझदार हो गए। करुणा जी को नहीं छोडते क्योंकि वे सारा समय औरतों से घिरी मुख नीचा किए बैठी रहती हैं या रोती रहती हैं। अजीब सा माहौल है। बहुत हिम्मत कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आपसे कुछ कहना है। तेरी उलझन मैं समझ रही हूं हार्दिक। जो तू पूछना या कहना चाहता है मुझे मालूम है। जो तेरी उलझन है वह मेरी भी है। तू इसे आज महसूस कर रहा है, मैंने कई दिन पहले महसूस कर लिया था। तेरी छोटी मौसी वत्सला कुछ समय मेरे पास रहेगी। तू निश्चिन्त होकर जा। और आगे की बाद में सोचेंगे। वह कल शाम तक आ जाएगी। वह तो ठीक है मम्मी, लेकिन आपको इस अवस्था में अकेले कैसे छोड सकता हूं, और इतनी जल्दी चलने को भी कैसे कह सकता हूं। तू इतनी चिन्ता मत कर। कहा न कि वत्सला रहेगी मेरे पास। कुछ वक्त लगेगा, धीरे-धीरे जीवन पटरी पर आ जाएगा। एकदम घर में ताला लगाकर तेरे साथ चल भी नहीं सकती। इस घर का आदमी मेरा पति, तेरा पिता गया है। कोई बाहर का नहीं। अभी उनके प्रति मेरे कुछ कर्तव्य हैं। जिन्हें पूरा करना है। जब तेरी जरूरत होगी, फोन पर बता दूंगी। कल वत्सला के आने पर तू निकल जाना। तब तक हलवाई, टैन्ट वालों या अन्य किसी का हिसाब करना हो निबटा लेना। अपना सामान तैयार कर ले। खुशी को भी बता दे। संकोच करने से काम नहीं चलने वाला। कुछ देर बैठकर हार्दिक उठ गया। फिर लौटकर करुणाजी को एक लिफाफा देकर बोला- मम्मी, इसे मेरे जाने के बाद खोलना। करुणा जी ने लिफाफा अलमारी में रख लिया। वत्सला के आने पर हार्दिक चला गया। करुणा जी ने लिफाफा खोलकर देखा, हजार-हजार के दस नोटों के साथ एक छोटी सी चिट भी थी- जल्दी ही आऊंगा। करुणाजी ने लिफाफा आंखों से लगाया और जहां से निकाला था वहीं रख दिया। आंखें नम हो आई। कभी धरा आ जाती, कभी वत्सला और कभी हार्दिक। हार्दिक जब भी आता करुणा जी को एक लिफाफा थमा जाता और वे संभालकर रख लेंती। इसी प्रकार एक साल निकल गया। मुकुन्द जी की बरसी पर हार्दिक के आने से पहले ही वत्सला, धरा और करुणा जी ने सारी व्यवस्था कर ली। हार्दिक बरसी की पूर्व संध्या पर पहुंच गया। उसे आश्चर्य हुआ- मैं आ तो रहा था मम्मी। आपने सारा आयोजन कैसे किया? इतने सारे रुपए की व्यवस्था कहां से की? मैंने कुछ नहीं किया। सब तेरी बहिन और मौसी ने किया है। पैसे सारे तूने ही खर्च किए हैं? मैंने..? आश्चर्य से पूछा हार्दिक ने। हां, जब भी तू आता, मुझे रुपए थमा जाता। बस उन्हीं रुपयों से सब व्यवस्था हो गई। और मम्मी, आपका खर्चा..? सब चल गया। कुछ तेरे पापा छोड गए थे, कुछ पेंशन मिल जाती है। शायद तूने इधर नहीं सोचा। अब सारी चिन्ता छोड। सब आराम से चल रहा है। करुणाजी को लोगों ने समझाया कि बहू-बेटे के पास जाकर रहने से स्वयं को अपमानित कराना है। दो-चार दिन के लिए जाओ तो बहू से सम्मान मिलता है और जब हमेशा के लिए जाकर रहने लगो तो वही सम्मान अपमान में बदल जाता है। यह बात कहीं न कहीं करुणा जी के मन में भी थी। वे बहाने बनाकर हार्दिक के साथ जाना टालती रहीं। एक दिन थक कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आप क्या समझती हैं मैं आपका ध्यान नहीं रख सकता। यदि आप कभी अपमानित महसूस करें तो मुझे बता देना। मैं आपको यहीं छोड जाऊंगा। आपके रहते यह घर नहीं बेचूंगा। एक बार आप अपने बच्चों पर विश्वास करके देखिए। खुशी आपका इंतजार कर रही है। अब स्वयं को नहीं रोक सकी करुणा जी। अपना जरूरी सामान पैक किया। घर का ताला लगा दिया और स्वयं हार्दिक के साथ आ गई। करुणा जी के कमरे में ए.सी. लगा था, कलर टी.वी. था, अटैच बाथरूम यानि सुविधा का सभी सामान था। बच्चों ने करुणा जी को हांथों-हाथ लिया। उन्हें कोई किसी काम में हाथ न लगाने देता। पूरे समय काम करने के लिए नौकर जो था। बच्चे स्कूल से लौटकर दादी मां-दादी मां कहकर उन्हें घेर लेते। बच्चे दादी मां के साथ खूब खुश रहते। हार्दिक और खुशी भी करुणा जी के आने से काफी निश्चिन्त हो गए थे। वीक एंड पर सब घूमने जाते। करुणा जी बच्चों को होमवर्क करा देतीं। उनके साथ लूडो, कैरम, अन्ताक्षरी खेलतीं, कहानियां सुनातीं। करुणा जी उन्हें रस्सी घुमाना सिखातीं। धीरे-धीरे दस-बारह बच्चों का ग्रुप बन गया। करुणा जी उन्हें रोज नए-नए खेल खिलातीं। कभी कहानियां सुनातीं। बच्चे अपने प्रश्नों के उत्तर करुणाजी से पाकर सन्तुष्ट होते। करुणाजी कभी-कभी अपने साथ टॉफी, चाकलेट्स या बिस्कुट के पैकेट ले आतीं और बच्चों में बांट देती। बच्चों की मम्मियों से भी उनकी दोस्ती हो गई। बच्चे अपने जन्मदिन पर करुणाजी को अपने घर निमंत्रित करते अथवा उनके घर कोई उत्सव होता तो करुणा जी को न्यौता अवश्य मिलता। वे इला और कार्तिक के साथ चली जातीं। धीरे-धीरे सभी बच्चे अपना होमवर्क भी करुणा जी के पास बैठकर पूरा करने लगे। उन्हें पढाते हुए समय का पता ही न चलता। कब पंख लगाकर गुजर जाता। कभी दो-चार दिन के लिए घर लौटतीं तो बच्चे रोज फोन करते- अम्मा जी, कब लौट रही हैं? हमारा मन नहीं लग रहा। आप जल्दी आइए। करुणाजी की आंखें भर आतीं। ये कैसा बंधन? एक टूटा दूसरा जुड गया। आगे वक्त कैसे कटेगा वे इस चिन्ता से मुक्त हो गई। करुणा जी के लौटने पर बच्चे खूब खुश होते। धीरे-धीरे पुराने रूटीन पर लौट आते। एक दिन बच्चों की मम्मियां उनके पास आई और उनके पैरों में एक-एक लिफाफा रख दिया। उन्हें बडा आश्चर्य हुआ। उत्सुकता भी हुई कि देखें लिफाफे में क्या है? उन्होंने एक लिफाफा खोला सौ-सौ के तीन नोट रखे थे। सभी लिफाफों में रुपए थे। उन्होंने पूछा- आप सब ये रुपए मुझे क्यों दे रही हैं? मांजी, बच्चे जब से आपके सम्पर्क में आए हैं, ट्यूशन पढना छोड दिया है। आप जो भी पढाती हैं, बहुत ध्यान से सुनते हैं और याद रखते हैं। नम्बर भी अच्छे ला रहे हैं। आप इतनी मेहनत करती हैं तो हमारा भी कुछ फर्ज बनता है। ये क्या कह रही हो तुम सब? मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है। बेटा-बहू मेरा खूब ध्यान रखते हैं। मैं इन रुपयों का क्या करूंगी? ज्ञान बांटने से बढता है कम नहीं होता। मेरे पास जो थोडा सा ज्ञान है इनमें बांट देती हूं। करुणा जी ने लाख मना किया पर वे सब नहीं मानीं। करुणा जी को वे रुपए लेने पडे। उनके पास तीन हजार रुपए थे। यानि साल में छत्तीस हजार। वे इतने रुपयों का क्या करेंगी? सोच रही थीं- तभी उन्हें ख्याल आया। अगले सप्ताह दिवाली है। करुणाजी ने सारी बात हार्दिक और खुशी को बताई। खुशी और हार्दिक ने हंसते हुए कहा-मम्मी, आपकी पहली कमाई है। अपने पास रखिए। नहीं हार्दिक, बच्चों की कमाई बच्चों में बांट देना चाहती हूं। हम दीपावली पर अनाथाश्रम चलेंगे। बच्चों को मिठाई और पटाखे बाटेंगे। हर साल जितना पैसा इकट्ठा होगा जरूरतमंद संस्था को दे देंगे। करुणा जी के फैसले पर दोनों ने मुहर लगा दी। इस प्रकार दो साल और निकल गए। एक दिन करुणा जी हार्दिक और खुशी से बोलीं- तुम से कुछ कहना चाहती हूं बच्चों। मैं वहां रहती थी तो घर की साज-संवार कर लेती थी। बिन देख रेख के घर बेकार हो रहा है। मैं चाहती हूं तुम उसे बेच दो। जो पैसा मिले उसका एक तिहाई धरा को भी दे देना। शेष तुम रख लेना। मम्मी! आपके इस फैसले से मैं सहमत नहीं हूं। अभी हम घर किराए पर उठा देते हैं। एक कमरा अपने पास रख लेंगे। आप चिन्ता मत करो। मैं हूं न। हां तुम दोनों मेरी पूंजी हो। तभी तो निश्चिंत हूं। कहकर करुणा जी ने दोनों को गले लगा लिया।
मुकुंद बाबू की आज अन्तिम विदाई भी हो गई। सभी नाते-रिश्तेदार पूर्ण तृप्त हो करुणा जी की झोली में संवेदनाएं उडेल अपने-अपने नीडों की ओर उड गए। बेटी धरा भी अपने पति व बच्चों के साथ मां से मिलकर लौट गई। इस सबसे निबटते रात उतरने लगी। रह गया केवल हार्दिक और उसके बच्चे। अब चिंता हो आई- मम्मी अकेली कैसे रहेंगी? जब तक पापा रहे कोई चिन्ता नहीं थी। दोनों मिलकर आराम से रह रहे थे। अब क्या करे वह? मम्मी से क्या कहे वह? पता नहीं मम्मी इतनी जल्दी साथ भी चलेगी या नहीं? पूरी रात यही सोचते करवटों में कट गई। इससे पहले मां को लेकर कभी चिन्ता नहीं हुई थी। कुछ भी कहते संकोच नहीं हुआ था, पर पापा के जाने के बाद मम्मी को देखना रहता है, उसके मुंह से शब्द नहीं फूटते। मां के कंधे पर सिर रखने वाला बेटा अब मां का सिर अपने कंधे पर टिका लेता है। मैं हूं न मां, आप चिन्ता क्यों करती हैं? मैं चिंता क्या करूंगी? पर चालीस साल का साथ छूटा है- अच्छा-बुरा, हंसते-रोते, लडते-झगडते- कैसे भुला सकती हूं। मम्मी, मैंने भी पापा को खोया है। उनके रहते मैं कितना निश्चिन्त था। मेरी हर समस्या का समाधान उनके पास था। पापा हाथ छुडाकर चले गए हैं। कितना अकेला हो गया हूं मैं! और मां-बेटे दोनों अपने-अपने आंसू बहने देते। आकर उन्हें संभालती। बच्चे कहते- दादी मां, आप और पापा रोएंगे तो हम भी रोएंगे। हमें भी अपने दादा जी चाहिए। उनके जाने से हमारी खुशी छिन गई है। करुणा जी झट अपने आंसू पोंछ लेतीं और मुस्कराकर कहतीं- कहां रो रही हूं। बस तुम्हारे दादाजी याद आ गए। सबको उदास देखकर बच्चे भी उदास रहते। पहले की तरह मस्ती नहीं करते और न कोई चीज लेने की जिद्द। जैसे बच्चे भी समझदार हो गए। करुणा जी को नहीं छोडते क्योंकि वे सारा समय औरतों से घिरी मुख नीचा किए बैठी रहती हैं या रोती रहती हैं। अजीब सा माहौल है। बहुत हिम्मत कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आपसे कुछ कहना है। तेरी उलझन मैं समझ रही हूं हार्दिक। जो तू पूछना या कहना चाहता है मुझे मालूम है। जो तेरी उलझन है वह मेरी भी है। तू इसे आज महसूस कर रहा है, मैंने कई दिन पहले महसूस कर लिया था। तेरी छोटी मौसी वत्सला कुछ समय मेरे पास रहेगी। तू निश्चिन्त होकर जा। और आगे की बाद में सोचेंगे। वह कल शाम तक आ जाएगी। वह तो ठीक है मम्मी, लेकिन आपको इस अवस्था में अकेले कैसे छोड सकता हूं, और इतनी जल्दी चलने को भी कैसे कह सकता हूं। तू इतनी चिन्ता मत कर। कहा न कि वत्सला रहेगी मेरे पास। कुछ वक्त लगेगा, धीरे-धीरे जीवन पटरी पर आ जाएगा। एकदम घर में ताला लगाकर तेरे साथ चल भी नहीं सकती। इस घर का आदमी मेरा पति, तेरा पिता गया है। कोई बाहर का नहीं। अभी उनके प्रति मेरे कुछ कर्तव्य हैं। जिन्हें पूरा करना है। जब तेरी जरूरत होगी, फोन पर बता दूंगी। कल वत्सला के आने पर तू निकल जाना। तब तक हलवाई, टैन्ट वालों या अन्य किसी का हिसाब करना हो निबटा लेना। अपना सामान तैयार कर ले। खुशी को भी बता दे। संकोच करने से काम नहीं चलने वाला। कुछ देर बैठकर हार्दिक उठ गया। फिर लौटकर करुणाजी को एक लिफाफा देकर बोला- मम्मी, इसे मेरे जाने के बाद खोलना। करुणा जी ने लिफाफा अलमारी में रख लिया। वत्सला के आने पर हार्दिक चला गया। करुणा जी ने लिफाफा खोलकर देखा, हजार-हजार के दस नोटों के साथ एक छोटी सी चिट भी थी- जल्दी ही आऊंगा। करुणाजी ने लिफाफा आंखों से लगाया और जहां से निकाला था वहीं रख दिया। आंखें नम हो आई। कभी धरा आ जाती, कभी वत्सला और कभी हार्दिक। हार्दिक जब भी आता करुणा जी को एक लिफाफा थमा जाता और वे संभालकर रख लेंती। इसी प्रकार एक साल निकल गया। मुकुन्द जी की बरसी पर हार्दिक के आने से पहले ही वत्सला, धरा और करुणा जी ने सारी व्यवस्था कर ली। हार्दिक बरसी की पूर्व संध्या पर पहुंच गया। उसे आश्चर्य हुआ- मैं आ तो रहा था मम्मी। आपने सारा आयोजन कैसे किया? इतने सारे रुपए की व्यवस्था कहां से की? मैंने कुछ नहीं किया। सब तेरी बहिन और मौसी ने किया है। पैसे सारे तूने ही खर्च किए हैं? मैंने..? आश्चर्य से पूछा हार्दिक ने। हां, जब भी तू आता, मुझे रुपए थमा जाता। बस उन्हीं रुपयों से सब व्यवस्था हो गई। और मम्मी, आपका खर्चा..? सब चल गया। कुछ तेरे पापा छोड गए थे, कुछ पेंशन मिल जाती है। शायद तूने इधर नहीं सोचा। अब सारी चिन्ता छोड। सब आराम से चल रहा है। करुणाजी को लोगों ने समझाया कि बहू-बेटे के पास जाकर रहने से स्वयं को अपमानित कराना है। दो-चार दिन के लिए जाओ तो बहू से सम्मान मिलता है और जब हमेशा के लिए जाकर रहने लगो तो वही सम्मान अपमान में बदल जाता है। यह बात कहीं न कहीं करुणा जी के मन में भी थी। वे बहाने बनाकर हार्दिक के साथ जाना टालती रहीं। एक दिन थक कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आप क्या समझती हैं मैं आपका ध्यान नहीं रख सकता। यदि आप कभी अपमानित महसूस करें तो मुझे बता देना। मैं आपको यहीं छोड जाऊंगा। आपके रहते यह घर नहीं बेचूंगा। एक बार आप अपने बच्चों पर विश्वास करके देखिए। खुशी आपका इंतजार कर रही है। अब स्वयं को नहीं रोक सकी करुणा जी। अपना जरूरी सामान पैक किया। घर का ताला लगा दिया और स्वयं हार्दिक के साथ आ गई। करुणा जी के कमरे में ए.सी. लगा था, कलर टी.वी. था, अटैच बाथरूम यानि सुविधा का सभी सामान था। बच्चों ने करुणा जी को हांथों-हाथ लिया। उन्हें कोई किसी काम में हाथ न लगाने देता। पूरे समय काम करने के लिए नौकर जो था। बच्चे स्कूल से लौटकर दादी मां-दादी मां कहकर उन्हें घेर लेते। बच्चे दादी मां के साथ खूब खुश रहते। हार्दिक और खुशी भी करुणा जी के आने से काफी निश्चिन्त हो गए थे। वीक एंड पर सब घूमने जाते। करुणा जी बच्चों को होमवर्क करा देतीं। उनके साथ लूडो, कैरम, अन्ताक्षरी खेलतीं, कहानियां सुनातीं। करुणा जी उन्हें रस्सी घुमाना सिखातीं। धीरे-धीरे दस-बारह बच्चों का ग्रुप बन गया। करुणा जी उन्हें रोज नए-नए खेल खिलातीं। कभी कहानियां सुनातीं। बच्चे अपने प्रश्नों के उत्तर करुणाजी से पाकर सन्तुष्ट होते। करुणाजी कभी-कभी अपने साथ टॉफी, चाकलेट्स या बिस्कुट के पैकेट ले आतीं और बच्चों में बांट देती। बच्चों की मम्मियों से भी उनकी दोस्ती हो गई। बच्चे अपने जन्मदिन पर करुणाजी को अपने घर निमंत्रित करते अथवा उनके घर कोई उत्सव होता तो करुणा जी को न्यौता अवश्य मिलता। वे इला और कार्तिक के साथ चली जातीं। धीरे-धीरे सभी बच्चे अपना होमवर्क भी करुणा जी के पास बैठकर पूरा करने लगे। उन्हें पढाते हुए समय का पता ही न चलता। कब पंख लगाकर गुजर जाता। कभी दो-चार दिन के लिए घर लौटतीं तो बच्चे रोज फोन करते- अम्मा जी, कब लौट रही हैं? हमारा मन नहीं लग रहा। आप जल्दी आइए। करुणाजी की आंखें भर आतीं। ये कैसा बंधन? एक टूटा दूसरा जुड गया। आगे वक्त कैसे कटेगा वे इस चिन्ता से मुक्त हो गई। करुणा जी के लौटने पर बच्चे खूब खुश होते। धीरे-धीरे पुराने रूटीन पर लौट आते। एक दिन बच्चों की मम्मियां उनके पास आई और उनके पैरों में एक-एक लिफाफा रख दिया। उन्हें बडा आश्चर्य हुआ। उत्सुकता भी हुई कि देखें लिफाफे में क्या है? उन्होंने एक लिफाफा खोला सौ-सौ के तीन नोट रखे थे। सभी लिफाफों में रुपए थे। उन्होंने पूछा- आप सब ये रुपए मुझे क्यों दे रही हैं? मांजी, बच्चे जब से आपके सम्पर्क में आए हैं, ट्यूशन पढना छोड दिया है। आप जो भी पढाती हैं, बहुत ध्यान से सुनते हैं और याद रखते हैं। नम्बर भी अच्छे ला रहे हैं। आप इतनी मेहनत करती हैं तो हमारा भी कुछ फर्ज बनता है। ये क्या कह रही हो तुम सब? मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है। बेटा-बहू मेरा खूब ध्यान रखते हैं। मैं इन रुपयों का क्या करूंगी? ज्ञान बांटने से बढता है कम नहीं होता। मेरे पास जो थोडा सा ज्ञान है इनमें बांट देती हूं। करुणा जी ने लाख मना किया पर वे सब नहीं मानीं। करुणा जी को वे रुपए लेने पडे। उनके पास तीन हजार रुपए थे। यानि साल में छत्तीस हजार। वे इतने रुपयों का क्या करेंगी? सोच रही थीं- तभी उन्हें ख्याल आया। अगले सप्ताह दिवाली है। करुणाजी ने सारी बात हार्दिक और खुशी को बताई। खुशी और हार्दिक ने हंसते हुए कहा-मम्मी, आपकी पहली कमाई है। अपने पास रखिए। नहीं हार्दिक, बच्चों की कमाई बच्चों में बांट देना चाहती हूं। हम दीपावली पर अनाथाश्रम चलेंगे। बच्चों को मिठाई और पटाखे बाटेंगे। हर साल जितना पैसा इकट्ठा होगा जरूरतमंद संस्था को दे देंगे। करुणा जी के फैसले पर दोनों ने मुहर लगा दी। इस प्रकार दो साल और निकल गए। एक दिन करुणा जी हार्दिक और खुशी से बोलीं- तुम से कुछ कहना चाहती हूं बच्चों। मैं वहां रहती थी तो घर की साज-संवार कर लेती थी। बिन देख रेख के घर बेकार हो रहा है। मैं चाहती हूं तुम उसे बेच दो। जो पैसा मिले उसका एक तिहाई धरा को भी दे देना। शेष तुम रख लेना। मम्मी! आपके इस फैसले से मैं सहमत नहीं हूं। अभी हम घर किराए पर उठा देते हैं। एक कमरा अपने पास रख लेंगे। आप चिन्ता मत करो। मैं हूं न। हां तुम दोनों मेरी पूंजी हो। तभी तो निश्चिंत हूं। कहकर करुणा जी ने दोनों को गले लगा लिया।
शनिवार, 13 फ़रवरी 2010
वेलेंटाइन
इजहार-ए-इश्क का बढ़ता क्रेज
PRPRएक खास दिन, खास धड़कन के लिए। मोहब्बत में गिरफ्तार युवा दिलों के लिए यह खास दिन उन्हें बेसब्र बना देता है। वे इस दिन इश्क का इजहार करने के लिए तमाम खूबसूरत कोशिशें करते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि इस दिन प्रपोज कर देने से हाँ के चांसेस ज्यादा होते हैं और रिजेक्ट होने के बहुत कम। युवा मानते हैं कि इस खास दिन पर इश्क का इजहार कर देने से एक नई और रोमांचक लव लाइफ की शुरुआत होती है। और बाजार में भी इस दिन के लिए खास गिफ्ट्स सज जाते हैं जो उनके दिलों की बात नाजुकता से कह देते हैं।
वेलेंटाइन डे नजदीक आते ही युवा दिलों में खलबली-सी मच जाती है। उनके लिए इस रोमांटिक दिन को सेलिब्रेट करने के साथ प्यार का इजहार करना भी खास मायने रखता है। प्यार करने वाले इस दिन जमाने की बंदिशों को तोड़ अपनों से मिलेंगे और प्यार का इजहार करेंगे। सभी ने इस दिन के लिए अलग-अलग प्लानिंग कर रखी है। कोई पार्क में जाकर दिन बिताएँगे तो कोई होटल में एक साथ लंच करेंगे।
युवाओं को पूरे सालभर प्यार के त्योहार का दिन वेलेंटाइन डे का इंतजार रहता है। अपने प्रेमी से प्यार का इजहार करने के लिए वे पहले से तैयारी करके रखते हैं। इसलिए तमाम विरोधों के बावजूद आज भी इस खास दिन पर एक-दूसरे को शुभकामना देने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 14 फरवरी आते ही तमाम ब्रांड्स प्रेम की इस भावना को भुनाने में पुरजोर कोशिशों में जुट जाते हैं। युवा भी गिफ्ट्स ,चॉकलेट्स, सॉफ्ट टॉयज आदि से प्यार के इजहार के दिन को एक यादगार पल बनाने की कोशिश करते हैं।
हाँ में जवाब मिलता है इस दिन
स्वरित सिन्हा कहते हैं कि अक्सर हमें प्यार के इजहार के लिए शब्द नहीं मिल पाते और आम दिन में हम प्यार का इजहार नहीं कर पाते है, लेकिन वेलेंटाइन डे पर वेलेंटाइन को प्रपोज करने पर हाँ में जवाब मिलने का चांस ज्यादा रहता है। इस दिन वे लड़के भी लड़कियों को फेस-टू-फेस प्रपोज कर सकते हैं जो किसी और दिन प्रपोज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। इस दिन हर तरफ रहने वाले प्यार के माहौल के बीच किसी को प्रपोज करने से बहुत फर्क पड़ता है। इसलिए यह दिन खास हो जाता है। ङ"ख११ऋ
365 दिन हैं वेलेंटाइन डे
सुनील सावले कहते हैं कि यदि हम किसी लड़की की पसंदीदा बात और व्यवहार को सही तरीके से समझ सकते हैं तो हमें प्यार का इजहार करने के लिए वेलेंटाइन डे का इंतजार नहीं होगा। इस दिन प्यार का इजहार करने का इतना ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता है। यदि हम अपने वेलेंटाइन से सही मायने में प्यार करते हैं तो 365 दिन ही वेलेंटाइन डे की तरह हो सकते हैं। प्रपोज करने पर हाँ या ना में जवाब मिलना लड़की पर निर्भर करता है न कि वेलेंटाइन डे पर।
दिल की बात कहते गिफ्ट्स
विशाल अढलोक कहते हैं कि वेलेंटाइन डे प्यार का प्रतीक त्योहार है और प्यार का यह दिन हर युवाओं के लिए खास मायने रखता है। इस दिन प्यार का इजहार करने में दिक्कतें तो आती हैं, लेकिन गिफ्ट हमारा यह काम आसान कर देते हैं। वहीं वेलेंटाइन डे पर प्यार का इजहार करने की खास वजह यह है कि वेलेंटाइन को अपनी दिल की बात कहने पर उनकी ओर से जवाब हाँ होता है। इसलिए इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। वहीं लड़कियाँ इस दिन ना की जगह हाँ में जवाब देना काफी पसंद करती हैं।
रिजेक्ट करने के चांस कम
सुरभि वर्मा (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि प्यार का इजहार करने की हिम्मत न जुटा पाने वाले युवाओं की मदद वेलेंटाइन डे बखूबी करता है। हमसे प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को रिजेक्ट करने के चांस कम ही होते हैं। यही वजह है कि वेलेंटाइन डे पर इजहार करने का क्रेज बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इस दिन इजहार करने पर नए रिश्ते बेहतर बनते हैं। लड़कों के साथ लड़कियों की भी यह ख्वाहिश रहती है कि कोई वेलेंटाइन उन्हें इस दिन प्रपोज करे।
किसी दिन का मोहताज नहीं प्यार
साक्षी यादव (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि लड़कियों में इस दिन प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को हाँ करने केचांस ज्यादा जरूर होते हैं लेकिन प्यार का इजहार करने के लिए कोई दिन ज्यादा मायने नहीं रखता। इस दिन लड़का यदि किसी लड़की से प्यार का इजहार करता है तो यह जरूरी नहीं कि हमसे वाकई ही प्रेम करता हो। इसलिए कुछ प्रपोज को रिजेक्ट करने का चांस भी ज्यादा होता है। यदि कोई हमसे वाकई प्यार करता है तो वह हमें 14 फरवरी हो या फिर 14 दिसंबर कभी भी अपने प्यार का इजहार कर देगा।
लव लाइफ की नई शुरुआत
सतीश भीलाला कहते हैं कि प्यार करने वालों के लिए हर दिन कुछ खास होता है, लेकिन वेलेंटाइन डे की बात ही कुछ और है। नया साल आते ही युवाओं को इंतजार होता है इस प्रेम दिवस का। हर युवा चाहता है कि इस दिन प्यार का इजहार करने से लव लाइफ की बेहतर शुरुआत होती है। प्यार के इजहार का यह दिन खास हो तो किसी प्रश्न की गुंजाइश ही नहीं होती। युवाओं ने वेलेंटाइन डे की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं, शायद तब कहीं जाकर इस दिन को सही मायनों में अपने वेलेंटाइन के साथ सेलिब्रेट कर सकते हैं।
वेलेंटाइन डे: सिर्फ कैंडल लाइट डिनर नहीं
- हंसिका मोटवानी
वेलेंटाइन डे मनाने का चक्कर हाल ही के कुछ सालों में ज्यादा देखने में आया है। मेरे ख्याल से ये डे मनाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि सभी का उद्देश्य खुशी ही देना होता है। वेलेंटाइन डे को लेकर मेरा कोई निजी एक्सपीरिएंस नहीं है पर जो देखती हूँ या दोस्तों के साथ जो डिस्कस होता है, वही आपके साथ शेयर कर रही हूँ।
अपना अपना सोच है
मेरा मानना है कि वेलेंटाइन डे जरूर मनाना चाहिए पर इसे इंडिविजुअल पर छोड़ देना चाहिए कि वह इसे मनाना चाहता है या नहीं। जिनके बॉयफ्रेंड,गर्लफ्रेंड हैं और उनसे वे रिलेशनशिप को और आगे बढ़ाना चाहते हैं और अपने मन की बात कहना चाहते हैं, तब यह दिन उनके लिए सबसे अच्छा है।
मैं वेलेंटाइन डे पर बाहर जाती हूँ, ढेर सारे रेड रोजेज खरीदती हूँ और घर पर आकर मम्मी को देती हूँ। कई बार मैंने वैंलेटाइन डे पर स्वयं को ही पेम्पर किया है। इस दिन हम स्वयं को खुश क्यों नहीं कर सकते और इसके लिए स्वयं को ही एकाध गिफ्ट देने में क्या हर्ज है? वेलेंटाइन डे केवल रेड रोजेज या कैंडल लाइट डिनर नहीं है।
इस दिन हम अपने प्रियजनों को खुश देखना चाहते हैं और उनकी खुशी को बढ़ाने के लिए प्रयास करते हैं। और खुशी छोटे से कार्ड से या फिर केवल एक कप कॉफी पर ढेर सारी बातचीत करने से भी मिल सकती है। मैं केवल वैंलेटाइन डे पर ही अपने विचार आप तक नहीं पहुँचाना चाहती बल्कि युवाओं से जुड़े तमाम मुद्दो पर मैं अपने दोस्तो के साथ डिस्कस जरूर करती हूँ।कचफिल्म अभिनेत्री
युवाओं को राजनीति में आना चाहिए
आजकल सबकुछ युवाओं के अनुसार ही सोचा जाता है और बात सही भी है। युवाओं में ऊर्जा है, जोश है और एक नया सोच है। इसका उपयोग देश की तरक्की के लिए करना ही चाहिए और प्रत्येक युवा को देश के बारे में पहले सोचना चाहिए। युवाओं को राजनीति में जरूर आना चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि केवल युवा ही क्यों, सभी उम्र के लोगों को यह सोचना चाहिए है कि हम देश के लिए क्या कर रहे हैं? और बिना देर किए अपनी तरफ से प्रयास शुरू कर देने चाहिए।
डाउन टू अर्थ रहें
मेरी किस्मत थी कि मुझे फिल्मों में काफी कम उम्र में ब्रेक मिल गया और सफलता भी मिली। इस सफलता को मैंने अपने सिर नहीं चढ़ने दिया। आज भी मैं शूटिंग से घर पहुँचती हूँ तब घर का काम करती हूँ और परिवार के सदस्यों के लिए खाना भी मैं ही बनाती हूँ।
अपनी मम्मी के साथ किराने के स्टोर पर सामान खरीदने भी जाती हूँ और घर की साफ-सफाई में भी हाथ बँटाती हूँ। दरअसल मैं यह सब आपको इसलिए बता रही हूँ कि अगर आप जिंदगी में सफलता पाने के बाद डाउन टू अर्थ रहेंगे तब अगली सफलता जल्द मिलेगी, यह निश्चित है। और जहाँ तक सफलता प्राप्ति की बात है, लगातार प्रयत्न करना और मेहनत करने से ही सफलता मिलेगी।
फ्रैंडशिप के फाइव फंडे
दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। ऐसे दोस्तों की दोस्ती बहुत मायने रखती है, क्योंकि ऐसे दोस्त बिना कोई स्वार्थ और मतलब के निराशा में आपका हाथ थाम लेते हैं। बिगड़ी स्थितियों में मदद का हाथ बढ़ाते हैं और धीरे-से कंधे पर हाथ धरकर पक्की दोस्ती का अहसास कराते हैं। इसलिए पाँच चीजों का ध्यान रखकर ऐसे दोस्तों को संभाल लीजिए।
इन दिनों सलमान खान और अजय देवगन की जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म "लंदन ड्रीम्स" की बहुत चर्चा है। कहते हैं, यह दो दोस्त और उनकी दोस्ती की कहानी है। जिंदगी में एक भी सच्चा दोस्त हो तो जिंदगी ज्यादा बेहतर और खुशहाल हो जाती है। यह कतई जरूरी नहीं कि आपके बहुत सारे दोस्त हों लेकिन वह दोस्त आपको रिस्पेक्ट नहीं करे, आपको प्यार नहीं करे और आपको जाने-समझे नहीं तो दोस्ती के क्या मायने। इसलिए जिंदगी में एक दोस्त, एक सच्चा दोस्त होना जरूरी है, क्योंकि यही दोस्त आपका निराशा में हाथ थामकर रोशनी में ला खड़ा कर सकता है और यही दोस्त खुशी में आपके साथ नाच-गा सकता है। हर स्टूडेंट यह चाहता है कि दोस्तों की भीड़ में उसका कोई एक ही सही, ऐसा दोस्त हो जो उसको बेहतर ढंग से जाने-समझे, प्यार करे।
ऑनेस्टी
दोस्ती में ऑनेस्टी सबसे बड़ा मूल्य है। यदि फ्रैंडशिप में ऑनेस्टी होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। कई बार देखा गया है कि ऑनेस्टी न होने के कारण ही कॉलेजेस में कई अच्छी दोस्ती टूट जाती हैं और जिंदगी में हमेशा के लिए एक कड़वा स्वाद दे जाती है। कई स्टूडेंट इस अनुभव को जिंदगीभर नहीं भूल पाते हैं। इसलिए अपने दोस्त के प्रति ईमानदार रहें।
लव एंड केयर
दोस्ती में प्यार-मोहब्बत न हो तो मजा ही क्या है। लेकिन प्यार-मोहब्बत का मतलब किसी तरह का स्वार्थ नहीं होता। यह किसी मतलब से नहीं की जाती और न ही इसके जरिए कोई मतलब हासिल किया जाता है। इसमें तो एक-दूसरे के प्रति लव एंड केयर की भावना होती है। एक-दूसरे का ध्यान रखा जाता है, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखा जाता है।
यदि प्यार-मोहब्बत हो और अंडरस्टैंडिंग न हो तो भी बात नहीं बनती। कई बार दोस्तों में दरार आ जाती है और दोस्ती टूट जाती है। इसका एक बड़ा कारण होता है अंडरस्टैंडिंग की कमी। यदि दो दोस्तों के बीच बेहतर अंडरस्टैंडिंग होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। अपने दोस्त को बेहतर ढंग से जानने-समझने की कोशिश करेंगे, तो गलतफहमियाँ पैदा नहीं होंगी।
रिस्पेक्ट
कई बार मौज और मस्ती के मूड में, जोश और जुनून में दोस्त अपने दोस्तों से ऐसी मजाक कर बैठते हैं, जो उन्हें नागवार गुजरता है। उन्हें इंसल्टिंग फील होता है। इसलिए यह ध्यान रखें कि आपका कितना भी अच्छा फ्रैंड हो, आपके कितने भी बेतकल्लुफ रिश्ते हों लेकिन वह आपसे चाहता है कि आप उसका रिस्पेक्ट करें। अक्सर दोस्त यह भूल जाते हैं। दोस्तों का रिस्पेक्ट करें।
कमिटमेंट
कमिटमेंट जीवन का एक ऐसा मूल्य है, जो आपको भी और आपके दोस्त को भी एक बेहतर इंसान बनाता है। कमिटमेंट का मतलब एक तरह का वादा। यह दूसरे के प्रति कुछ करने का जज्बा होता है। इसी जज्बे को कहते हैं कमिटमेंट। दूसरे के प्रति जुड़ाव का भाव, उसके प्रति जिम्मेदारी का बोध, यही कमिटमेंट होता है। दोस्तों के प्रति कमिट रहें।
एक एहसास है सबसे जुदा
दायरों के बाहर भी एक दुनिया है... ये तुमने ही मुझे बताया...वो दायरे जो हम खुद बना लेते हैं या हमें बने हुए मिलते हैं...तुम कैसे उन सभी दायरों के बाहर हमेशा मुझे मुस्कुराती हुईं खड़ी मिलतीं...हाँ तुम जब हाथ थामकर मुझे उन दायरों से बाहर ले गईं तो वो दुनिया अलग थी...
जिसका एहसास करना तो बहुत आसान हुआ करता लेकिन तुम्हारी आँखों में झाँकते हुए उन एहसासों को नाम देना उतना ही मुश्किल... हाँ बहुत मुश्किल पर जब भी तुम साथ चलते हुए यूँ ही मेरा हाथ थाम लेतीं तो यूँ लगता कि मुझे उस एहसास का नाम मिल गया हो...
तुम्हारे साथ उन भूले हुए दायरों और बहुत कहीं पीछे छूट गए रिश्तों के नाम को मैं याद ना तो किया करता और ना ही मुझे याद रहते। ऐसे कई अनगिनत तुम्हारे पूछे गए सवालों को मैं अपने कुर्ते की जेब में संभालकर रखता और तुम्हारे इंतजार में उन्हें बार-बार एक-एक करके निकालता...शायद किसी सवाल का जवाब मुझे मिल जाए...
हाँ लेकिन उन सवालों में छुपी हुई, घुली हुई तुम्हारी यादों को में एक-एक करके हाथ पर रखता और अपने चेहरे पर मल लेता...देखना चाहता कि तुम्हारी यादों के साथ मेरा चेहरा कैसा दिखता है...
सच कहूँ तो मैं ठीक से आज भी अपने चेहरे को उन यादों के साथ महसूस करने की कितनी भी कोशिश करूँ वो चेहरा कहीं दिखाई नहीं पड़ता... शायद वो चेहरा तुम अपने साथ जो ले गई हों...हाँ साथ ही ले गई होगी...नहीं तो मुझे मेरा चेहरा यूँ अजनबी-सा ना लगता, हाँ अगर कुछ याद रहता है तो वो पल जब तुमने उस रोज हमारे आस पास उन सभी एहसासों को बुला लिया था... और हम रिश्तों के दायरों से बहुत दूर कहीं एहसासों की बसाई हुई दुनिया में खुद को पाया हुआ महसूस कर रहे थे...
हाँ वो पल सबसे जुदा था... मैंने खुद को तो पाया ही तुम्हें भी पा लिया था। रिश्तों के दायरों से दूर और तुम्हारे-मेरे एहसासों के नजदीक मैं तुम्हें आज भी खुद के साथ पाता हूँ... हाँ यही तो एक एहसास है जो सबसे जुदा... सबसे सुखद है... और जो हमेशा मेरे साथ रहता है।
PRPRएक खास दिन, खास धड़कन के लिए। मोहब्बत में गिरफ्तार युवा दिलों के लिए यह खास दिन उन्हें बेसब्र बना देता है। वे इस दिन इश्क का इजहार करने के लिए तमाम खूबसूरत कोशिशें करते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि इस दिन प्रपोज कर देने से हाँ के चांसेस ज्यादा होते हैं और रिजेक्ट होने के बहुत कम। युवा मानते हैं कि इस खास दिन पर इश्क का इजहार कर देने से एक नई और रोमांचक लव लाइफ की शुरुआत होती है। और बाजार में भी इस दिन के लिए खास गिफ्ट्स सज जाते हैं जो उनके दिलों की बात नाजुकता से कह देते हैं।
वेलेंटाइन डे नजदीक आते ही युवा दिलों में खलबली-सी मच जाती है। उनके लिए इस रोमांटिक दिन को सेलिब्रेट करने के साथ प्यार का इजहार करना भी खास मायने रखता है। प्यार करने वाले इस दिन जमाने की बंदिशों को तोड़ अपनों से मिलेंगे और प्यार का इजहार करेंगे। सभी ने इस दिन के लिए अलग-अलग प्लानिंग कर रखी है। कोई पार्क में जाकर दिन बिताएँगे तो कोई होटल में एक साथ लंच करेंगे।
युवाओं को पूरे सालभर प्यार के त्योहार का दिन वेलेंटाइन डे का इंतजार रहता है। अपने प्रेमी से प्यार का इजहार करने के लिए वे पहले से तैयारी करके रखते हैं। इसलिए तमाम विरोधों के बावजूद आज भी इस खास दिन पर एक-दूसरे को शुभकामना देने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 14 फरवरी आते ही तमाम ब्रांड्स प्रेम की इस भावना को भुनाने में पुरजोर कोशिशों में जुट जाते हैं। युवा भी गिफ्ट्स ,चॉकलेट्स, सॉफ्ट टॉयज आदि से प्यार के इजहार के दिन को एक यादगार पल बनाने की कोशिश करते हैं।
हाँ में जवाब मिलता है इस दिन
स्वरित सिन्हा कहते हैं कि अक्सर हमें प्यार के इजहार के लिए शब्द नहीं मिल पाते और आम दिन में हम प्यार का इजहार नहीं कर पाते है, लेकिन वेलेंटाइन डे पर वेलेंटाइन को प्रपोज करने पर हाँ में जवाब मिलने का चांस ज्यादा रहता है। इस दिन वे लड़के भी लड़कियों को फेस-टू-फेस प्रपोज कर सकते हैं जो किसी और दिन प्रपोज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। इस दिन हर तरफ रहने वाले प्यार के माहौल के बीच किसी को प्रपोज करने से बहुत फर्क पड़ता है। इसलिए यह दिन खास हो जाता है। ङ"ख११ऋ
365 दिन हैं वेलेंटाइन डे
सुनील सावले कहते हैं कि यदि हम किसी लड़की की पसंदीदा बात और व्यवहार को सही तरीके से समझ सकते हैं तो हमें प्यार का इजहार करने के लिए वेलेंटाइन डे का इंतजार नहीं होगा। इस दिन प्यार का इजहार करने का इतना ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता है। यदि हम अपने वेलेंटाइन से सही मायने में प्यार करते हैं तो 365 दिन ही वेलेंटाइन डे की तरह हो सकते हैं। प्रपोज करने पर हाँ या ना में जवाब मिलना लड़की पर निर्भर करता है न कि वेलेंटाइन डे पर।
दिल की बात कहते गिफ्ट्स
विशाल अढलोक कहते हैं कि वेलेंटाइन डे प्यार का प्रतीक त्योहार है और प्यार का यह दिन हर युवाओं के लिए खास मायने रखता है। इस दिन प्यार का इजहार करने में दिक्कतें तो आती हैं, लेकिन गिफ्ट हमारा यह काम आसान कर देते हैं। वहीं वेलेंटाइन डे पर प्यार का इजहार करने की खास वजह यह है कि वेलेंटाइन को अपनी दिल की बात कहने पर उनकी ओर से जवाब हाँ होता है। इसलिए इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। वहीं लड़कियाँ इस दिन ना की जगह हाँ में जवाब देना काफी पसंद करती हैं।
रिजेक्ट करने के चांस कम
सुरभि वर्मा (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि प्यार का इजहार करने की हिम्मत न जुटा पाने वाले युवाओं की मदद वेलेंटाइन डे बखूबी करता है। हमसे प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को रिजेक्ट करने के चांस कम ही होते हैं। यही वजह है कि वेलेंटाइन डे पर इजहार करने का क्रेज बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इस दिन इजहार करने पर नए रिश्ते बेहतर बनते हैं। लड़कों के साथ लड़कियों की भी यह ख्वाहिश रहती है कि कोई वेलेंटाइन उन्हें इस दिन प्रपोज करे।
किसी दिन का मोहताज नहीं प्यार
साक्षी यादव (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि लड़कियों में इस दिन प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को हाँ करने केचांस ज्यादा जरूर होते हैं लेकिन प्यार का इजहार करने के लिए कोई दिन ज्यादा मायने नहीं रखता। इस दिन लड़का यदि किसी लड़की से प्यार का इजहार करता है तो यह जरूरी नहीं कि हमसे वाकई ही प्रेम करता हो। इसलिए कुछ प्रपोज को रिजेक्ट करने का चांस भी ज्यादा होता है। यदि कोई हमसे वाकई प्यार करता है तो वह हमें 14 फरवरी हो या फिर 14 दिसंबर कभी भी अपने प्यार का इजहार कर देगा।
लव लाइफ की नई शुरुआत
सतीश भीलाला कहते हैं कि प्यार करने वालों के लिए हर दिन कुछ खास होता है, लेकिन वेलेंटाइन डे की बात ही कुछ और है। नया साल आते ही युवाओं को इंतजार होता है इस प्रेम दिवस का। हर युवा चाहता है कि इस दिन प्यार का इजहार करने से लव लाइफ की बेहतर शुरुआत होती है। प्यार के इजहार का यह दिन खास हो तो किसी प्रश्न की गुंजाइश ही नहीं होती। युवाओं ने वेलेंटाइन डे की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं, शायद तब कहीं जाकर इस दिन को सही मायनों में अपने वेलेंटाइन के साथ सेलिब्रेट कर सकते हैं।
वेलेंटाइन डे: सिर्फ कैंडल लाइट डिनर नहीं
- हंसिका मोटवानी
वेलेंटाइन डे मनाने का चक्कर हाल ही के कुछ सालों में ज्यादा देखने में आया है। मेरे ख्याल से ये डे मनाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि सभी का उद्देश्य खुशी ही देना होता है। वेलेंटाइन डे को लेकर मेरा कोई निजी एक्सपीरिएंस नहीं है पर जो देखती हूँ या दोस्तों के साथ जो डिस्कस होता है, वही आपके साथ शेयर कर रही हूँ।
अपना अपना सोच है
मेरा मानना है कि वेलेंटाइन डे जरूर मनाना चाहिए पर इसे इंडिविजुअल पर छोड़ देना चाहिए कि वह इसे मनाना चाहता है या नहीं। जिनके बॉयफ्रेंड,गर्लफ्रेंड हैं और उनसे वे रिलेशनशिप को और आगे बढ़ाना चाहते हैं और अपने मन की बात कहना चाहते हैं, तब यह दिन उनके लिए सबसे अच्छा है।
मैं वेलेंटाइन डे पर बाहर जाती हूँ, ढेर सारे रेड रोजेज खरीदती हूँ और घर पर आकर मम्मी को देती हूँ। कई बार मैंने वैंलेटाइन डे पर स्वयं को ही पेम्पर किया है। इस दिन हम स्वयं को खुश क्यों नहीं कर सकते और इसके लिए स्वयं को ही एकाध गिफ्ट देने में क्या हर्ज है? वेलेंटाइन डे केवल रेड रोजेज या कैंडल लाइट डिनर नहीं है।
इस दिन हम अपने प्रियजनों को खुश देखना चाहते हैं और उनकी खुशी को बढ़ाने के लिए प्रयास करते हैं। और खुशी छोटे से कार्ड से या फिर केवल एक कप कॉफी पर ढेर सारी बातचीत करने से भी मिल सकती है। मैं केवल वैंलेटाइन डे पर ही अपने विचार आप तक नहीं पहुँचाना चाहती बल्कि युवाओं से जुड़े तमाम मुद्दो पर मैं अपने दोस्तो के साथ डिस्कस जरूर करती हूँ।कचफिल्म अभिनेत्री
युवाओं को राजनीति में आना चाहिए
आजकल सबकुछ युवाओं के अनुसार ही सोचा जाता है और बात सही भी है। युवाओं में ऊर्जा है, जोश है और एक नया सोच है। इसका उपयोग देश की तरक्की के लिए करना ही चाहिए और प्रत्येक युवा को देश के बारे में पहले सोचना चाहिए। युवाओं को राजनीति में जरूर आना चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि केवल युवा ही क्यों, सभी उम्र के लोगों को यह सोचना चाहिए है कि हम देश के लिए क्या कर रहे हैं? और बिना देर किए अपनी तरफ से प्रयास शुरू कर देने चाहिए।
डाउन टू अर्थ रहें
मेरी किस्मत थी कि मुझे फिल्मों में काफी कम उम्र में ब्रेक मिल गया और सफलता भी मिली। इस सफलता को मैंने अपने सिर नहीं चढ़ने दिया। आज भी मैं शूटिंग से घर पहुँचती हूँ तब घर का काम करती हूँ और परिवार के सदस्यों के लिए खाना भी मैं ही बनाती हूँ।
अपनी मम्मी के साथ किराने के स्टोर पर सामान खरीदने भी जाती हूँ और घर की साफ-सफाई में भी हाथ बँटाती हूँ। दरअसल मैं यह सब आपको इसलिए बता रही हूँ कि अगर आप जिंदगी में सफलता पाने के बाद डाउन टू अर्थ रहेंगे तब अगली सफलता जल्द मिलेगी, यह निश्चित है। और जहाँ तक सफलता प्राप्ति की बात है, लगातार प्रयत्न करना और मेहनत करने से ही सफलता मिलेगी।
फ्रैंडशिप के फाइव फंडे
दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। ऐसे दोस्तों की दोस्ती बहुत मायने रखती है, क्योंकि ऐसे दोस्त बिना कोई स्वार्थ और मतलब के निराशा में आपका हाथ थाम लेते हैं। बिगड़ी स्थितियों में मदद का हाथ बढ़ाते हैं और धीरे-से कंधे पर हाथ धरकर पक्की दोस्ती का अहसास कराते हैं। इसलिए पाँच चीजों का ध्यान रखकर ऐसे दोस्तों को संभाल लीजिए।
इन दिनों सलमान खान और अजय देवगन की जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म "लंदन ड्रीम्स" की बहुत चर्चा है। कहते हैं, यह दो दोस्त और उनकी दोस्ती की कहानी है। जिंदगी में एक भी सच्चा दोस्त हो तो जिंदगी ज्यादा बेहतर और खुशहाल हो जाती है। यह कतई जरूरी नहीं कि आपके बहुत सारे दोस्त हों लेकिन वह दोस्त आपको रिस्पेक्ट नहीं करे, आपको प्यार नहीं करे और आपको जाने-समझे नहीं तो दोस्ती के क्या मायने। इसलिए जिंदगी में एक दोस्त, एक सच्चा दोस्त होना जरूरी है, क्योंकि यही दोस्त आपका निराशा में हाथ थामकर रोशनी में ला खड़ा कर सकता है और यही दोस्त खुशी में आपके साथ नाच-गा सकता है। हर स्टूडेंट यह चाहता है कि दोस्तों की भीड़ में उसका कोई एक ही सही, ऐसा दोस्त हो जो उसको बेहतर ढंग से जाने-समझे, प्यार करे।
ऑनेस्टी
दोस्ती में ऑनेस्टी सबसे बड़ा मूल्य है। यदि फ्रैंडशिप में ऑनेस्टी होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। कई बार देखा गया है कि ऑनेस्टी न होने के कारण ही कॉलेजेस में कई अच्छी दोस्ती टूट जाती हैं और जिंदगी में हमेशा के लिए एक कड़वा स्वाद दे जाती है। कई स्टूडेंट इस अनुभव को जिंदगीभर नहीं भूल पाते हैं। इसलिए अपने दोस्त के प्रति ईमानदार रहें।
लव एंड केयर
दोस्ती में प्यार-मोहब्बत न हो तो मजा ही क्या है। लेकिन प्यार-मोहब्बत का मतलब किसी तरह का स्वार्थ नहीं होता। यह किसी मतलब से नहीं की जाती और न ही इसके जरिए कोई मतलब हासिल किया जाता है। इसमें तो एक-दूसरे के प्रति लव एंड केयर की भावना होती है। एक-दूसरे का ध्यान रखा जाता है, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखा जाता है।
यदि प्यार-मोहब्बत हो और अंडरस्टैंडिंग न हो तो भी बात नहीं बनती। कई बार दोस्तों में दरार आ जाती है और दोस्ती टूट जाती है। इसका एक बड़ा कारण होता है अंडरस्टैंडिंग की कमी। यदि दो दोस्तों के बीच बेहतर अंडरस्टैंडिंग होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। अपने दोस्त को बेहतर ढंग से जानने-समझने की कोशिश करेंगे, तो गलतफहमियाँ पैदा नहीं होंगी।
रिस्पेक्ट
कई बार मौज और मस्ती के मूड में, जोश और जुनून में दोस्त अपने दोस्तों से ऐसी मजाक कर बैठते हैं, जो उन्हें नागवार गुजरता है। उन्हें इंसल्टिंग फील होता है। इसलिए यह ध्यान रखें कि आपका कितना भी अच्छा फ्रैंड हो, आपके कितने भी बेतकल्लुफ रिश्ते हों लेकिन वह आपसे चाहता है कि आप उसका रिस्पेक्ट करें। अक्सर दोस्त यह भूल जाते हैं। दोस्तों का रिस्पेक्ट करें।
कमिटमेंट
कमिटमेंट जीवन का एक ऐसा मूल्य है, जो आपको भी और आपके दोस्त को भी एक बेहतर इंसान बनाता है। कमिटमेंट का मतलब एक तरह का वादा। यह दूसरे के प्रति कुछ करने का जज्बा होता है। इसी जज्बे को कहते हैं कमिटमेंट। दूसरे के प्रति जुड़ाव का भाव, उसके प्रति जिम्मेदारी का बोध, यही कमिटमेंट होता है। दोस्तों के प्रति कमिट रहें।
एक एहसास है सबसे जुदा
दायरों के बाहर भी एक दुनिया है... ये तुमने ही मुझे बताया...वो दायरे जो हम खुद बना लेते हैं या हमें बने हुए मिलते हैं...तुम कैसे उन सभी दायरों के बाहर हमेशा मुझे मुस्कुराती हुईं खड़ी मिलतीं...हाँ तुम जब हाथ थामकर मुझे उन दायरों से बाहर ले गईं तो वो दुनिया अलग थी...
जिसका एहसास करना तो बहुत आसान हुआ करता लेकिन तुम्हारी आँखों में झाँकते हुए उन एहसासों को नाम देना उतना ही मुश्किल... हाँ बहुत मुश्किल पर जब भी तुम साथ चलते हुए यूँ ही मेरा हाथ थाम लेतीं तो यूँ लगता कि मुझे उस एहसास का नाम मिल गया हो...
तुम्हारे साथ उन भूले हुए दायरों और बहुत कहीं पीछे छूट गए रिश्तों के नाम को मैं याद ना तो किया करता और ना ही मुझे याद रहते। ऐसे कई अनगिनत तुम्हारे पूछे गए सवालों को मैं अपने कुर्ते की जेब में संभालकर रखता और तुम्हारे इंतजार में उन्हें बार-बार एक-एक करके निकालता...शायद किसी सवाल का जवाब मुझे मिल जाए...
हाँ लेकिन उन सवालों में छुपी हुई, घुली हुई तुम्हारी यादों को में एक-एक करके हाथ पर रखता और अपने चेहरे पर मल लेता...देखना चाहता कि तुम्हारी यादों के साथ मेरा चेहरा कैसा दिखता है...
सच कहूँ तो मैं ठीक से आज भी अपने चेहरे को उन यादों के साथ महसूस करने की कितनी भी कोशिश करूँ वो चेहरा कहीं दिखाई नहीं पड़ता... शायद वो चेहरा तुम अपने साथ जो ले गई हों...हाँ साथ ही ले गई होगी...नहीं तो मुझे मेरा चेहरा यूँ अजनबी-सा ना लगता, हाँ अगर कुछ याद रहता है तो वो पल जब तुमने उस रोज हमारे आस पास उन सभी एहसासों को बुला लिया था... और हम रिश्तों के दायरों से बहुत दूर कहीं एहसासों की बसाई हुई दुनिया में खुद को पाया हुआ महसूस कर रहे थे...
हाँ वो पल सबसे जुदा था... मैंने खुद को तो पाया ही तुम्हें भी पा लिया था। रिश्तों के दायरों से दूर और तुम्हारे-मेरे एहसासों के नजदीक मैं तुम्हें आज भी खुद के साथ पाता हूँ... हाँ यही तो एक एहसास है जो सबसे जुदा... सबसे सुखद है... और जो हमेशा मेरे साथ रहता है।
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010
गुदगुदी
प्रेमी और प्रेमिका
प्रेमिका (गुस्से में)- आज के बाद मैं तुमसे कभी भी बात नहीं करूँगी।
प्रेमी- क्या, तुम गूँगी होने वाली हो?
प्रेमिका- नहीं..., मैं तुम्हें बहरा करने वाली हूँ।
चिंटूजी अपनी बीवी और बच्चे के साथ फिल्म देखने गए।
फिल्म चलते-चलते एक 'लव सीन' आ टपका।
जैसे ही हीरोइन और हीरो गले मिलकर प्यार करने लगे।
बच्चा जोर से चिल्लाया - मम्मी, पापा! देखो- देखो! ये बेईमान तो सरासर आपकी नकल कर रहा हैं।
प्रेमिका (गुस्से में)- आज के बाद मैं तुमसे कभी भी बात नहीं करूँगी।
प्रेमी- क्या, तुम गूँगी होने वाली हो?
प्रेमिका- नहीं..., मैं तुम्हें बहरा करने वाली हूँ।
चिंटूजी अपनी बीवी और बच्चे के साथ फिल्म देखने गए।
फिल्म चलते-चलते एक 'लव सीन' आ टपका।
जैसे ही हीरोइन और हीरो गले मिलकर प्यार करने लगे।
बच्चा जोर से चिल्लाया - मम्मी, पापा! देखो- देखो! ये बेईमान तो सरासर आपकी नकल कर रहा हैं।
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